इक्विटी मार्केट में आई तेजी
वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों के चलते आज भारतीय शेयर बाजारों में अच्छी रौनक देखने को मिली। एशियाई बाजारों में मिले सकारात्मक संकेतों के दम पर बाजार हरे निशान में खुले। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क Sensex 506.70 पॉइंट यानी 0.65% चढ़कर 79,027.00 के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का Nifty50 भी 138.00 पॉइंट यानी 0.57% की बढ़त के साथ 24,502.85 पर कारोबार कर रहा था। बाजार की वोलैटिलिटी को मापने वाला Nifty India Volatility Index 4% गिरकर 18.04 पर आ गया, जो निवेशकों की घटी हुई चिंता को दर्शाता है। Nifty50 में JSW Steel, Axis Bank, Adani Ports and Special Economic Zone और NTPC जैसे स्टॉक्स टॉप गेनर रहे। मिड और स्मॉल-कैप इंडेक्स में भी मामूली बढ़त दर्ज की गई।
रियलटी और बैंकिंग सेक्टर का जलवा, IT में नरमी
सेक्टर-वार प्रदर्शन की बात करें तो रियलटी सेक्टर ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया, जिसमें Lodha Developers, Godrej Properties और Oberoi Realty जैसे स्टॉक्स में मजबूती दिखी। बैंकिंग सेक्टर के स्टॉक्स में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। हालांकि, IT सेक्टर में कमजोरी का रुख रहा और यह सेक्टर गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था।
रुपये पर दबाव और RBI का कदम
शेयर बाजारों में मजबूती के बावजूद, भारतीय रुपये पर दबाव बना रहा। डॉलर के मुकाबले रुपया 16 पैसे कमजोर होकर ₹93.32 पर बंद हुआ। इसके पीछे दो मुख्य कारण रहे - एक, अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना और दूसरा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा डेरिवेटिव्स मार्केट में स्पेकुलेटिव (Speculative) करेंसी पोजीशन की लिमिट को आसान करना। RBI ने बैंकों की नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड मार्केट में नेट ओपन पोजीशन की $100 मिलियन की सीमा को हटा दिया है। इस कदम से मार्केट में लिक्विडिटी (Liquidity) बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन यह करेंसी में ज्यादा वोलैटिलिटी भी ला सकता है।
तेल की कीमतें और ब्रोकरेज की राय
कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में थोड़ी नरमी आई, ब्रेंट क्रूड $95 प्रति बैरल के पार ट्रेड कर रहा था। ऐतिहासिक रूप से, भू-राजनीतिक घटनाओं से बाजार में थोड़े समय के लिए उतार-चढ़ाव आता है, लेकिन लंबी अवधि के ट्रेंड्स को इकोनॉमिक फैक्टर्स तय करते हैं। भारत के बाजार भू-राजनीतिक झटकों से उबरने में सक्षम रहे हैं। हालांकि, ऊंची तेल कीमतें और मजबूत डॉलर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती पेश कर सकते हैं।
भविष्य की चाल और जोखिम
बैंकिंग सेक्टर के लिए अच्छी खबर है, जहां 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून) के लिए 11-13% के क्रेडिट ग्रोथ का अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं, IT सेक्टर अभी भी एम्प्लॉई कॉस्ट (Employee Cost), स्किल गैप (Skill Gap) और बदलते नियमों जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। JSW Steel (P/E ~40.73) और Tokyo Electron (P/E ~40.21) जैसी कंपनियां हाई वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रही हैं, जो दर्शाता है कि उनकी ग्रोथ की उम्मीदें पहले से ही प्राइस (Price) में शामिल हैं। भू-राजनीतिक शांति का माहौल बना रहना, करेंसी का स्थिर प्रबंधन और बैंकिंग जैसे सेक्टर्स का मजबूत प्रदर्शन बाजार की आगे की चाल तय करेगा।
