क्यों आई ये तेजी?
सोमवार को भारतीय शेयर बाजारों में अच्छी रौनक देखी गई। S&P BSE Sensex 77,692.28 के स्तर तक पहुंचा, वहीं NSE Nifty50 ने 24,221.35 का आंकड़ा छुआ। इस तेजी का एक बड़ा कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई गिरावट है, जहां ब्रेंट क्रूड $107.97 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा है। ईरान की ओर से कूटनीतिक पहल और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित मार्ग की खबरों ने भी तेल बाजारों को शांत किया। निवेशकों की नजरें वेस्ट बंगाल जैसे राज्यों के चुनावी नतीजों पर भी थीं। Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट, डॉ. VK विजयकुमार के अनुसार, जबकि राज्य चुनाव अल्पकालिक सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकते हैं, उनका दीर्घकालिक बाजार प्रभाव आमतौर पर सीमित रहता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्रूड ऑयल की कीमतों को प्रभावित करने वाले जियोपॉलिटिकल फैक्टर समग्र बाजार की दिशा में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
FIIs की बिकवाली और AI का क्रेज
लेकिन इस तेजी के बावजूद, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से लगातार बिकवाली जारी है। पिछले 18 महीनों में, FIIs ने भारतीय बाजारों से $45 बिलियन से अधिक की रकम निकाली है, जो कि एक बड़ा और चिंताजनक प्रवाह है। यह ट्रेंड 2026 की शुरुआत में भी जारी रहा, जहां FIIs ने अप्रैल 1 से अप्रैल 23 के बीच $5 बिलियन से अधिक की बिकवाली की। 30 अप्रैल 2026 को, FIIs ने कैश मार्केट में ₹8,047.86 करोड़ की नेट बिकवाली की, जबकि डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने ₹3,487.10 करोड़ की खरीद कर सहारा दिया। यह आउटफ्लो आंशिक रूप से इसलिए भी है क्योंकि ग्लोबल कैपिटल हाई-ग्रोथ वाले क्षेत्रों, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वाले स्टॉक्स की ओर आकर्षित हो रहा है, जो भारी निवेश खींच रहे हैं।
तेल का रिस्क और जियोपॉलिटिक्स
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए ब्रेंट क्रूड का $108 के करीब रहना एक बड़ा जोखिम है। इस तेल का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ऐसे में वेस्ट एशिया की जियोपॉलिटिकल अस्थिरता सीधे तौर पर भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को खतरे में डाल सकती है और इसके चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को भी बढ़ा सकती है। इस क्षेत्र के चल रहे संघर्षों और तनावों ने पहले ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में भारी बाधाएं पैदा की हैं, जिन्हें अब तक का सबसे बुरा बताया जा रहा है। कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद, किसी भी विस्तारित व्यवधान या तनाव बढ़ने से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई बढ़ेगी और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ेगा।
वैल्यूएशन और एक्सपर्ट की सलाह
बाजार का वैल्यूएशन (Valuation) बताता है कि भारतीय स्टॉक्स बहुत सस्ते नहीं मिल रहे हैं। निफ्टी 50 का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 20.94 है, और BSE Sensex का P/E 20.9 है। ऐतिहासिक तौर पर, ये स्तर फेयर से लेकर थोड़े महंगे माने जाते हैं। डॉ. VK विजयकुमार जैसे विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि भले ही बाजार के रुझान बदल सकते हैं, लेकिन AI से प्रेरित मौजूदा ग्लोबल रैली सट्टा 'हॉट मनी' को आकर्षित कर रही है। यह भारत जैसे उभरते बाजारों पर दबाव डालना जारी रख सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की भविष्य की दिशा अल्पकालिक चुनावी नतीजों के बजाय कंपनी के मुनाफे, ग्लोबल मनी सप्लाई और जियोपॉलिटिकल माहौल पर अधिक निर्भर करेगी। FIIs की बिकवाली और अनिश्चित ऊर्जा स्थिति को देखते हुए, एक सतर्क निवेश दृष्टिकोण (Cautious Investment Approach) की सलाह दी जाती है।
