सरकारी कैपेक्स का बूस्ट: विकास की नई रफ्तार
Union Budget 2026 में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग को गति देने के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) के लिए रिकॉर्ड ₹12.2 ट्रिलियन (लगभग 133 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का आवंटन किया है। यह एक बड़ा कदम है जो सिर्फ डिमांड बढ़ाने के बजाय, देश की लॉन्ग-टर्म इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा। हाई-स्पीड रेल, नेशनल वॉटरवेज़ और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि लॉजिस्टिक्स की लागत कम हो, प्रोडक्टिविटी बढ़े और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट के लिए अनुकूल माहौल बन सके। सरकार का ज़ोर अब सिर्फ योजनाओं के ऐलान पर नहीं, बल्कि उनके प्रभावी कार्यान्वयन पर है।
प्राइवेट इन्वेस्टमेंट की राह आसान
पिछले कुछ सालों से भारत को मैन्युफैक्चरिंग और Jobs देने वाली कैपेसिटी में प्राइवेट कैपिटल जुटाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। इसकी वजहें थीं - इंडस्ट्री में खाली पड़ी क्षमता, पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता, इनपुट कॉस्ट में उतार-चढ़ाव और कंपनियों का फिजिकल एसेट्स की जगह फाइनेंशियल एसेट्स में निवेश को तरजीह देना। सरकार के इस कैपेक्स पुश का मकसद एक 'वाइरस साइकिल' चलाना है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सेक्टर-स्पेसिफिक ग्रोथ से कैपेसिटी यूटिलाइजेशन बढ़ेगा, डिमांड पैदा होगी और फिर प्राइवेट सेक्टर के लिए लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के मौके ज्यादा आकर्षक और कम रिस्की नजर आएंगे। बजट में खास सेक्टर्स के लिए टैक्स की स्थिरता (Tax Predictability) का वादा भी है, जो बड़े निवेशों को लेकर कंपनियों की चिंताओं को दूर करने में मददगार हो सकता है।
फिस्कल हेल्थ और सेक्टोरल फोकस
यह बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान सरकार फिस्कल प्रूडेंस (राजकोषीय विवेक) को बनाए रखते हुए लागू कर रही है। फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) के लिए फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य 4.3% रखा गया है, जो ग्रोथ पर ध्यान केंद्रित करने के बावजूद मैक्रोइकॉनॉमिक स्टेबिलिटी के प्रति प्रतिबद्धता दिखाता है। इस मजबूत डोमेस्टिक डिमांड और कैपिटल फॉर्मेशन के दम पर, फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) के लिए GDP ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है। सरकार सक्रिय रूप से सेमीकंडक्टर्स, बायोफार्मा, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे उभरते (Frontier) सेक्टर्स पर ध्यान दे रही है, ताकि राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों और बदलती ग्लोबल सप्लाई चेन का फायदा उठाया जा सके। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में इन अहम सेक्टर्स में ग्रोथ पोटेंशियल दिखाने वाली कंपनियों को सरकारी नीतियों का विशेष समर्थन मिलेगा।