भारत का बड़ा दांव: अमेरिका से टॉक टले, चीन के FDI पर नरमी के संकेत!

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
भारत का बड़ा दांव: अमेरिका से टॉक टले, चीन के FDI पर नरमी के संकेत!
Overview

भारत ने अमेरिका के साथ अपनी व्यापारिक बातचीत को फिलहाल टाल दिया है। वहीं, पड़ोसी देशों, खासकर चीन से आने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) को लेकर जारी 'Press Note 3' की शर्तों में नरमी लाने पर भी विचार किया जा रहा है।

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'Press Note 3' में नरमी: चीन के निवेश पर सरकार का बदला रुख?

केंद्र सरकार 'Press Note 3' की पॉलिसी की समीक्षा कर रही है। यह पॉलिसी अप्रैल 2020 में लागू की गई थी, जिसका मुख्य मकसद उन देशों से होने वाले सीधे विदेशी निवेश (FDI) को रोकना था जिनकी भारत के साथ जमीन सीमा लगती है, खासकर चीन। इसका उद्देश्य महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों के सस्ते अधिग्रहण को रोकना था। वर्तमान पॉलिसी के तहत, इन देशों से किसी भी तरह के FDI के लिए सरकारी अप्रूवल (Government Approval) अनिवार्य है, जिससे कई बार देरी और अनिश्चितता पैदा होती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार अब इस प्रक्रिया को थोड़ा आसान बनाने पर विचार कर रही है। इसमें 'डी मिनिमिस' (De Minimis) थ्रेशोल्ड यानी एक निश्चित राशि से कम निवेश के लिए ऑटोमैटिक अप्रूवल या तीन-स्तरीय (Three-tier) अप्रूवल सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं। इससे छोटे और कम संवेदनशील निवेशों को मंजूरी मिलने में आसानी होगी। खास तौर पर, सोलर टेक्नोलॉजी, बैटरी स्टोरेज और एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (APIs) जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश को तेजी से मंजूरी मिल सकती है, ताकि भारत की तकनीकी तरक्की और सप्लाई चेन मजबूत हो सके। सरकार का इरादा चीन से जरूरी पूंजी और विशेषज्ञता को आकर्षित करना है, बशर्ते वह राष्ट्रीय हितों के अनुरूप हो। 2023 में चीन से FDI में कुछ सुधार के संकेत मिले थे, और सरकार अब मौजूदा अप्रूवल प्रक्रिया को तेज करने पर ध्यान दे रही है।

अमेरिका से व्यापारिक बातचीत पर ब्रेक: नई टैरिफ पॉलिसी का असर

भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौता (Interim Trade Pact) पूरा करने की दिशा में बातचीत चल रही थी। लेकिन, अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद वहां की सरकार ने सभी देशों पर अचानक 15% का एक समान टैरिफ (Flat Tariff) लागू कर दिया। इस बड़े बदलाव के कारण भारत-अमेरिका के बीच होने वाली व्यापारिक वार्ता को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।

पहले यह तय हुआ था कि भारतीय सामानों पर 18% का टैरिफ लगेगा, जो पहले के टैरिफ से कम था। लेकिन, अब नई 15% की दर से बातचीत के मापदंड बदल गए हैं। भारत ने यह रोक इसलिए लगाई है ताकि वह नई टैरिफ पॉलिसी के असर का ठीक से आकलन कर सके। खासकर यह देखना होगा कि यह भारतीय निर्यातकों को चीन और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले कितना प्रतिस्पर्धी बनाता है, जहां शायद टैरिफ कम हो सकता है। इस रोक से भारत को यह सुनिश्चित करने का मौका मिलेगा कि कोई भी अंतिम समझौता दोनों देशों के लिए वाकई फायदेमंद हो, खासकर टेक्सटाइल, रत्न और ऑटो पार्ट्स जैसे सेक्टरों के लिए जिन्हें पहले अमेरिकी टैरिफ से काफी नुकसान हुआ था।

संभावित जोखिम और आगे का रास्ता

अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी में भविष्य में और बदलाव हो सकते हैं, जिससे व्यापार में अस्थिरता बनी रह सकती है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर बढ़ता संरक्षणवाद (Protectionism) और भू-राजनीतिक तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खतरा बने हुए हैं। चीन के निवेश को लेकर, भले ही 'Press Note 3' की समीक्षा हो रही हो, राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं। टैक्स चोरी और डेटा से जुड़ी पिछली शिकायतों के चलते चीनी कंपनियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

सरकार का लक्ष्य 2047 तक देश की अर्थव्यवस्था को $30 ट्रिलियन तक पहुंचाना है। इस लक्ष्य को पाने के लिए, भारत नई फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) नीतियों के जरिए चुनिंदा क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करना चाहता है, जो देश के औद्योगिक और तकनीकी विकास लक्ष्यों के अनुरूप हो। 'Press Note 3' की समीक्षा इसी दिशा में एक कदम है, जिससे भारत एक भरोसेमंद और स्थिर वैश्विक पार्टनर के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सके।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.