सरकार का बड़ा बयान: आयात पर कोई तत्काल रोक नहीं
सरकारी सूत्रों ने मीडिया में चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए साफ कर दिया है कि फिलहाल अंतरराष्ट्रीय कार्ड के इस्तेमाल पर कोई पाबंदी या सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब देश कई गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें व्यापार घाटे (Trade Deficit) का बढ़ना, कमोडिटी के ऊंचे आयात मूल्य और विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Reserves) पर ग्लोबल अनिश्चितताओं का असर प्रमुख हैं।
आर्थिक दबाव के बीच भरोसा
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयातित वस्तुओं, विदेशी यात्राओं और सोने की खरीद पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया था, ताकि देश आत्मनिर्भर बन सके और कीमती विदेशी मुद्रा बचाई जा सके। इन बयानों के कुछ दिनों बाद सरकार ने यह स्पष्टीकरण दिया है। हालांकि, इन आश्वासनों के बावजूद, देश के लिए बाहरी खाते (External Accounts) को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत का व्यापार घाटा 26% बढ़कर 119.30 अरब डॉलर हो गया, जबकि सिर्फ माल व्यापार घाटा (Merchandise Trade Deficit) 333.20 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
पेट्रोलियम आयात में मामूली कमी आई, लेकिन सोने के आयात मूल्य में 24.1% का बड़ा उछाल आया, जो 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। सोने के आयात की मात्रा में थोड़ी कमी के बावजूद, इसके मूल्य में हुई इस वृद्धि ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर काफी दबाव डाला है।
ऊर्जा सुरक्षा और सोने की मांग
भारत अपनी ईंधन (Fuel) जरूरतों का 85% से अधिक आयात करता है, जिसमें कच्चा तेल (Crude Oil) करीब 88-89% और प्राकृतिक गैस करीब 50% शामिल है। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनावों (Geopolitical Tensions) ने कच्चे तेल की कीमतों को अस्थिर बना दिया है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर असर पड़ रहा है।
दूसरी ओर, भारतीय घरों में बचत का पारंपरिक जरिया सोने की मांग में भी मूल्य के लिहाज से भारी वृद्धि देखी गई है। अकेले 2026 की पहली तिमाही (Q1 2026) में, सोने की मांग मूल्य के हिसाब से 99% बढ़कर 25 अरब डॉलर पर पहुंच गई। निवेशकों ने महंगाई (Inflation) और भारतीय रुपये (Indian Rupee) में कमजोरी के खिलाफ बचाव (Hedge) के तौर पर सोने में निवेश बढ़ाया है। इस बढ़ती मांग ने आयात बिल और व्यापार घाटे को और बढ़ा दिया है।
देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी 1 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में 690.69 अरब डॉलर पर आ गया, जिसमें सोने के भंडार में भी गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंध
इस बीच, भारत अमेरिका के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल (U.S. trade delegation) जल्द ही भारत आने वाला है, ताकि व्यापार समझौते (Trade Agreement) पर आगे बातचीत हो सके। इन चर्चाओं में बाजार पहुंच, टैरिफ और नियामक मुद्दे शामिल होंगे। हालांकि, अमेरिका द्वारा कथित अनुचित व्यापार प्रथाओं (unfair trade practices) पर धारा 301 (Section 301) के तहत चल रही जांचें एक व्यापक समझौते की राह में बाधा डाल सकती हैं। वित्तीय वर्ष 2026 में अमेरिका के साथ भारत का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, खासकर सप्लाई चेन में बाधाएं और कमोडिटी बाजारों में अस्थिरता, भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit - CAD) पर दबाव बनाए हुए है।
आगे का रास्ता
विश्लेषकों का मानना है कि उच्च कच्चे तेल की कीमतों के कारण वित्तीय वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत का चालू खाता घाटा दबाव में बना रह सकता है और संभवतः बढ़ सकता है। सेवाओं के निर्यात (Services Exports) से कुछ राहत मिली है, लेकिन आयात पर संरचनात्मक निर्भरता और जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्य चुनौतियां पेश करते रहेंगे। अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर प्रगति और ईंधन व सोने के आयात बिल को प्रबंधित करने की भारत की क्षमता पर नजरें रहेंगी।
