महंगाई का डबल अटैक: आम आदमी पर बोझ, सरकार पर दबाव
इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा और महंगाई (Inflation) को और भड़काएगा। तेल की कीमतें भारतीय कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) का 4.81% हिस्सा हैं। अनुमान है कि मई 2026 तक CPI महंगाई दर 4.1% तक पहुंच सकती है, जो अप्रैल के 4.0% से ज्यादा है। वहीं, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) में भी यह बढ़ोतरी दिखेगी, जिसके मई में 9-9.5% तक पहुंचने की आशंका है।
फिस्कल घाटे का खतरा, चालू खाते पर असर
यह ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि अर्थव्यवस्था पर सालाना लगभग ₹0.5 ट्रिलियन का अतिरिक्त बोझ डालेगी। भले ही यह ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के नुकसान को कम करने में थोड़ी मदद करे, लेकिन सरकार के खजाने पर दबाव बढ़ेगा। खासकर एलपीजी (LPG) सब्सिडी का बिल ₹60,000 करोड़ से ऊपर जा सकता है, जो सरकार के लिए एक बड़ा फिस्कल रिस्क (Fiscal Risk) है। इसके अलावा, भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) भी बढ़कर 2.0% तक पहुंच सकता है, जो आयातित तेल की ऊंची कीमतों का सीधा नतीजा होगा।
एल नीनो का साया, मॉनसून पर अनिश्चितता
चिंता की बात यह भी है कि 'सुपर एल नीनो' (Super El Nino) का खतरा मंडरा रहा है, जिससे मॉनसून कमजोर पड़ने की 61% संभावना है। अगर बारिश कम हुई, तो खेती पर बुरा असर पड़ेगा, जिससे खाने-पीने की चीजों के दाम और बढ़ सकते हैं। इससे खाद्य तेलों के आयात पर भारत की निर्भरता और बढ़ेगी, जो चालू खाते के घाटे को और बढ़ाएगा।
आर्थिक Outlook: विकास दर पर असर की आशंका
इन सब चिंताओं के बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रख सकती है। वहीं, FY2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.2%-6.5% किया जा रहा है, क्योंकि ऊंची ऊर्जा कीमतें और वैश्विक आर्थिक कारक विकास को प्रभावित कर सकते हैं।