AI चैटबॉट और FAQ टूल से नए टैक्स कानून को आसान बनाना
भारत के इनकम टैक्स विभाग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने 65 साल पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 को Income Tax Act, 2025 से बदल दिया है। यह बदलाव 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा। इस बड़े विधायी बदलाव के बीच करदाताओं के लिए नए नियमों को समझना एक चुनौती हो सकती है। इसी को आसान बनाने के लिए विभाग ने दो अहम डिजिटल टूल्स लॉन्च किए हैं: 'कर साथी' (Kar Saathi) नाम का एक एआई (AI) चैटबॉट और 'कर सेतु' (Kar Setu) नाम का एक विस्तृत एफएक्यू (FAQ) टूल।
'कर साथी' और 'कर सेतु' करदाताओं की मदद कैसे करेंगे?
'कर साथी' 24/7 सहायता प्रदान करेगा, जिसमें रिटर्न फाइलिंग, टैक्स भुगतान और टीडीएस (TDS) से जुड़े सामान्य सवालों के जवाब शामिल होंगे। यह टूल उन आम सवालों के जवाब देगा जिनके लिए पहले अक्सर पेशेवर सलाह की जरूरत पड़ती थी।
'कर सेतु' चैटबॉट के साथ मिलकर काम करेगा और पुराने एक्ट की धाराओं को नए एक्ट की धाराओं से जोड़ेगा। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Income Tax Act, 2025 में हर धारा को फिर से नंबर दिया गया है। ये दोनों टूल्स मिलकर व्यक्तियों और व्यवसायों के लिए अनुपालन (compliance) को सरल बनाने का लक्ष्य रखते हैं।
Income Tax Act, 2025 को टैक्स प्रणाली की जटिलताओं को कम करने और डिजिटल युग के लिए कर प्रशासन को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से बनाया गया है। एक्ट में बच्चों की शिक्षा और भोजन भत्ते जैसे भत्तों के लिए संशोधित छूट सीमा (revised exemption limits) भी शामिल है।
कर्मचारियों के लिए पारंपरिक टीडीएस सर्टिफिकेट, फॉर्म 16 (Form 16), को एक नए सिस्टम-जनरेटेड फॉर्म 130 (Form 130) से बदला गया है। यह नया फॉर्म सीधे विभाग के रिकॉर्ड से डेटा खींचेगा, जिससे सटीकता बढ़ेगी और जमा किए गए टीडीएस व कर्मचारी के हकदारी के बीच किसी भी विसंगति को कम किया जा सकेगा।
व्यापक डिजिटल टैक्स पहलें
ये टूल्स विभाग की डिजिटलीकरण (digitalization) पहलों का हिस्सा हैं, जिनमें फेसलेस असेसमेंट (faceless assessments) और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (Annual Information Statement - AIS) जैसी चीजें शामिल हैं। हालांकि विभाग ने अभी यह नहीं बताया है कि एआई का सीधा इस्तेमाल असेसमेंट प्रक्रियाओं में कैसे होगा, लेकिन वह अनुपालन को अधिक सुलभ बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस पहल की सफलता का मूल्यांकन नए एक्ट के तहत पहले पूर्ण फाइलिंग अवधि के दौरान अनुपालन दरों और विवाद डेटा के आधार पर किया जाएगा।