सर्विसेज सेक्टर में दिखी रिकॉर्ड तेजी
यह आंकड़ा मार्च 2026 के 57.5 के लेवल से काफी बेहतर है, जो पिछले 14 महीनों का सबसे निचला स्तर था। सर्विस सेक्टर में नए बिजनेस (New Business) में ग्रोथ पिछले 5 महीनों में सबसे तेज रही। खास तौर पर कंज्यूमर सर्विसेज, ट्रांसपोर्ट और सूचना व संचार (Information & Communication) जैसे सेक्टर्स ने इस विस्तार में अहम भूमिका निभाई। वहीं, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का PMI भी मार्च के 53.9 से बढ़कर अप्रैल में 54.7 हो गया, जो फैक्ट्री ग्रोथ में धीमी रफ्तार का संकेत देता है।
डोमेस्टिक डिमांड का दम
क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो, अप्रैल में भारत के सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ रेट चीन के 52.6 PMI से काफी आगे रही। यह दिखाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी चुनौतियों के बावजूद घरेलू खर्च के दम पर मजबूती बनाए हुए है।
ग्लोबल टेंशन से बढ़ी लागत
लेकिन, एक चिंताजनक बात यह है कि पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता (Geopolitical Uncertainty) के कारण मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज, दोनों ही सेक्टर्स में इनपुट कॉस्ट (Input Costs) तेजी से बढ़ी हैं। खासकर खाने-पीने की चीजों, फ्यूल, गैस और लेबर के दाम बढ़ने से लागत में तेजी आई है। हालांकि, कंपनियां लागत का कुछ बोझ उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं, लेकिन लगातार बढ़ रही ऑपरेशनल कॉस्ट प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बना सकती है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इनपुट कॉस्ट 44 महीनों के हाई पर पहुंच गई, जिससे उत्पाद की कीमतें 6 महीनों में सबसे तेज दर से बढ़ाई गईं।
विदेशी मांग में नरमी
Services सेक्टर में विदेशी मांग (Foreign Demand) में भी खासी नरमी देखी गई। पिछले 1 साल से भी अधिक समय में विदेशी ऑर्डर्स में यह सबसे धीमी बढ़ोतरी है। कंपनियों का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट और विदेशी पर्यटकों की कमी इसके मुख्य कारण हैं। नए एक्सपोर्ट ऑर्डर (Export Orders) में भी गिरावट आई है। यह दिखाता है कि सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ अब डोमेस्टिक खर्च पर ज्यादा निर्भर करेगी, जो भविष्य में ग्रोथ की रफ्तार को सीमित कर सकता है।
एनर्जी प्राइस का रिस्क
पश्चिम एशिया में जारी संकट से भारत पर खास असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि देश बड़े पैमाने पर इंपोर्टेड क्रूड ऑयल (Crude Oil) पर निर्भर है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर इंपोर्ट बिल बढ़ाएंगी, भारतीय रुपये (Indian Rupee) पर दबाव डालेंगी और सभी सेक्टर्स में लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को महंगा करेंगी। इससे महंगाई बढ़ सकती है और जीडीपी ग्रोथ में भी कमी आ सकती है।
बिजनेस सेंटिमेंट में गिरावट
इन सब चिंताओं के चलते सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच बिजनेस सेंटिमेंट (Business Sentiment) कमजोर हुआ है। बढ़ती लागत और ग्लोबल अनिश्चितता के कारण भविष्य की गतिविधियों को लेकर कंपनियां ज्यादा सतर्क नजर आ रही हैं। यह सतर्कता निवेश और हायरिंग की योजनाओं को धीमा कर सकती है।
आगे क्या?
कुल मिलाकर, भारत का सर्विसेज सेक्टर मजबूत डोमेस्टिक डिमांड के दम पर वैश्विक अस्थिरता का सामना कर रहा है। आगे चलकर यह सेक्टर लगातार बढ़ता रहेगा, लेकिन बढ़ती लागत, भू-राजनीतिक जोखिम और कमजोर व्यापार जैसे मुद्दे बड़ी चुनौतियां बने रहेंगे।
