टैक्स लिटिगेशन पर बड़ा कदम
वित्त मंत्री ने लोकसभा में पेश किए गए फाइनेंस बिल 2026 पर चर्चा के दौरान बताया कि सरकार का मुख्य जोर टैक्स सिस्टम को सरल बनाने और अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम करने पर है। इस बिल के पारित होने से कई पुराने नियम बदले गए हैं, जो करदाताओं और सरकारी खजाने दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।
नई अपील सीमाएं और फाइलिंग की अवधि
नए नियमों के अनुसार, अब इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) में अपील के लिए ₹60 लाख की राशि जरूरी होगी। वहीं, हाई कोर्ट में अपील के लिए यह सीमा बढ़ाकर ₹2 करोड़ कर दी गई है। सबसे अहम बात यह है कि सीधे सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए ₹5 करोड़ की सीमा निर्धारित की गई है। इन बढ़ी हुई सीमाओं का सीधा मतलब यह है कि टैक्स विभाग छोटी रकम के मामलों में ऊपरी अदालतों तक नहीं जा पाएगा, जिससे अदालतों पर दबाव कम होगा।
इसके साथ ही, टैक्सपेयर्स को एक और बड़ी राहत मिली है। अब वे अपनी टैक्स रिटर्न्स को ठीक करने या अपडेट करने के लिए 48 महीने तक का समय ले सकेंगे। यह बदलाव उन करदाताओं के लिए खास तौर पर मददगार होगा, जो किसी वजह से समय पर अपनी रिटर्न ठीक नहीं कर पाते।
लंबित मामलों का भारी बोझ
ये बदलाव ऐसे समय में आए हैं जब भारत में टैक्स से जुड़े लंबित मामलों (Pending Cases) का अंबार लगा हुआ है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के अंत तक, देश भर में 539,000 से ज्यादा इनकम टैक्स के मामले लंबित थे, जिनकी कुल विवादित राशि ₹16.75 लाख करोड़ थी। इनमें ITAT में 22,960 केस, हाई कोर्ट में 34,486 केस और सुप्रीम कोर्ट में 6,338 केस शामिल हैं। यह दिखाता है कि लिटिगेशन को कम करने के लिए सरकार किस कदर गंभीर है।
चुनौतियां और बाजार का रुख
हालांकि, जानकारों का मानना है कि सिर्फ सीमाएं बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। ऐतिहासिक रूप से, इनकम टैक्स विभाग की ऊपरी अदालतों में अपील जीतने की दर काफी कम रही है (ITAT में करीब 27% और हाई कोर्ट में 13%)। नौकरशाही की दिक्कतें और टारगेट पूरे करने का दबाव भी एक बड़ी चुनौती है।
दिलचस्प बात यह है कि इस फाइनेंस बिल के पास होने के वक्त भारतीय शेयर बाजार में भी जबरदस्त तेजी देखी जा रही थी। 25 मार्च 2026 को, सेंसेक्स (Sensex) 75,600 के करीब और निफ्टी (Nifty) 23,400 के आसपास कारोबार कर रहा था। बाजार की यह तेजी भू-राजनीतिक तनाव कम होने और तेल की कीमतों में गिरावट का नतीजा मानी जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि टैक्स नियमों में सरलता से कंपनियों की कमाई और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है।