बाहरी झटकों के बीच घरेलू मजबूती
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत की डोमेस्टिक इकोनॉमी (घरेलू अर्थव्यवस्था) काफी मजबूत है और महंगाई व सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याओं को बखूबी संभाला जा रहा है। हालिया गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन के आंकड़े भी लगातार बनी हुई खपत को दर्शाते हैं। दिसंबर 2025 में GST कलेक्शन ₹1.74 लाख करोड़ रहा, जबकि जनवरी 2026 में यह बढ़कर ₹1.934 ट्रिलियन तक पहुंच गया। ये आंकड़े देश की आर्थिक सक्रियता को दिखाते हैं। हालांकि, मंत्री ने स्वीकार किया कि देश के सामने मुख्य आर्थिक मुश्किलें बाहरी वैश्विक अनिश्चितताओं से आ रही हैं, न कि अंदरूनी समस्याओं से। अनुमान है कि भारत की GDP ग्रोथ 7.4% से लेकर 8% से ऊपर रहने का अनुमान है, जो दुनिया की आर्थिक मंदी (2.7% ग्रोथ का अनुमान) के मुकाबले भारत को एक प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्था बनाए रखेगा। भू-राजनीतिक तनाव और बदलती व्यापार नीतियों के बावजूद, भारत का आउटलुक घरेलू मांग और सरकारी निवेश से मजबूत बना हुआ है।
टैक्स का दायरा बढ़ाना और नियमों का पालन
सरकार की फिस्कल (राजकोषीय) रणनीति का एक अहम हिस्सा टैक्स नेट को बढ़ाना है। इसके लिए एडवांस्ड AI डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि खर्च के डेटा को टैक्स फाइलिंग से क्रॉस-रेफरेंस करके संभावित नॉन-कंप्लायंस (नियमों का उल्लंघन) का पता लगाया जा सके। इसी तरह, टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) को बड़े खर्चों से लिंक करने और विदेशी संपत्तियों के स्वैच्छिक डिस्क्लोजर को बढ़ावा देने की योजनाएं हैं। डीप टेक एनालिसिस का उपयोग हाई-स्पेंडिंग (ज्यादा खर्च करने वाले) व्यक्तियों की जांच के लिए किया जाएगा, ताकि उन्हें टैक्स के दायरे में लाया जा सके। छोटे टैक्सपेयर्स के लिए 'टैक्स मित्रा' जैसी पहलों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसमें इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) जैसे पेशेवर निकाय किफायती सहायता प्रदान करेंगे।
बाजार पर पैनी नजर और निवेशक सुरक्षा
बहुत ज्यादा सट्टेबाजी (Speculation) को नियंत्रित करने के लिए, सरकार ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ा दिया है। 1 अप्रैल, 2026 से फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर STT 0.02% से बढ़कर 0.05% हो जाएगा, और ऑप्शंस पर यह 0.10%/0.125% से बढ़कर 0.15% कर दिया गया है। यह कदम हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग को हतोत्साहित करने और रिटेल निवेशकों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है, क्योंकि इस सेगमेंट में लगभग 90% पार्टिसिपेंट्स को नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अलावा, सोवरन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bonds) पर कैपिटल गेन्स टैक्स (Capital Gains Tax) लगाया गया है, जो सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए बॉन्ड्स पर लागू होगा। इसका मकसद इन बॉन्ड्स को लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के तौर पर बढ़ावा देना है, न कि सट्टेबाजी के लिए।
युवा शक्ति और सेक्टरों का विकास
'युवा शक्ति' पर एक खास फोकस 'एजुकेशन, स्किलिंग और एंटरप्रेन्योरशिप' (शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता) की पहलों को दर्शाता है। स्किल डेवलपमेंट को टेक्नोलॉजी की बदलती मांगों के साथ जोड़ने के लिए क्रॉस-मिनिस्ट्री कोलैबोरेशन (विभिन्न मंत्रालयों के बीच सहयोग) और इंडस्ट्री पार्टनरशिप की जा रही है। 'ऑरेंज इकोनॉमी', जिसमें एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVCG) शामिल हैं, को कंटेंट क्रिएशन और संबंधित क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए विकसित किया जाएगा। बजट 2024-25 में रोजगार और स्किलिंग के लिए एक बड़े पैकेज की घोषणा की गई थी, लेकिन FY26 में इसका खर्च मामूली रहा, जिससे कार्यान्वयन की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं। हालांकि, सरकार रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है।
निवेश का आउटलुक और फिस्कल मैनेजमेंट
जबकि डोमेस्टिक प्राइवेट सेक्टर इन्वेस्टमेंट (घरेलू निजी क्षेत्र का निवेश) में सुधार के संकेत दिख रहे हैं, मंत्री ने स्वीकार किया कि ग्लोबल फंड फ्लो (विदेशी निवेश) अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विचारों से प्रभावित होता है, जो फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) को प्रभावित करता है। भारत एक निवेश गंतव्य के रूप में अपनी आकर्षकता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSEs) के लिए रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) का उपयोग करके एसेट मोनेटाइजेशन (संपत्तियों का मुद्रीकरण) की योजनाएं हैं। सरकार कस्टम प्रक्रियाओं को भी सुव्यवस्थित करना चाहती है और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (बुनियादी ढांचे के विकास) का समर्थन करने के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) पर जोर दे रही है, जो FY26 के पहले नौ महीनों में 15% बढ़ा है। फिस्कल टारगेट (राजकोषीय लक्ष्य) प्राथमिकता बने हुए हैं, जिसमें FY27 तक फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) को GDP का 4.3% रखने का लक्ष्य है। राजस्व क्षमता को मजबूत करने की रणनीति में टैक्स ब्योएंसी (Tax Buoyancy) और बेहतर कंप्लायंस शामिल हैं।
आगे की आर्थिक राह
आर्थिक विश्लेषणों से पता चलता है कि भारत 2026 तक खपत, निवेश और निर्यात से प्रेरित होकर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। हालांकि, वैश्विक व्यापार संरक्षणवाद, भू-राजनीतिक संघर्ष और वित्तीय बाजार की अस्थिरता जैसे जोखिम बने हुए हैं। डोमेस्टिक हेडविंड्स (घरेलू बाधाओं) में निजी निवेश का धीमा पुनरुद्धार और कृषि उत्पादकता में चुनौतियां शामिल हो सकती हैं। इन बाहरी अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत की नीतिगत संरचना, जो फिस्कल प्रूडेंस (राजकोषीय विवेक), ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यवसाय करने में आसानी) और लक्षित सुधारों पर केंद्रित है, निरंतर विकास को बढ़ावा देने और लॉन्ग-टर्म कैपिटल को आकर्षित करने का लक्ष्य रखती है, जिससे वैश्विक आर्थिक मंच पर इसकी स्थिति मजबूत होगी।