इन्वेस्टमेंट और ट्रेड में बड़ी बढ़ोतरी
भारत और न्यूजीलैंड के बीच यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) 24 अप्रैल को साइन हो सकता है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अगले 15 सालों में न्यूजीलैंड से भारत में $20 अरब (लगभग ₹16,000 करोड़) का महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित करना है। वहीं, अगले 5 सालों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके $5 अरब तक पहुंचाने का लक्ष्य है। वित्त वर्ष 2024-25 में मर्चेंडाइज ट्रेड $1.3 अरब था, और 2024 में कुल माल और सेवा व्यापार $2.4 अरब तक पहुंच गया था। इस समझौते के तहत, भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में सभी उत्पाद लाइनों पर तुरंत टैरिफ-फ्री (Tariff-Free) एक्सेस मिलेगा, जो भारत के उद्योगों और वैश्विक एकीकरण को बढ़ावा देगा।
बाजार पहुंच और प्रमुख अपवाद
FTA में बाजार खोलने की एक विस्तृत योजना शामिल है, जिसके तहत न्यूजीलैंड भारत को अपने 95% से अधिक निर्यात पर टैरिफ को खत्म या कम करेगा। इसमें भेड़ के मांस, ऊन, कोयला और 95% से अधिक वानिकी उत्पादों पर तुरंत टैरिफ में कटौती शामिल है। कीवी फल और सेब जैसे बागवानी उत्पादों के लिए विशेष कोटा एक्सेस प्रदान किया जाएगा, जो वर्तमान व्यापार मात्रा से अधिक होने की उम्मीद है। हालांकि, भारत ने अपने प्रमुख घरेलू कृषि उत्पादों की रक्षा की है। इसमें डेयरी (दूध, क्रीम, व्हे, पनीर), प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल और रबर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को टैरिफ कटौती से स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है। यह कदम भारत के बड़े कृषि क्षेत्र को सीधे आयात प्रतिस्पर्धा से बचाने की रणनीति को दर्शाता है।
कुशल कामगार वीज़ा और सेवाओं को बढ़ावा
भारत-न्यूजीलैंड FTA की एक खास बात कुशल श्रमिकों के लिए एक नया वीज़ा रास्ता खोलना है। न्यूजीलैंड कुशल नौकरियों में भारतीय पेशेवरों के लिए सालाना 5,000 वीज़ा का कोटा पेश करेगा, जिससे वे तीन साल तक रुक सकेंगे। यह पहल आईटी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा और निर्माण जैसे उच्च-मांग वाले क्षेत्रों के साथ-साथ AYUSH चिकित्सकों, योग प्रशिक्षकों और शेफ जैसे विशिष्ट व्यवसायों को लक्षित करती है। भारतीय आईटी और ज्ञान-आधारित उद्योगों के लिए, यह प्रतिभा लाने और संभावित घरेलू कौशल की कमी को दूर करने का एक तरीका प्रदान करता है। भारतीय स्नातकों के डिग्री के आसान मूल्यांकन से भी कुशल श्रमिकों की पहुंच तेज होगी। सेवाओं पर यह ध्यान, सेवा व्यापार और प्रतिभा की गतिशीलता पर जोर देने का संकेत देता है।
संभावित चुनौतियाँ और निगरानी
व्यापक टैरिफ कटौती के बावजूद, भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता पर FTA के प्रभाव पर ध्यान देने की आवश्यकता है। जबकि भारत अपने डेयरी और चीनी क्षेत्रों की रक्षा कर रहा है, न्यूजीलैंड के उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्धा करने वाले अन्य भारतीय उद्योगों, जैसे कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों पर पड़ने वाले प्रभावों की निगरानी की जानी चाहिए। पिछले FTAs से पता चला है कि व्यापार की मात्रा बढ़ सकती है, लेकिन यदि आयात निर्यात से तेजी से बढ़ता है तो व्यापार घाटा बढ़ सकता है। न्यूजीलैंड में NZ First पार्टी जैसी कुछ पार्टियों की चिंताओं से समझौते को लागू करने में बाधाएं आ सकती हैं।