अमेरिका के 'टैरिफ' कम, भारत ने मांगी 'वरीयतापूर्ण बाज़ार पहुँच'! | Piyush Goyal's Big Move for Indian Exporters

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
अमेरिका के 'टैरिफ' कम, भारत ने मांगी 'वरीयतापूर्ण बाज़ार पहुँच'! | Piyush Goyal's Big Move for Indian Exporters
Overview

भारत के वाणिज्य मंत्री, **पियूष गोयल**, अमेरिका के साथ आगामी व्यापार वार्ताओं में 'Preferential Market Access' यानी 'वरीयतापूर्ण बाज़ार पहुँच' हासिल करने के लिए ज़ोर दे रहे हैं। उन्होंने वैश्विक व्यापार में बदलावों के बीच भारत की मज़बूत स्थिति और एक भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर उभरने की बात कही है।

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'वरीयतापूर्ण बाज़ार पहुँच' से क्या होगा?

इस 'वरीयतापूर्ण बाज़ार पहुँच' का सीधा मतलब है कि भारतीय सामानों और सेवाओं के लिए अमेरिका में कम टैरिफ (Tariffs), बेहतर कोटे (Quotas) या आसान नियम-कानून लागू हों। दुनिया भर में सप्लाइ चेन (Supply Chain) में आ रहे बदलावों के चलते, भारत एक भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर तेज़ी से उभरा है, जो इस मांग को और मज़बूत करता है। अगर यह डील सफल होती है, तो टेक्सटाइल (Textiles), ऑटो कंपोनेंट्स (Auto Components) और एग्रीकल्चर (Agriculture) जैसे प्रमुख भारतीय एक्सपोर्ट सेक्टर्स को ज़बरदस्त बढ़ावा मिल सकता है, जो देश के आर्थिक लक्ष्यों के अनुरूप है।

अमेरिका के नए टैरिफ और समझौता

दरअसल, अमेरिका ने पहले भारतीय सामानों पर कई बार भारी टैरिफ लगाए थे, जो 2025 के मध्य तक 50% तक पहुँच सकते थे। ये कदम रूस से भारत के तेल आयात और व्यापार घाटे को लेकर अमेरिकी चिंताओं के चलते उठाए गए थे। लेकिन, 2 फरवरी 2026 को हुए एक नए अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) में बड़ा बदलाव आया है। अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ को 50% के शिखर से घटाकर 18% कर दिया है। यह कमी भारत के रूसी तेल आयात को धीरे-धीरे कम करने के वादे से जुड़ी है। बदले में, भारत भी अमेरिकी औद्योगिक (Industrial) और कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाएगा, हालांकि डेअरी (Dairy) जैसे संवेदनशील सेक्टरों को सुरक्षा मिलेगी। इस डील में गैर-टैरिफ बाधाओं (Non-Tariff Barriers) और डिजिटल ट्रेड (Digital Trade) को लेकर भी बात हुई है। इस कदम से भारत के GDP में मामूली बढ़ोतरी और निवेशकों के भरोसे में इज़ाफा होने की उम्मीद है। इससे भारत को चीन से हट रही कंपनियों को आकर्षित करने में भी मदद मिलेगी, और एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस (Export Competitiveness) बढ़ेगी।

राह में रोड़े और व्यापारिक बाधाएं

हालांकि, इस समझौते में 'वरीयतापूर्ण बाज़ार पहुँच' हासिल करना आसान नहीं होगा। मौजूदा डील सिर्फ़ एक अंतरिम समझौता है, और एक विस्तृत द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर अभी बातचीत चल रही है। आलोचकों का कहना है कि अमेरिका का व्यापार को लेकर 'लेन-देन' वाला रवैया अनिश्चितता पैदा कर सकता है। रूसी तेल के आयात को लेकर भी मुश्किलें आ सकती हैं, क्योंकि भारत को इसके आयात को पूरी तरह बंद करने में कुछ समय लग सकता है। अमेरिका लगातार भारत में मौजूद व्यापारिक बाधाओं, जैसे ऊँचे इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty), गैर-टैरिफ मुद्दे और रेगुलेटरी अलाइनमेंट (Regulatory Alignment) की कमी, पर चिंता जताता रहा है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। भारत की सरकारी खरीद नीतियां और सर्विस सेक्टर में प्रतिबंध भी अमेरिकी कंपनियों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। इसके अलावा, कृषि उत्पादों पर मतभेद और किसानों की सुरक्षा के मुद्दे भी भविष्य में टकराव पैदा कर सकते हैं। साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य, बिना बड़े संरचनात्मक सुधारों के, मुश्किल लग रहा है।

आर्थिक नज़रिया और आगे की बातचीत

विश्लेषकों का अनुमान है कि कम टैरिफ और अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे से 2026 में भारत के GDP ग्रोथ (GDP Growth) में थोड़ी तेज़ी आएगी। हाल ही में Goldman Sachs Research ने 2026 के लिए भारत की रियल GDP ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 6.9% सालाना कर दिया है। इसकी वजह व्यापार से जुड़ी अनिश्चितता का कम होना और वित्तीय हालातों (Financial Conditions) का बेहतर होना बताई जा रही है। इस डील से व्यापार की अनिश्चितता कम होने और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट (Private Investment) को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालाँकि बाज़ार पर तुरंत असर को लेकर मिली-जुली राय है, लेकिन भारतीय सामानों की अमेरिका में एक्सपोर्ट कम्पेटिटिवनेस बढ़ेगी, जिससे मैन्युफैक्चरिंग और रोज़गार पर सकारात्मक असर पड़ेगा। एक व्यापक BTA का होना इन फायदों को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए बहुत ज़रूरी होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.