महंगाई पर भारत का कड़ा रुख! 4% लक्ष्य पर कायम सरकार, ग्लोबल झटकों के बावजूद।

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
महंगाई पर भारत का कड़ा रुख! 4% लक्ष्य पर कायम सरकार, ग्लोबल झटकों के बावजूद।
Overview

भारत सरकार ने अगले **5 सालों** के लिए **4%** रिटेल महंगाई दर (Inflation Rate) के लक्ष्य को बरकरार रखने का ऐलान किया है। **2%** से **6%** के दायरे में इस लक्ष्य को बनाए रखने की यह प्रतिबद्धता, दुनिया भर में बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं, सप्लाई चेन की दिक्कतों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच उम्मीदों को सहारा देने का काम करेगी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) को मैनेज करता रहेगा, और MPC (Monetary Policy Committee) अगली घोषणा **8 अप्रैल** को करेगी।

नीतिगत निरंतरता, स्थिरता की ओर कदम

भारत सरकार की ओर से 4% रिटेल महंगाई दर का लक्ष्य और 2% से 6% का टॉलरेंस बैंड अगले 5 सालों तक बनाए रखने का फैसला, RBI की इन्फ्लेशन टारगेटिंग फ्रेमवर्क (Inflation Targeting Framework) की विश्वसनीयता को और मजबूत करेगा। यह कदम देश में उम्मीदों को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

वैश्विक दबावों के बीच स्थिरता का संघर्ष

वैसे तो फरवरी महीने में खुदरा महंगाई दर 2.75% के निचले स्तर पर थी, लेकिन अब बाहरी कारक इस स्थिरता को चुनौती दे सकते हैं। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन (Supply Chain) में लगातार आ रही बाधाएं महंगाई को ऊपर ले जा सकती हैं। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने 2026 तक भारत के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 4.6% कर दिया है, जिसका मुख्य कारण बढ़ती ऊर्जा लागत और वैश्विक अनिश्चितताएं बताई गई हैं।

अनिश्चित दुनिया में लचीलेपन का सहारा

RBI का ±2% का मौजूदा टॉलरेंस बैंड, सप्लाई-साइड के झटकों (Supply-Side Shocks) को बिना तुरंत ब्याज दरें बढ़ाए संभालने में अहम भूमिका निभाएगा। अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के इस दौर में यह लचीलापन (Flexibility) बहुत जरूरी है। ऊंचे तेल दाम सीधे तौर पर भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) और महंगाई पर असर डाल सकते हैं।

सप्लाई झटके और रुपये पर दबाव का जोखिम

हालांकि, लगातार बढ़ते ग्लोबल प्राइस प्रेशर के बीच इस लक्ष्य को बनाए रखने में जोखिम भी हैं। खाने-पीने की चीजों और ईंधन की कीमतों में अस्थिरता से आने वाले सप्लाई झटकों को मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) से कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है। गोल्डमैन सैक्स ने तेल की ऊंची कीमतों और सप्लाई दिक्कतों के चलते 2026 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान भी घटाकर 5.9% कर दिया है, जो पहले 7% था। इसके अलावा, पिछले दो सालों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई करीब 8.7% की गिरावट भी इंपोर्टेड इन्फ्लेशन (Imported Inflation) का दबाव बढ़ा रही है।

आगे की राह: स्थिर दरें और सतर्कता

ऐसे में, एनालिस्ट्स (Analysts) उम्मीद कर रहे हैं कि RBI ब्याज दरों में कटौती को आगे भी टालेगा। ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक ग्रोथ को सहारा देते हुए, कीमतों को स्थिर रखने की जरूरत को देखते हुए, RBI के रेपो रेट (Repo Rate) में 2026 के मध्य तक कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना कम है। MPC की अगली बैठक 8 अप्रैल को होनी है।

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