ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण भारतीय शेयर बाज़ारों में सोमवार को बिकवाली का ज़बरदस्त दबाव देखने को मिला। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब बाज़ार की वैल्यूएशन (Valuation) को पहले से ही 'बहुत सस्ती नहीं' माना जा रहा था।
इस तूफानी गिरावट की मुख्य वजह मध्य पूर्व में छिड़ा संघर्ष और उसके कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आया ज़बरदस्त उछाल है। Brent Crude का भाव $115 प्रति बैरल के पार चला गया। विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में हर $10 का उछाल भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) को 0.3-0.4% तक बढ़ा सकता है, वहीं होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) इन्फ्लेशन (Inflation) में 0.8-1% की वृद्धि कर सकता है। Goldman Sachs ने अनुमान लगाया है कि फाइनेंशियल ईयर 27 (FY27) तक भारत की इन्फ्लेशन 4.6% तक पहुंच सकती है, जबकि GDP ग्रोथ (Growth) घटकर 5.9% रह सकती है। इन मैक्रो-इकोनॉमिक (Macro-economic) दबावों के चलते पहले से अनुमानित 'गोल्डीलॉक्स परिदृश्य' (Goldilocks scenario) पर सवाल खड़े हो गए हैं।
गिरते रुपये और बढ़ती बाज़ार वोलैटिलिटी (Volatility) को देखते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी एक्शन लिया है। RBI ने बैंकों के लिए फॉरेन एक्सचेंज (Foreign Exchange) की पोजीशन को सीमित करने का ऐलान किया है। 10 अप्रैल 2026 से, बैंक ऑनशोर डिलिवरेबल रुपये बाज़ार में $100 मिलियन की नेट ओपन पोजीशन (NOP) लिमिट के तहत ही काम कर पाएंगे। इस कदम का मकसद सट्टा डॉलर पोजीशन को रोकना है, जिन्होंने रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँचाने में भूमिका निभाई है।
यह स्थिति निवेशकों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है, खासकर तब जब भारत करीब 85% तेल आयात (Import) करता है। UBS जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने भारतीय इक्विटी (Equity) को 'Attractive' से 'Neutral' पर डाउनग्रेड कर दिया है, जिसका मुख्य कारण मौजूदा हाई वैल्यूएशन और एनर्जी पर ज़्यादा निर्भरता है। Nifty का ट्रेलिंग P/E रेश्यो लगभग 20x के आसपास है, जो कि बाज़ार के लिए कम करेक्शन रूम (Correction Room) छोड़ता है। इस बिकवाली में आईटी (IT), ऑटो (Auto) और रियलिटी (Realty) जैसे सेक्टर्स में करीब 15% तक की गिरावट देखी गई, जबकि एनर्जी (Energy) और पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) स्टॉक्स अपेक्षाकृत कम गिरे।
फिलहाल, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) भारतीय बाज़ार से लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिन्होंने हाल ही में ₹4,367.30 करोड़ के शेयर बेचे हैं। मार्केट का सेंटीमेंट (Sentiment) अभी सतर्क बना हुआ है और यह मुख्य रूप से वेस्ट एशिया (West Asia) में होने वाले घटनाक्रमों और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा। RBI का दखल रुपये को कुछ राहत दे सकता है, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितता (Geopolitical Uncertainty) और बढ़ती महंगाई (Inflation) के चलते बाज़ार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है।