PAN Card ज़रूरी! 1 अप्रैल 2026 से बदलेंगे नियम, इन बड़े खर्चों के लिए नंबर दिखाना होगा

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
PAN Card ज़रूरी! 1 अप्रैल 2026 से बदलेंगे नियम, इन बड़े खर्चों के लिए नंबर दिखाना होगा
Overview

1 अप्रैल, 2026 से भारत में कई खास फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन (Financial Transactions) के लिए परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN) का इस्तेमाल ज़रूरी होने जा रहा है। सरकार पुराने फॉर्म 60 को बदलकर नया फॉर्म 97 ला रही है, जिसके तहत अब ज्यादा अहम और हाई-वैल्यू वाले कामों के लिए PAN नंबर दिखाना अनिवार्य होगा।

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सरकार ने इनकम टैक्स (Income Tax) से जुड़े नियमों में एक अहम बदलाव का ऐलान किया है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा। इस बड़े फैसले का मुख्य मकसद देश की इकोनॉमी (Economy) को और भी ज़्यादा फॉर्मल बनाना और टैक्स चोरी (Tax Evasion) पर लगाम लगाना है। नए नियम के तहत, कई ज़रूरी और हाई-वैल्यू वाले फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन (Financial Transactions) के लिए अब परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN) देना अनिवार्य होगा। पुराने फॉर्म 60 (Form 60) की जगह लेने वाला नया फॉर्म 97 (Form 97) बहुत सीमित दायरे में इस्तेमाल होगा, जो PAN-आधारित सिस्टम की ओर बड़ा कदम है।

विस्तार से समझें तो, ₹5 लाख से ज़्यादा कीमत वाले मोटर व्हीकल (Motor Vehicle) खरीदने के लिए PAN दिखाना ज़रूरी होगा। ₹50,000 से अधिक के म्यूचुअल फंड (Mutual Funds), डिबेंचर (Debentures) या RBI बॉन्ड में निवेश करने पर भी PAN की ज़रूरत पड़ेगी। प्रॉपर्टी (Property) के लेन-देन के मामले में, PAN का नियम अब ₹20 लाख के ऊपर लागू होगा, जो पहले ₹10 लाख था। इसके अलावा, डीमैट अकाउंट (Demat Account) खोलने, क्रेडिट कार्ड (Credit Card) अप्लाई करने या ₹1 लाख से ज़्यादा के होटल/कन्वेंशन सेंटर के बिल चुकाने के लिए भी PAN नंबर बताना होगा। पहले यह बिल की सीमा ₹50,000 थी।

इस बड़े बदलाव का एक मकसद यह भी है कि नॉन-PAN डिक्लेरेशन (Non-PAN declarations) की संख्या को भारी मात्रा में कम किया जा सके। जहां पहले सालाना लगभग 12.5 करोड़ ऐसे डिक्लेरेशन होते थे, वहीं अब यह संख्या 2 करोड़ से भी कम रह जाने की उम्मीद है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जिनके पास PAN कार्ड नहीं है, उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। खासकर छोटे शहरों या ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह एक बाधा बन सकता है, क्योंकि वे ज़रूरी फाइनेंशियल सर्विसेज़ (Financial Services) और बड़ी खरीदारी से जुड़ नहीं पाएंगे। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि बच्चों के लिए फॉर्म 97 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा, उन्हें अपने गार्जियन (Guardian) के PAN का उपयोग करना होगा।

कुल मिलाकर, यह नियम भारत को एक ज़्यादा पारदर्शी, डिजिटल और फॉर्मल इकोनॉमी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.