भारत के सर्विस सेक्टर की ग्रोथ जुलाई में धीमी पड़कर 4 साल के निचले स्तर पर आ गई है। HSBC Flash India Services Business Activity Index जून के 57.4 से गिरकर 53.1 पर आ गया है। इसका मतलब है कि सेक्टर में विस्तार तो हो रहा है, लेकिन बढ़ती लागत कंपनियों के मुनाफे (Profit Margins) पर दबाव बना रही है और उनका सेंटिमेंट (Sentiment) कमजोर कर रही है।
Detailed Coverage
महंगाई का असर, सेंटिमेंट पर दबाव
सर्वे में शामिल कंपनियों ने बताया कि उन्हें मुश्किल बाजार हालातों, कम ग्राहक पूछताछ और कुछ ऑर्डर कैंसलेशन का सामना करना पड़ रहा है। इस नरमी की एक बड़ी वजह ऑपरेटिंग कॉस्ट (Operating Costs) में बढ़ोतरी है। कंपनियों के लिए फ्यूल, लेबर और ट्रांसपोर्टेशन जैसी लागतें बढ़ी हैं, जिससे पिछले तीन महीनों में आउटपुट प्राइस (Output Prices) में सबसे तेज उछाल देखा गया है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि भले ही कंपनियां विस्तार कर रही हैं, लेकिन इस ग्रोथ को बनाए रखने की लागत बढ़ रही है। जिन कंपनियों के पास अपनी कीमतें बढ़ाने की ताकत कम है, उन्हें प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) में कमी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि वे बढ़ी हुई लागतों को ग्राहकों पर डालने में संघर्ष कर सकते हैं।
कंज्यूमर खर्च मजबूत, पर लागतें बढ़ीं
PMI डेटा और असली आर्थिक आंकड़ों के बीच एक बड़ा अंतर दिख रहा है। PMI जहां नरमी का संकेत दे रहा है, वहीं हाई-फ्रीक्वेंसी डेटा कंज्यूमर खर्च में मजबूती दिखा रहे हैं। उदाहरण के लिए, जून में ग्रॉस GST कलेक्शन (Gross GST Collections) में सालाना 13.9% की बढ़ोतरी हुई, जिसमें डोमेस्टिक ट्रांजेक्शन 6.5% बढ़े। इसके अलावा, UPI और क्रेडिट कार्ड से होने वाले डिजिटल पेमेंट्स (Digital Payments) भी मजबूत बने हुए हैं। इससे लगता है कि PMI में आई यह नरमी डिमांड में कमी के बजाय लागत-जनित महंगाई (Cost-Push Inflation) के कारण ज्यादा है। जून में 4.38% पर रहा रिटेल इन्फ्लेशन (Retail Inflation) भी कंज्यूमर की खरीदारी क्षमता और कंपनियों की इनपुट कॉस्ट को प्रभावित कर रहा है।
एक्सपोर्ट सेक्टर में मजबूती, घरेलू मांग पर दबाव
घरेलू बाजार में नरमी के बावजूद, सर्विस इकोनॉमी का एक्सपोर्ट (Export) सेगमेंट एक सहारा दे रहा है। जुलाई के फ्लैश सर्वे में प्राइवेट सेक्टर के लिए विदेशी ऑर्डर में सुधार देखा गया, और अप्रैल-जून तिमाही के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सर्विस एक्सपोर्ट में सालाना 6.16% की बढ़ोतरी हुई। यह बताता है कि एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स, खासकर IT और बिजनेस-प्रोसेस मैनेजमेंट, घरेलू खर्च पर निर्भर सेक्टर्स जैसे हॉस्पिटैलिटी या रिटेल फाइनेंस की तुलना में घरेलू महंगाई के दबाव से बेहतर तरीके से बच सकते हैं। निवेशक आने वाली तिमाही नतीजों में इन पैटर्न को देख सकते हैं, क्योंकि महंगाई वाले माहौल में मार्जिन बनाए रखने की क्षमता कंपनियों के बीच एक अहम अंतर पैदा करेगी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) संभवतः अपनी मॉनेटरी पॉलिसी को संतुलित करने के लिए इन रुझानों पर बारीकी से नजर रखेगा, क्योंकि लागत-संचालित मंदी, मांग-संचालित संकुचन की तुलना में अलग चुनौतियां पेश करती है।
