8वीं बार भी नहीं बदलीं दरें: सरकार का फोकस बॉरोइंग कॉस्ट पर
वित्त मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) पर 7.1%, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) पर 7.7%, और सुकन्या समृद्धि स्कीम (Sukanya Samriddhi Scheme) पर 8.2% का इंटरेस्ट रेट अप्रैल 1 से जून 30, 2026 तक जारी रहेगा। लगातार 8 तिमाहियों से इन दरों का स्थिर रहना, सरकार की बॉरोइंग कॉस्ट (Borrowing Costs) को मैनेज करने की रणनीति को दर्शाता है।
निवेशकों के लिए फायदे और नुकसान
जहां एक ओर ये स्थिर दरें लाखों छोटे निवेशकों को पूंजी सुरक्षा (Capital Preservation) की गारंटी देती हैं, वहीं दूसरी ओर यह भी संभव है कि अगर इन्फ्लेशन (Inflation) इन फिक्स्ड रेट्स से ज्यादा बढ़ जाए, तो निवेशकों को मिलने वाला असल रिटर्न (Real Return) कम हो सकता है। अन्य योजनाओं जैसे किसान विकास पत्र (Kisan Vikas Patra) पर 7.5% और मंथली इनकम स्कीम (Monthly Income Scheme) पर 7.4% की दरें भी स्थिर रहेंगी। फरवरी 2026 में CPI 5.2% था, जिसके मार्च 2026 तक 5.3% रहने का अनुमान है।
बाजार से तुलना और RBI का रुख
सरकारी बैंकों में 3-5 साल की फिक्स्ड डिपॉजिट्स (Fixed Deposits) पर 7.0% से 7.3% का ब्याज मिल रहा है, जबकि कुछ प्राइवेट बैंक 7.7% से 8.0% तक का ऑफर दे रहे हैं। इन सबके मुकाबले, सरकारी स्मॉल सेविंग्स रेट्स एक सुरक्षित विकल्प बने हुए हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने भी रेपो रेट 6.50% पर स्थिर रखा है, जो इन्फ्लेशन कंट्रोल पर फोकस का संकेत देता है। सरकार का यह कदम इस उम्मीद पर आधारित हो सकता है कि निवेशक जोखिम से बचने के लिए इन सुरक्षित विकल्पों को चुनेंगे। पिछली बार दरों में बदलाव फाइनेंशियल ईयर 2023-24 की चौथी तिमाही में हुआ था।
क्या है निवेशकों के लिए जोखिम?
लगातार दरों के स्थिर रहने से निवेशकों को यह जोखिम उठाना पड़ सकता है कि बढ़ती महंगाई के कारण उनकी सेविंग्स की क्रय शक्ति (Purchasing Power) कम हो जाए। जहां सरकार अपने फिस्कल टारगेट्स (Fiscal Targets) और कर्ज प्रबंधन (Debt Management) को प्राथमिकता दे रही है, वहीं निवेशकों को बाजार से जुड़े निवेशों की तुलना में कम रिटर्न मिल सकता है। यह रणनीति सरकार के कर्ज चुकाने की लागत को कम करने में मदद करती है, जो उसके बड़े उधार कार्यक्रम को देखते हुए महत्वपूर्ण है।