लगातार जारी है FIIs की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भारतीय शेयर बाजारों से पैसा निकालने का सिलसिला मई 2026 की शुरुआत तक जारी रहा। यह लगातार 10वां महीना था जब FIIs ने शुद्ध बिकवाली की है। इस साल 2026 में अब तक उनकी कुल निकासी ₹1.92 लाख करोड़ को पार कर गई है, जो कि पूरे 2025 के दौरान हुई कुल बिकवाली से भी ज्यादा है। इस लगातार दबाव से डोमेस्टिक निवेशकों में विदेशी पूंजी की संभावित वापसी के समय को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
AI बूम में भारत पीछे छूटा?
ग्लोबल इन्वेस्टमेंट ट्रेंड्स साफ दिखा रहे हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेवलपमेंट में लीडर माने जाने वाले बाजारों की ओर भारी पूंजी प्रवाहित हो रही है। दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देश, Samsung Electronics (जिसका मार्केट कैप $1 ट्रिलियन से अधिक है), SK Hynix (लगभग ₩1.45 मिलियन पर कारोबार कर रहा है) और TSMC (लगभग $400.38 पर कीमत) जैसी सेमीकंडक्टर दिग्गजों में भारी इनफ्लो देख रहे हैं। इन कंपनियों को AI क्रांति का सीधा लाभार्थी माना जा रहा है। इसके विपरीत, कई विदेशी निवेशक भारत को इस ग्रोथ थीम में सीमित प्रत्यक्ष एक्सपोजर वाला मानते हैं। भारत में AI सप्लाई चेन में कोई बड़ी लिस्टेड कंपनी नहीं होने के कारण, इसे पोर्टफोलियो रीएलोकेशन से बाहर रखा गया है।
आर्थिक चुनौतियां भी बनीं बड़ी वजह
AI थीम के अलावा, भारत कई गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। भारतीय रुपया 2026 में विभिन्न समयों पर ₹84.27 से ₹95.36 के बीच कारोबार करते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हुआ है। पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, जो 2022 के बाद पहली बार $100 प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं, इस करेंसी कमजोरी को और बढ़ा रही हैं। इन कारकों का भारत की एनर्जी आयात लागत और व्यापार संतुलन पर सीधा असर पड़ता है। वित्तीय वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट घटकर $2.4 बिलियन हो गया था, लेकिन भविष्य के व्यापार पर बाहरी प्रभावों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। मार्च 2026 में इन्फ्लेशन (मुद्रास्फीति) सालाना आधार पर मामूली बढ़कर 3.40% हो गया, हालांकि यह सेंट्रल बैंक के टारगेट बैंड के भीतर ही रहा।
Valuations की मिली-जुली तस्वीर
लगातार आउटफ्लो और मैक्रोइकॉनॉमिक दबावों के बावजूद, मौजूदा बाजार Valuations एक मिली-जुली तस्वीर पेश कर रहे हैं। Nifty 50 का ट्रेलिंग P/E रेश्यो लगभग 20.94 है, जो इसके लॉन्ग-टर्म एवरेज के करीब है और अन्य इमर्जिंग मार्केट (EM) पीयर्स पर अपने ऐतिहासिक प्रीमियम की तुलना में काफी डिस्काउंट पर कारोबार कर रहा है। MSCI EM इंडेक्स की तुलना में भारत का वैल्यूएशन प्रीमियम घटकर लगभग 65% रह गया है। DSP MF के विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा बाजार स्तर अधिक उचित Valuations प्रदान करते हैं, खासकर लार्ज-कैप शेयरों में, और रुपये की कमजोरी इस आकर्षण को बढ़ा रही है। हालांकि Nomura और JPMorgan जैसे ग्लोबल ब्रोकरेज ने भारत के वैल्यूएशन प्रीमियम और सीमित AI एक्सपोजर को फ्लैग किया है, जिससे कुछ डाउनग्रेड हुए हैं, लेकिन डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) से ₹3 लाख करोड़ से अधिक का भारी इनफ्लो (इस साल अब तक) मिला है, जिसने महत्वपूर्ण सपोर्ट प्रदान किया है। यह एक डिवर्जेंस (अलग दिशा) दिखाता है, जिसमें डोमेस्टिक निवेशक विदेशी बिकवाली को एब्जॉर्ब कर रहे हैं।
विदेशी पूंजी के लिए आउटलुक
आगे चलकर, विश्लेषकों का अनुमान है कि FIIs की भारत में रुचि ग्लोबल कैपिटल फ्लो और डोमेस्टिक इकोनॉमिक सुधारों के संयोजन पर निर्भर करेगी। J.P. Morgan के स्ट्रैटेजिस्ट्स का सुझाव है कि आर्थिक संकेतकों में सुधार और मजबूत अर्निंग्स 2026 की दूसरी छमाही से बाजार में रैली ला सकती हैं, जिससे Nifty नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच सकता है। Goldman Sachs 2026 के लिए बुलिश फोरकास्ट बनाए हुए है, जिसमें डोमेस्टिक बाइंग और इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज द्वारा सपोर्टेड भारतीय इक्विटीज में रिकवरी का अनुमान है। एक स्थायी रिकवरी स्थिर कच्चे तेल की कीमतों, मजबूत रुपये और स्पष्ट अर्निंग्स बाउंस पर निर्भर करेगी, जिससे वर्तमान अवधि बाजार की मजबूती के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन जाती है।
