बिजली दरों में बड़ा बदलाव! सरकारी नीति से डिस्कॉम को मिलेगी राहत?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
बिजली दरों में बड़ा बदलाव! सरकारी नीति से डिस्कॉम को मिलेगी राहत?

भारत सरकार बिजली की कीमतों को महंगाई से जोड़ने का प्रस्ताव रख रही है। ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 के तहत, यह कदम बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के घाटे को कम करने और सेक्टर में निवेश बढ़ाने के लिए उठाया जा रहा है।

केंद्र सरकार बिजली के दामों में बड़े सुधार की तैयारी में है। ऊर्जा मंत्रालय ने ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 पेश की है, जिसमें एक क्रांतिकारी प्रस्ताव है – बिजली की दरों को सीधे महंगाई (Inflation) से जोड़ दिया जाएगा। इसका मतलब है कि अब बिजली की कीमतें अपने आप बढ़ेंगी, ठीक वैसे ही जैसे महंगाई बढ़ती है।

डिस्कॉम की माली हालत सुधरेगी?

भारत में बिजली वितरण कंपनियां (Discoms) अक्सर भारी घाटे में चलती हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि वे ग्राहकों से जितनी कीमत वसूलती हैं, वह बिजली खरीदने और इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने की लागत से कम होती है। कई बार राजनीतिक कारणों से भी बिजली की दरें बढ़ाई नहीं जातीं। इस नई नीति के तहत, बिजली की दरें महंगाई इंडेक्स से जुड़ने पर डिस्कॉम अपनी परिचालन लागत (Operational Costs) को बेहतर ढंग से वसूल पाएंगे। कई देशों में यह तरीका अपनाया जाता है, जिससे कंपनियों को जरूरी मेंटेनेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करने के लिए पैसा मिलता रहता है।

कानूनी अड़चनें और चुनौतियां

हालांकि, इस प्रस्ताव को हकीकत बनाने में कई कानूनी पेंच हैं। मौजूदा इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के तहत, बिजली की दरें तय करने का अधिकार केवल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशंस (SERCs) के पास है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक राष्ट्रीय नीति कानून से ऊपर नहीं है। इस ऑटोमैटिक इंडेक्सेशन को लागू करने के लिए संसद को इलेक्ट्रिसिटी एक्ट में संशोधन करना होगा, जिसमें राज्यों की सहमति लेना एक बड़ी चुनौती हो सकती है।

उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?

इस बदलाव से आम उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ सकता है। अभी तक, बिजली दरें तय करते समय पब्लिक हियरिंग होती है, जहां उपभोक्ता अपनी बात रख सकते हैं। ऑटोमैटिक सिस्टम से यह प्रक्रिया खत्म हो सकती है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं। ड्राफ्ट पॉलिसी में यह भी साफ नहीं है कि किस महंगाई इंडेक्स का इस्तेमाल किया जाएगा। क्या यह कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) होगा या होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI)? यह देखना अहम होगा कि सरकार इन चिंताओं को कैसे दूर करती है, खासकर इलेक्ट्रिसिटी एक्ट में संशोधन और क्रॉस-सब्सिडी जैसे मुद्दों पर।

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