भारत की सप्लाई चेन को मिलेगी मजबूती! चीन-अमेरिका की तर्ज पर बनेगा नया सुरक्षा ढांचा

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
भारत की सप्लाई चेन को मिलेगी मजबूती! चीन-अमेरिका की तर्ज पर बनेगा नया सुरक्षा ढांचा
Overview

भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Advisor) V. Anantha Nageswaran ने देश को अपना सप्लाई चेन सुरक्षा ढांचा (Supply Chain Security Framework) तैयार करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि भारत को चीन और अमेरिका जैसे देशों के मॉडल से सीखना चाहिए।

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भारत को चाहिए अपना सप्लाई चेन शील्ड

भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार V. Anantha Nageswaran ने ज़ोर देकर कहा है कि देश को अपना सप्लाई चेन सुरक्षा ढांचा (Supply Chain Security Framework) खुद बनाना चाहिए। उन्होंने प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं जैसे चीन और अमेरिका की रणनीतियों का पालन करने का सुझाव दिया। Nageswaran ने एक कॉन्फ्रेंस में कहा कि कंपनियों के लिए अपने ऑपरेशंस को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना मुश्किल होता जा रहा है, जो ग्लोबल बिजनेस को नया आकार दे रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत को एक अधिक संरक्षणवादी (Protectionist) दुनिया के लिए तैयार रहना होगा और अपने हितों की रक्षा के लिए सिस्टम स्थापित करने होंगे।

ग्लोबल संरक्षणवाद से बचाव

Nageswaran ने चीन के हालिया नियमों, डिक्री नंबर 834 और डिक्री नंबर 835 का उदाहरण दिया, कि कैसे देश विदेशी निवेश को रोकने और विदेशी मांगों का मुकाबला करने की कोशिश करते हैं। इन नियमों के तहत उन कंपनियों को दंडित किया जाता है जो सप्लाई चेन को चीन से बाहर ले जाने की कोशिश करती हैं। उन्होंने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि इन कार्रवाइयों पर ग्लोबल ट्रेड बातचीत में ज़्यादा चर्चा नहीं हुई। Nageswaran का मानना है कि भारत को अपना खुद का 'ब्लॉकिंग स्टेट्यूट' (Blocking Statute) और सप्लाई चेन सुरक्षा ढांचा चाहिए। उन्होंने अमेरिका के कमेटी ऑन फॉरेन इन्वेस्टमेंट (CFIUS) जैसे एक प्राधिकरण (Authority) की भी मांग की, जो राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले विदेशी निवेश की समीक्षा कर सके।

भारतीय बिज़नेस निवेश की आलोचना

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने भारत के प्राइवेट सेक्टर (Private Sector) को भी निवेश करने में हिचकिचाहट पर आड़े हाथों लिया, भले ही कंपनियों ने बढ़ता प्रॉफिट (Profit) और बेहतर रेगुलेटरी माहौल देखा हो। उन्होंने सुझाव दिया कि इस प्रॉफिट का बड़ा हिस्सा फिजिकल एसेट्स (Physical Assets) में रीइन्वेस्ट नहीं किया गया है, जिससे भविष्य की डिमांड (Demand) को लेकर अनिश्चितता पैदा हो सकती है। Nageswaran ने इस बात पर ज़ोर दिया कि विकसित देशों में, सफल राष्ट्र-निर्माण में अक्सर बिज़नेस ऐसे काम करते थे जो राष्ट्रीय हित में हों, यानी प्राइवेट प्रॉफिट को राष्ट्रीय लक्ष्यों से जोड़ना।

आर्थिक दबाव और एक्सपोर्ट की संभावना

आर्थिक स्थिति में भारतीय रुपया (Indian Rupee) का डॉलर के मुकाबले हाल ही में अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचना भी शामिल है, जिसका आंशिक कारण भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और तेल की ऊंची कीमतें हैं। इन मुश्किलों के बावजूद, Nageswaran ने बताया कि चीन की तुलना में एक्सचेंज रेट (Exchange Rate) के अंतर को कम करने से भारतीय एक्सपोर्ट (Exports) को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, उन्होंने भारतीय कंपनियों द्वारा मौजूदा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) का पर्याप्त उपयोग न करने की भी आलोचना की। उन्होंने इंडस्ट्री ग्रुप्स से इन पैक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए और अधिक प्रयास करने का आग्रह किया। इस बीच, अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (Manufacturing Sector) का योगदान स्थिर बना हुआ है, जिसमें कोई बड़ा विकास नहीं दिख रहा है।

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