India Misses AI Boom: शेयर बाजार में भूचाल, 14 साल के निचले स्तर पर पहुंचा विदेशी निवेश

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India Misses AI Boom: शेयर बाजार में भूचाल, 14 साल के निचले स्तर पर पहुंचा विदेशी निवेश
Overview

AI क्रांति की दौड़ में पिछड़ता दिख रहा भारत का शेयर बाजार। जहां साउथ कोरिया और ताइवान जैसी कंट्रीज AI इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से आगे बढ़ रही हैं, वहीं भारत का मार्केट एक बड़ी री-वैल्यूएशन (Revaluation) से गुजर रहा है। विदेशी निवेशकों का पैसा तेजी से निकल रहा है, जिसके चलते उनका मालिकाना हक 14 साल के निचले स्तर पर आ गया है।

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AI के आगे भारतीय बाजार क्यों लड़खड़ाया?

दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दबदबे से ग्लोबल इन्वेस्टमेंट के तरीके बदल रहे हैं। लेकिन इस AI बूम का फायदा उठाने में भारत पिछड़ता नजर आ रहा है। जहां एक तरफ ताइवान और साउथ कोरिया AI से जुड़े स्टॉक्स में रॉकेट की तरह ऊपर जा रहे हैं, वहीं भारत के मेन स्टॉक इंडेक्स इस साल गिरते हुए दिख रहे हैं। ऐसा एक दशक में पहली बार हो रहा है। ये सिर्फ ऊंची वैल्यूएशन या धीमी अर्निंग्स का मामला नहीं है, बल्कि ये इस बात की गहरी चिंता दिखाता है कि नई ग्लोबल टेक वैल्यू चेन में भारत की जगह क्या होगी?

AI से जुड़ी चिप मैन्युफैक्चरिंग, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और AI मॉडल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में ग्लोबल कैपिटल तेजी से घूम रहा है। भारत की बड़ी कंपनियां सीधे तौर पर इन क्षेत्रों से नहीं जुड़ पा रही हैं। नतीजा ये हुआ कि Nifty 50, जो भारत का बेंचमार्क इंडेक्स है, इस साल अब तक 9% से ज्यादा गिर चुका है। सितंबर 2024 के अपने टॉप लेवल से मार्केट का वैल्यू $924 बिलियन तक कम हो गया है।

विदेशी निवेशकों (Foreign Investors) ने तो जैसे भारत से निकलने की ठान ली है। 2024 की शुरुआत से अब तक वे $42 बिलियन से ज्यादा पैसा निकाल चुके हैं। फॉरेन कैपिटल का मालिकाना हक इंडियन स्टॉक्स में 14 साल के सबसे निचले स्तर पर है। हैरानी की बात तो ये है कि दो दशक से भी ज्यादा समय में पहली बार डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशंस (Domestic Institutions) के पास फॉरेन इन्वेस्टर्स से ज्यादा शेयर हैं। MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में भारत का वेटेज भी पिछले साल के 19% से घटकर करीब 12% रह गया है, जिसका दो-तिहाई हिस्सा AI पोजिशनिंग की वजह से हुआ है।

भारत की ताकत माने जाने वाले IT सर्विसेज सेक्टर का प्रदर्शन बेहद खराब है। Nifty IT Index इस साल 26% से ज्यादा टूट चुका है। Infosys और Tata Consultancy Services जैसी बड़ी कंपनियां जेनरेटिव AI (Generative AI) के कारण कोडिंग, टेस्टिंग और बैक-ऑफिस जैसे कामों के ऑटोमेट होने के खतरे का सामना कर रही हैं। IT सेक्टर अब लेबर-बेस्ड मॉडल से हटकर आउटकम-बेस्ड मॉडल की ओर बढ़ रहा है। AI के आने से सीधे तौर पर प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ रहा है। इस वजह से पिछले साल भारत के टेक सेक्टर में करीब 40,000 लोगों की छंटनी (Layoffs) हुई है। ये किसी साइक्लिकल डाउनटर्न (Cyclical Downturn) का नहीं, बल्कि एक स्ट्रक्चरल करेक्शन (Structural Correction) का संकेत है।

विदेशी निवेशक इस वक्त नॉर्थ एशिया के बाजारों, खासकर ताइवान और साउथ कोरिया पर मेहरबान हैं। AI-पावर्ड स्टॉक्स में जबरदस्त रैली देखने को मिली है। साउथ कोरिया का स्टॉक मार्केट वैल्यू पिछले एक साल में करीब तीन गुना होकर अप्रैल 2026 तक $4.1 ट्रिलियन से ऊपर निकल गया है। ऐसा AI के लिए जरूरी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में उसकी धाक के चलते हुआ है। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) का कहना है कि भले ही भारत से फॉरेन सेलिंग थोड़ी धीमी हुई हो, लेकिन कमजोर अर्निंग्स के आउटलुक और नॉर्थ एशियन मार्केट्स की तुलना में कम आकर्षक वैल्यूएशन के कारण निवेशक शायद दोबारा पैसा लगाने में देर करें।

कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि मार्केट का फोकस अब सिर्फ ग्रोथ स्टोरी से हटकर 'टर्मिनल वैल्यू' पर आ गया है। ऐसे में इन्वेस्टर्स AI-ऑटोमेशन की दुनिया में भारत के बड़े IT Service प्रोवाइडर्स की लॉन्ग-टर्म प्रासंगिकता और प्रॉफिटेबिलिटी पर सवाल उठा रहे हैं। ये कंपनियां क्लाइंट सर्विसेज पर ज्यादा निर्भर हैं, जो ऑटोमेशन और कम प्रॉफिट के दायरे में आ रही हैं। साउथ कोरिया के विपरीत, जहां सीधे AI हार्डवेयर सप्लाई चेन में भागीदारी है, वहीं भारत के IT सेक्टर को अपनी आउटसोर्सिंग मॉडल के लिए सीधी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

इन सेक्टर-स्पेसिफिक मुश्किलों के अलावा, भारत पर बाहरी आर्थिक दबाव भी बढ़ रहे हैं। बढ़ती तेल की कीमतें महंगाई के खतरे को बढ़ा रही हैं और रुपये को कमजोर कर रही हैं, जिससे फॉरेन इन्वेस्टमेंट और हतोत्साहित हो रहा है। IMF का अनुमान है कि भारत की GDP ग्रोथ 2027 और 2028 में घटकर 6.5% रह सकती है, जो हाल के सालों से काफी कम है। 2027 के लिए Nifty 50 कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ का अनुमान भी साल की शुरुआत से आधा कर दिया गया है।

हालांकि चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन अडानी ग्रुप का डेटा सेंटर्स में जाना और सरकार का AI स्किल्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस, इन बदलावों को अपनाने की कोशिशें दर्शाता है। लेकिन, भारत में AI को बड़े पैमाने पर अपनाना अभी शुरुआती पायलेट स्टेज में है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.