RBI के आंकड़े बताते हैं बड़ा बदलाव
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में भारतीय कंपनियों द्वारा विदेश में किए जाने वाले निवेश (Outbound FDI) के वादों में पिछले साल की तुलना में जबरदस्त कमी आई है। कुल निवेश का आंकड़ा 2.76 अरब डॉलर रहा, जबकि फरवरी 2025 में यह 4.30 अरब डॉलर था। यह जनवरी 2026 के लगभग 3.60 अरब डॉलर के आंकड़े से भी कम है।
खासकर, इक्विटी (Equity) में निवेश के वादे घटकर 1.11 अरब डॉलर रह गए, जो पिछले साल 2.61 अरब डॉलर थे। डेट (Loans) के तहत 714.30 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ, जो पिछले साल के 803.08 मिलियन डॉलर से कम है। हालांकि, गारंटी (Guarantees) जारी करने में 936.93 मिलियन डॉलर का इजाफा हुआ, पर यह जनवरी 2026 के 1.46 अरब डॉलर से काफी नीचे है। यह गिरावट कई मोर्चों पर विदेशी निवेश में नरमी का इशारा करती है।
क्यों बरती जा रही है सावधानी?
भारत के विदेशी निवेश में यह कमी वैश्विक रुझानों के अनुरूप है। दुनिया भर में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव, ट्रेड पॉलिसी को लेकर अनिश्चितताएं और सप्लाई चेन में चल रहे बदलावों के कारण कंपनियां अब जोखिम लेने से कतरा रही हैं। पहले जहां भारतीय कंपनियां तेजी से विदेश में विस्तार कर रही थीं (2024 से पहले 5 सालों में 12.6% CAGR की दर से), वहीं अब फोकस घरेलू स्तर पर मजबूती लाने या बेहद चुनिंदा विदेशी प्रोजेक्ट्स पर केंद्रित हो रहा है।
