India Power Demand: AI के चलते 2027 तक 300 GW पार! बिजली संकट से निपटने की तैयारी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India Power Demand: AI के चलते 2027 तक 300 GW पार! बिजली संकट से निपटने की तैयारी

भारत में बिजली की मांग में भारी उछाल का अनुमान है, जो 2027 तक **300 GW** तक पहुंच सकती है। इसका मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता इस्तेमाल, डेटा सेंटर्स की बढ़ती संख्या और औद्योगिक विकास है। इस मांग को पूरा करने के लिए सरकार ग्रिड के आधुनिकीकरण और एनर्जी स्टोरेज में बड़े निवेश पर जोर दे रही है।

Detailed Coverage

AI का बढ़ता दबदबा, बिजली की मांग में इजाफा

भारत में बिजली की खपत तेजी से बढ़ने वाली है। अनुमान है कि साल 2027 तक देश की पीक बिजली मांग 300 GW के स्तर को पार कर जाएगी। केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल ने इस बात पर जोर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से अपनाना, ज्यादा बिजली खपत करने वाले डेटा सेंटर्स का उभार और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का बढ़ता इकोसिस्टम इस मांग को बढ़ाने वाले प्रमुख कारक हैं। पिछले औद्योगिक विकास के चक्रों के विपरीत, आज डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को 24/7 सपोर्ट के लिए लगातार और उच्च गुणवत्ता वाली बिजली की जरूरत है।

डेटा सेंटर्स का ग्रिड पर असर

डेटा सेंटर्स बिजली की खपत के पैटर्न को पूरी तरह से बदल रहे हैं। मॉडर्न AI-संचालित सर्वर को हाई पावर डेंसिटी की आवश्यकता होती है, जिसमें प्रति रैक 40 से 100 kW तक बिजली लग सकती है, जो पारंपरिक सर्वर सेटअप से काफी ज्यादा है। चूंकि ये फैसिलिटीज लगातार पीक क्षमता के करीब काम करती हैं, इसलिए वे ग्रिड को स्थिर करने वाले ऑफ-पीक घंटों को खत्म कर देती हैं। डेटा सेंटर की 40% तक बिजली सिर्फ कूलिंग सिस्टम में खर्च हो जाती है, ऐसे में पावर प्रोवाइडर्स के सामने बड़ी मात्रा में बिजली की सप्लाई करने के साथ-साथ ग्रिड की मजबूती बनाए रखने की दोहरी चुनौती है।

एनर्जी स्टोरेज की ओर बढ़ता कदम

हालांकि भारत ने रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) के क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है, लेकिन सोलर और विंड पावर की रुक-रुक कर होने वाली सप्लाई, AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए चौबीसों घंटे की विश्वसनीयता की मांग और आपूर्ति के बीच एक अंतर पैदा करती है। इस अंतर को पाटने के लिए, सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (Central Electricity Authority) ने 2035-36 तक 174 GW स्टोरेज क्षमता की जरूरत का अनुमान लगाया है। वहीं, 2036 तक बैटरी एनर्जी स्टोरेज की कुल जरूरत 888 GWh तक पहुंचने का अनुमान है। इस जरूरत के चलते सरकार बड़े पैमाने पर एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशंस को प्राथमिकता दे रही है, जिसका असर बड़ी यूटिलिटीज और पावर इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (Power Equipment Manufacturers) के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) प्लान पर पड़ सकता है।

ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण

जेनरेशन कैपेसिटी (Generation Capacity) बढ़ाना रणनीति का सिर्फ एक हिस्सा है; सप्लाई नेटवर्क को आधुनिक बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। रिन्यूएबल एनर्जी को डेटा सेंटर्स और EV नेटवर्क की बदलती मांग के साथ इंटीग्रेट करने की जटिलता को संभालने के लिए, पावर सेक्टर AI-संचालित ग्रिड मैनेजमेंट की ओर बढ़ रहा है। GRID-INDIA द्वारा संचालित ग्रिड एस्ट्रा पोर्टल (Grid Astra portal) पहले से ही रियल-टाइम डिमांड फोरकास्टिंग (Real-time demand forecasting) के लिए मशीन लर्निंग का उपयोग कर रहा है। इस बीच, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Power Grid Corporation of India) जैसी प्रमुख कंपनियां आउटेज को रोकने और एसेट्स (Assets) को अधिक कुशलता से प्रबंधित करने के लिए प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस (Predictive Maintenance) के लिए ड्रोन और AI को इंटीग्रेट कर रही हैं।

निवेश और ऑपरेशनल ट्रेंड्स

यह परिवर्तन डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग (Domestic Manufacturing) में निवेश का एक महत्वपूर्ण चक्र बना रहा है, जिसे विभिन्न प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (Production Linked Incentive) योजनाओं का समर्थन प्राप्त है। निवेशक उन कंपनियों पर नजर रख सकते हैं जो ट्रांसमिशन इक्विपमेंट (Transmission Equipment), पावर इलेक्ट्रॉनिक्स (Power Electronics) और बैटरी केमिस्ट्री (Battery Chemistry) में भारी रूप से शामिल हैं, क्योंकि वे इन नई ग्रिड आवश्यकताओं के अनुकूल हो रही हैं। इन कंपनियों के लिए वित्तीय प्रभाव उनकी बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को महत्वपूर्ण लागत वृद्धि के बिना निष्पादित करने की उनकी क्षमता पर निर्भर करेगा, क्योंकि अगले कुछ वर्षों के लिए ग्रिड विश्वसनीयता की नियामक पहल एक प्राथमिक फोकस बनी हुई है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.