वैश्विक बाज़ारों से मिले खराब संकेतों के बीच, आज भारतीय शेयर बाज़ार में गिरावट का बड़ा सिलसिला देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में आई तूफानी तेज़ी और भारतीय रुपये में ऐतिहासिक गिरावट ने निवेशकों के सेंटीमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया।
30 अप्रैल 2026, को BSE Sensex 0.75% की भारी गिरावट के साथ 76,913.50 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, Nifty 50 में भी 0.74% की कमी आई और यह 23,997.55 पर थमा।
खाड़ी देशों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई बाधित होने की आशंकाओं के चलते कच्चे तेल की कीमतें आग उगल रही हैं। ब्रेंट क्रूड $110 प्रति बैरल के पार निकल गया, जबकि WTI क्रूड भी $106 के करीब पहुँच गया।
इसके समानांतर, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 95 के मनोबल को तोड़कर 95.322 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गिरा। रुपये में यह कमजोरी मुख्य रूप से कच्चे तेल के बढ़ते आयात बिल, विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) का नतीजा है।
भारत अपनी ज़रूरत का लगभग 89% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर देश की इकोनॉमी पर भारी पड़ती हैं। इससे महंगाई बढ़ने का सीधा ख़तरा मंडराने लगता है और आर्थिक स्थिरता पर भी सवाल खड़े हो जाते हैं।
विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिसने रुपये और बाज़ार दोनों पर दबाव और बढ़ा दिया है। घरेलू खरीदार सीमित सपोर्ट दे पा रहे हैं। मासिक ऑप्शंस एक्सपायरी (Monthly Options Expiry) के कारण दिन भर बाज़ार में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) रहा, और इंडिया VIX इंडेक्स 5% से ज़्यादा उछल गया।
इस बिकवाली का असर शेयर बाज़ार के लगभग सभी सेक्टर्स पर देखा गया। Nifty Metal, PSU Banks, Realty और FMCG इंडेक्स में 1% से 2% तक की गिरावट दर्ज की गई। कैपिटल गुड्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टरों में भी ज़बरदस्त बिकवाली हुई।
हालांकि, Infosys और Sun Pharma जैसी कंपनियों के शेयर IT और Pharma सेक्टर में मजबूती बनाए रखने में कामयाब रहे।
जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल के दाम में $20 प्रति बैरल की वृद्धि से भारत की अर्निंग ग्रोथ करीब 4% तक गिर सकती है। गिरता हुआ रुपया न केवल इम्पोर्ट की लागत बढ़ाता है, बल्कि देश की आर्थिक सेहत पर नकारात्मक संकेत भी देता है, जिससे पूंजी के बहिर्गमन (Capital Outflow) का ख़तरा बढ़ जाता है।
मार्च 2026 तक, Nifty 50 का P/E (Price to Earnings) रेश्यो लगभग 21 गुना था और मार्केट कैप करीब $4.3 ट्रिलियन था। ऐसे में, इन बढ़ते जोखिमों के चलते बाज़ार का वैल्यूएशन (Valuation) अब कम आकर्षक लग रहा है, जिससे आगे चलकर बाज़ार में सीमित गुंजाइश दिखाई दे रही है। मार्केट के एडवांस-डिक्लाइन रेश्यो का 0.66 पर बंद होना यह दर्शाता है कि गिरावट काफी व्यापक थी।
टेक्निकल लेवल की बात करें तो, Nifty 50 इंडेक्स के लिए 23,800 का स्तर इमीडिएट सपोर्ट का काम कर रहा है। अगर यह स्तर टूटता है, तो इंडेक्स 23,500 तक गिर सकता है। दूसरी ओर, 24,334 से 24,600 का ज़ोन रेजिस्टेंस का सामना कर सकता है।
आने वाले हफ्तों में, बाज़ार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और मिडिल ईस्ट की भू-राजनीतिक स्थिति पर निर्भर करेगी। बाज़ार खुलने पर निवेशक अमेरिकी और जापानी मैन्युफैक्चरिंग PMI (Purchasing Managers' Index) जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर भी नज़र रखेंगे।
