निवेशक राहत और टैक्स की नई व्यवस्था
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में यह महत्वपूर्ण बदलाव पेश किया है। इससे पहले, शेयर बायबैक से मिलने वाली रकम को डिविडेंड इनकम के तौर पर देखा जाता था, जिस पर अक्टूबर 2024 में आई एक विसंगति के बाद से मूल निवेश पर भी टैक्स लग रहा था। अब नए ढांचे के तहत, शेयरधारकों को केवल बायबैक से हुए वास्तविक मुनाफे पर ही टैक्स देना होगा। यह शेयर बेचने पर लगने वाले कैपिटल गेन टैक्स के जैसा ही होगा, जिससे छोटे और माइनॉरिटी निवेशकों के लिए यह ज्यादा बेहतर और निष्पक्ष हो जाएगा।
प्रमोटर्स पर टैक्स और आर्बिट्रेज पर लगाम
हालांकि, व्यक्तिगत शेयरधारकों को राहत देने के इस कदम के साथ-साथ, सरकार ने प्रमोटर्स द्वारा टैक्स का फायदा उठाने (Arbitrage) को रोकने के लिए भी इंतजाम किए हैं। कॉर्पोरेट प्रमोटर्स पर 22% की प्रभावी टैक्स दर लगेगी, वहीं नॉन-कॉर्पोरेट प्रमोटर्स को 30% का प्रभावी टैक्स बोझ उठाना होगा। इस अंतर से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बायबैक को पूंजी वापस करने का एक प्रभावी तरीका बनाया जाए, साथ ही टैक्स के नियमों का दुरुपयोग रोका जा सके। जानकारों का मानना है कि इससे पूंजी वापसी के तरीकों में निश्चितता आएगी, वहीं प्रमोटर्स को ज्यादा टैक्स देना होगा।
बायबैक के ट्रेंड और भविष्य की चिंताएं
हाल के आंकड़ों के अनुसार, शेयर बायबैक की गतिविधि में गिरावट देखी गई थी। 2023 और 2024 में जहां 48 बायबैक हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 14 रह गई थी। उम्मीद है कि इस नई पॉलिसी से कंपनियां शेयरधारकों को वैल्यू वापस देने के लिए बायबैक में फिर से दिलचस्पी दिखाएंगी। हालांकि, टैक्स और कानूनी सलाहकार कुछ संभावित कानूनी अड़चनों की चेतावनी भी दे रहे हैं। एक बड़ा सवाल यह है कि क्या टैक्सपेयर्स अपने कैपिटल लॉस (Capital Loss) को बायबैक आय (Income) के साथ एडजस्ट (Adjust) कर पाएंगे, खासकर अगर उसी फाइनेंशियल ईयर में अन्य कैपिटल गेन भी हों। ऐसे एडजस्टमेंट को टैक्स अधिकारी चुनौती दे सकते हैं, ताकि टैक्स रेवेन्यू (Tax Revenue) बना रहे।