हालांकि, इस संभावित गैप-अप ओपनिंग के पीछे कई चिंताएं छिपी हैं। भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) के कारण कच्चे तेल (crude oil) की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल $106-$107 प्रति बैरल और WTI $95 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। भारत जैसे देश के लिए, जो कच्चे तेल का बड़ा आयातक (importer) है, यह सीधे तौर पर महंगाई (inflation) को बढ़ाता है, कंपनियों की उत्पादन लागत (input costs) बढ़ाता है और आर्थिक विकास (economic growth) की गति को धीमा कर सकता है।
बाजार की यह शुरुआती तेजी गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) फ्यूचर्स के 24,143.50 के स्तर पर ट्रेड करने से दिख रही है, जो शुक्रवार के 23,897.95 के बंद भाव से ऊपर है। लेकिन, टेक्निकली देखें तो, निफ्टी 50 को 24,200 पर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस (resistance) का सामना करना पड़ रहा है, जबकि सपोर्ट 23,900-23,800 के बीच है। पिछले तीन सत्रों में निफ्टी में करीब 2.7% की गिरावट आई थी, जो ग्लोबल झटकों के प्रति मौजूदा कमजोरी को दर्शाती है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने शुक्रवार को भी बिकवाली का सिलसिला जारी रखा, जिससे भारतीय बाजार से ₹8,827 करोड़ की शुद्ध निकासी हुई। यह लगातार पांचवां सत्र था जब FIIs ने बिकवाली की है। डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने कुछ सहारा दिया, लेकिन FIIs का यह रुख ग्लोबल निवेशकों के बीच जारी सतर्कता को दर्शाता है।
कंपनियों के नतीजों ने भी बाजार की दिशा को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) ने चौथी तिमाही (Q4 FY26) में 12.5% की गिरावट के साथ नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जिसका मुख्य कारण एनर्जी सेक्टर में मार्जिन पर दबाव था। वहीं, एक्सिस बैंक (Axis Bank) का Q4 FY26 नेट प्रॉफिट प्रोविजनिंग और ट्रेजरी इनकम के कारण थोड़ा कम हुआ, हालांकि बैंक के ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) घटकर 1.23% पर आ गए। एक्सिस बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 3.62% पर रहे, लेकिन बड़े बैंकों से प्रतिस्पर्धा जारी है।
भारतीय आईटी सेक्टर (IT sector) भी वैश्विक चुनौतियों से निपटने की कोशिश कर रहा है। इन्फोसिस (Infosys) ने 20.8% का प्रॉफिट तो दिखाया, लेकिन FY27 के लिए राजस्व वृद्धि (revenue growth) का अनुमान 1.5%-3.5% पर सीमित रखा है। HCLTech ने साल-दर-साल राजस्व वृद्धि दर्ज की, लेकिन मार्जिन दबाव का सामना कर रही है और FY27 के लिए 1.5%-4.5% की वृद्धि का अनुमान लगाया है।
इन सब कारकों - बढ़ती तेल कीमतें, लगातार FII बिकवाली, मिश्रित कॉर्पोरेट परिणाम और आईटी सेक्टर की सतर्क गाइडेंस - के बीच, भारतीय शेयर बाजार के लिए 24,200 के स्तर को पार करना और तेजी बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा। हालांकि विश्लेषक (Analysts) बड़े कैप शेयरों पर सकारात्मक हैं, लेकिन अल्पकालिक गति अभी भी मैक्रोइकॉनॉमिक चिंताओं और वैश्विक अनिश्चितताओं पर निर्भर करेगी।
