Indian Markets: ग्लोबल उम्मीदों से भागा शेयर बाजार, पर FPI की निकासी और टेंशन का साया

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Markets: ग्लोबल उम्मीदों से भागा शेयर बाजार, पर FPI की निकासी और टेंशन का साया
Overview

भारतीय इक्विटी मार्केट्स (Indian equity markets) में शुक्रवार, **10 अप्रैल 2026** को शानदार तेजी देखी गई। Sensex और Nifty दोनों ने अच्छी बढ़त के साथ क्लोजिंग की, जिसकी वजह ग्लोबल मार्केट्स से मिले पॉजिटिव संकेत थे। हालांकि, यह तेजी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भारी निकासी (outflows) और लगातार बनी हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच आई, जो मार्केट की अंदरूनी कमजोरी की ओर इशारा करती है। BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप **₹451 लाख करोड़** तक पहुंच गया। IT सेक्टर पिछड़ गया, जबकि ऑटो सेक्टर ने सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की।

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ग्लोबल उम्मीदों ने बढ़ाई भारतीय शेयर बाजार की रौनक

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल देखा गया। बेंचमार्क Sensex 918 पॉइंट चढ़कर 77,550.25 पर बंद हुआ, वहीं Nifty 50 इंडेक्स 275 पॉइंट की बढ़त के साथ 24,050.50 पर क्लोज हुआ। यह भारतीय इक्विटी के लिए फरवरी 2021 की शुरुआत के बाद से सबसे मजबूत साप्ताहिक बढ़त थी। इस तेजी के पीछे मुख्य वजह ग्लोबल मार्केट्स से मिले सकारात्मक संकेत थे, जो एशियाई बाजारों जैसे जापान के Nikkei 225 (जो 1.6% चढ़ा) और दक्षिण कोरिया के Kospi (जो 1.8% चढ़ा) में भी दिखी। यह वैश्विक तेजी अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीज़फायर समझौते से भी प्रेरित थी, जिसने निवेशकों का सेंटीमेंट बढ़ाया।

डोमेस्टिक स्ट्रेंथ के बीच विदेशी निवेश में गिरावट

बाजार में ऊपर से ऊपर जाने के बावजूद, अंदरूनी सेंटीमेंट थोड़ा सतर्क था। BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) एक ही सत्र में लगभग ₹6 लाख करोड़ बढ़कर ₹451 लाख करोड़ हो गया, जो डोमेस्टिक पार्टिसिपेशन की मजबूती दिखाता है। लेकिन, यह घरेलू ताकत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बड़ी निकासी और लगातार बनी भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच थी, जिससे संकेत मिलता है कि बाजार की यह तेजी ज्यादा आत्मविश्वास पर नहीं, बल्कि सावधानी पर आधारित थी।

वैल्यूएशन्स, FPI की निकासी और RBI का रुख

अप्रैल 2026 की शुरुआत तक Nifty 50 का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो लगभग 21 के आसपास बना हुआ था, जिसे एक उचित लेकिन सस्ता न माना जाने वाला वैल्यूएशन कहा जा सकता है। यह वैल्यूएशन सेक्टर के हिसाब से अलग-अलग है; उदाहरण के लिए, Maruti Suzuki India Ltd का P/E 28.62 था, जो ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के औसत 25.38 से प्रीमियम पर था।

विश्लेषकों को चिंता है कि भारत के ऊंचे वैल्यूएशन्स विदेशी निवेश को हतोत्साहित कर सकते हैं, खासकर उन फंड्स के लिए जो वैल्यू की तलाश में हैं। इसमें और इजाफा करते हुए, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने जमकर बिकवाली की है। 2026 में अब तक (10 अप्रैल तक) FPIs ने लगभग ₹2.1 लाख करोड़ की निकासी की है। अकेले मार्च 2026 में ₹1.17 लाख करोड़ की रिकॉर्ड मासिक निकासी हुई थी, और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के कारण मार्च में FPI की कस्टडी में एसेट्स 13% घटकर ₹62.46 लाख करोड़ रह गए थे।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 8 अप्रैल 2026 को अपनी रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखी और न्यूट्रल पॉलिसी स्टांस बनाए रखा। RBI का अनुमान है कि वित्तीय वर्ष 2027 में GDP ग्रोथ 6.9% और CPI इन्फ्लेशन 4.6% रहेगी। RBI ने अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े जोखिमों को भी नोट किया, खासकर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें जो इन्फ्लेशन और भारत की इम्पोर्ट लागत को बढ़ा सकती हैं। ग्लोबल ग्रोथ के 2.6% तक धीमे होने की उम्मीद है, जिसमें उभरते बाजार (emerging markets) कमजोर हो सकते हैं।

स्ट्रक्चरल इश्यूज़ और भू-राजनीति से विदेशी निवेशकों का मोहभंग

शॉर्ट-टर्म मार्केट उतार-चढ़ाव से परे, स्ट्रक्चरल इश्यूज के कारण भारत के प्रति विदेशी निवेशकों का सेंटीमेंट ठंडा पड़ रहा है। Zerodha के को-फाउंडर नितिन कामथ ने वैश्विक निवेशकों के लिए कई बाधाएं बताईं: भारत की भू-राजनीतिक भेद्यता, खासकर तेल की कीमतों के झटकों के प्रति, क्योंकि यह आयात पर बहुत अधिक निर्भर है।

उन्होंने ऊंचे वैल्यूएशन्स, मजबूत AI इन्वेस्टमेंट थीम्स की कमी, और लंबी अवधि के कैपिटल गेन्स (LTCG) व सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) जैसे टैक्स बदलावों का भी जिक्र किया। इन फैक्टर्स से भारत जापान, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों की तुलना में कम आकर्षक हो जाता है, जहां नई पूंजी का इनफ्लो दिख रहा है।

लगातार FPI आउटफ्लो यह दर्शाता है कि विदेशी पूंजी मूल रूप से भारत का पुनर्मूल्यांकन कर रही है, जो केवल अस्थायी सुधारों से कहीं आगे है। 10 अप्रैल 2026 को IT सेक्टर में 2% की गिरावट, उसका एकमात्र पिछड़ने वाला सेक्टर स्टेटस, ग्लोबल मंदी की आशंकाओं और विदेशी निवेशकों की घटती रुचि के प्रति उसकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।

आगे की राह भू-राजनीति, विदेशी फ्लो और डोमेस्टिक स्ट्रेंथ पर निर्भर

आगे चलकर, बाजार की दिशा काफी हद तक अमेरिका-ईरान कूटनीतिक प्रयासों और वैश्विक तेल की कीमतों पर उनके प्रभाव पर निर्भर करेगी। जबकि RBI ग्रोथ और इन्फ्लेशन को संतुलित करने का लक्ष्य रखती है, अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, जिनमें सप्लाई चेन के जोखिम और कृषि को प्रभावित करने वाले अल नीनो जैसे प्रतिकूल मौसम की संभावना शामिल है।

कुछ विश्लेषकों को इन्फ्लेशन से निपटने के लिए 2026 में RBI द्वारा रेट हाइक की उम्मीद है। गोल्डमैन सैक्स ने GDP ग्रोथ के 5.9% तक कम होने और इन्फ्लेशन के 4.6% तक बढ़ने का अनुमान लगाया है। वर्तमान रैली की स्थिरता भू-राजनीतिक तनावों के कम होने, FPI फ्लो के रिवर्स होने और घरेलू आर्थिक मजबूती पर निर्भर करेगी।

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