ग्लोबल डर का साया, बाज़ार में मिली-जुली तस्वीर
ग्लोबल मार्केट से मिले डरावने संकेतों और भू-राजनीतिक तनाव के कारण आज भारतीय शेयर बाज़ार में मिलाजुला कारोबार रहा। जहां एक ओर HDFC Bank और ICICI Bank जैसे बड़े बैंकों के दमदार तिमाही नतीजों (Q4 Earnings) ने Nifty 50 को सहारा दिया, वहीं दूसरी ओर मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में बड़ी बिकवाली देखने को मिली।
Nifty 50 की चाल और सेक्टर प्रदर्शन
Nifty 50, 24,364.85 के स्तर पर बंद हुआ, जो पिछले दिन के मुकाबले 0.05% की मामूली बढ़त दर्शाता है। यह 24,500 के अहम लेवल को पार करने में नाकाम रहा, जो बाज़ार में मौजूदा कंसोलिडेशन (Consolidation) का संकेत है। बैंकिंग और PSU बैंक शेयरों में तेजी देखी गई, जहां Mahabank लगभग 2.8% और SBI करीब 2.2% चढ़ा। इसके उलट, IT, रिएलिटी और केमिकल जैसे सेक्टर्स में दबाव रहा। PI Industries करीब 3.6% और Sonasoftware 2.8% लुढ़क गए। यह बड़ा अंतर इस बात से झलकता है कि Nifty 500 के 315 शेयर आज गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि कुछ बड़े स्टॉक बाज़ार को थामे रहे।
बढ़ती वोलेटिलिटी और गिरता रुपया
बाज़ार में बढ़ती घबराहट का अंदाज़ा India VIX से लगाया जा सकता है, जो लगभग 18.8 तक बढ़ गया। रुपया भी डॉलर के मुकाबले 93.2 के स्तर पर फिसल गया, जिससे निवेशकों की सतर्कता बढ़ गई।
वैल्यूएशन में अंतर और प्रमुख जोखिम
सेक्टर वैल्यूएशन (Valuations) में भी बड़ा अंतर दिखा। HDFC Bank का P/E लगभग 17.85 और ICICI Bank का 18.38 है, जो कि उचित माने जा रहे हैं। वहीं, केमिकल सेक्टर की PI Industries का P/E लगभग 32.88 है, जो इंडस्ट्री एवरेज 22.4 से काफी ऊपर है। रिटेल सेक्टर की Trent का P/E 90 के पार है, जबकि JSW Steel का P/E 40.73 अपने 10-साल के औसत से ऊपर चला गया है। बाज़ार के लिए कुछ बड़े रिस्क भी बने हुए हैं। मिड और स्मॉल-कैप में लगातार बिकवाली, DIIs (घरेलू संस्थागत निवेशक) द्वारा बिकवाली और FIIs (विदेशी संस्थागत निवेशक) द्वारा सीमित खरीदारी, इन सबने बाज़ार की लिक्विडिटी पर दबाव डाला है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक घटनाओं के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल 91 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है, जो महंगाई को 0.3% से 0.4% तक बढ़ा सकता है। RBI के FY27 के लिए कम ग्रोथ और ज़्यादा महंगाई अनुमान भी चिंता बढ़ा रहे हैं।
आगे की राह: सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल
विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे अनिश्चित समय में बड़े-कैप स्टॉक वैल्यू और स्टेबिलिटी दे सकते हैं। वहीं, छोटे और मिड-कैप के लिए SIP (Systematic Investment Plan) का तरीका शॉर्ट-टर्म वोलैटिलिटी से निपटने में मददगार होगा। Nifty 50 के लिए 24,200–24,230 का सपोर्ट और 24,500 का रेजिस्टेंस अहम होगा। बैंक निफ्टी के लिए 57,000–57,100 का रेजिस्टेंस और 57,600 तक के टारगेट दिख रहे हैं। बाज़ार की दिशा Q4 नतीजों, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया की घटनाओं पर निर्भर करेगी।
