ग्रोथ की कहानी, पर बदले हालात
FY26 के खत्म होते-होते भारत की अर्थव्यवस्था ने कमाल कर दिया। चौथी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही, जिससे पूरे फाइनेंशियल ईयर की ग्रोथ 7.7% पर पहुंच गई। ये आंकड़े बताते हैं कि डोमेस्टिक डिमांड अभी भी मजबूत है, भले ही बाहरी दबाव बढ़ रहा हो। खास तौर पर सर्विसेज सेक्टर, जहां नए बिजनेस और एक्सपोर्ट ऑर्डर खूब आए, इस ग्रोथ का बड़ा सहारा बना। लेकिन, इस शानदार परफॉर्मेंस के बावजूद, ग्लोबल इकोनॉमी में आ रही दिक्कतें भारतीय बाजार को भी प्रभावित कर रही हैं।
RBI का बदला रुख: दरें वही, पर चिंता ज्यादा
जहां एक तरफ GDP के आंकड़े अच्छे दिख रहे हैं, वहीं RBI का रवैया थोड़ा सतर्क हो गया है। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है। लेकिन, साथ ही FY27 के लिए GDP ग्रोथ के अनुमान को 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है। RBI का कहना है कि ग्लोबल एनर्जी की कीमतें उम्मीद से ज्यादा बढ़ गई हैं और पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का भी असर है। FY27 के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) इन्फ्लेशन का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है। ये सब संकेत देते हैं कि अब आसानी से हाई-ग्रोथ और लो-इन्फ्लेशन का दौर शायद खत्म हो रहा है।
आने वाले समय की चिंताएं
इन चमकदार आंकड़ों के पीछे कुछ बड़ी चिंताएं भी छिपी हैं, जो अगले फाइनेंशियल ईयर में इकोनॉमी को धीमा कर सकती हैं। सबसे बड़ा डर है ग्लोबल एनर्जी कीमतों का असर। अगर कच्चे तेल की कीमतें ऐसी ही ऊंची बनी रहीं, तो इंडस्ट्री और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर दबाव बढ़ेगा। पहले जहां डोमेस्टिक डिमांड इन झटकों को झेल लेती थी, अब इनपुट कॉस्ट बढ़ने से इन्वेस्टमेंट पर असर पड़ सकता है। इकोनॉमिस्ट्स का यह भी मानना है कि ट्रेड में अनिश्चितता और सप्लाई चेन में दिक्कतें इकोनॉमी के लिए परेशानी का सबब बन सकती हैं। इसीलिए RBI ने रेपो रेट में कटौती के बजाय 5.25% पर बनाए रखने का फैसला किया है, ताकि करेंसी की स्थिरता और महंगाई पर कंट्रोल रखा जा सके।
आगे का रास्ता
अब मार्केट पार्टिसिपेंट्स अपने अनुमानों को एडजस्ट कर रहे हैं। सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल एक्सपेंडिचर पर जोर इकोनॉमी को सपोर्ट तो करेगा, लेकिन ग्रोथ के अनुमानों में कमी यह बता रही है कि आने वाले समय में रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है। आने वाली तिमाहियों में यह देखना होगा कि ग्लोबल एनर्जी कीमतों का असर कम होता है या फिर कोई नया जियोपॉलिटिकल झटका इकोनॉमी को और नीचे ले जाता है। फिलहाल, ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी इकोनॉमी बना रहेगा, लेकिन अब थोड़ी सावधानी और कम उम्मीदों के साथ।
