Nomura के एशिया-पैसिफिक स्ट्रेटेजिस्ट Chetan Seth ने भारतीय इक्विटीज़ (Equities) पर अपना रुख न्यूट्रल (Neutral) कर दिया है। अब उनका अनुमान है कि भारत का शेयर बाज़ार, दूसरे एशियाई बाज़ारों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करने के बजाय, उनके साथ ही चलेगा।
Seth ने भारत के बाज़ार को प्रभावित करने वाले दो अहम ग्लोबल फैक्टर बताए हैं: एक तो क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतें, जो जियोपॉलिटिकल यानी भू-राजनीतिक घटनाओं से जुड़ी हैं, और दूसरा है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टेक्नोलॉजी साइकिल।
उनका कहना है कि भले ही भू-राजनीतिक तनाव कम होने से एशियाई शेयर बाज़ार में तेज़ी आ सकती है, लेकिन भारत के इस तेज़ी में आगे रहने की उम्मीद तभी है जब एनर्जी मार्केट (Energy Market) के साथ-साथ AI टेक सेक्टर भी एक साथ आगे बढ़े।
एशिया में ज़्यादा मजबूत दांव
इसके विपरीत, Seth दक्षिण कोरिया (South Korea) और ताइवान (Taiwan) जैसे बाज़ारों में ज़्यादा दमखम देख रहे हैं। दक्षिण कोरिया के लिए, 150% तक के शानदार अर्निंग ग्रोथ (Earnings Growth) के अनुमान इसे आकर्षक बना रहे हैं। Samsung Electronics जैसी कंपनियों के हालिया नतीजे उम्मीदों से बेहतर रहे हैं, और 7-8 गुना अर्निंग्स पर इनका वैल्यूएशन (Valuation) भी किफायती लग रहा है।
Seth ने यह भी बताया कि ताइवान तो AI थीम से और भी ज़्यादा जुड़ा हुआ है, जहाँ मार्केट का 80-85% हिस्सा टेक्नोलॉजी से जुड़ा है।
निवेशक फ्लोज़ और रुपया
Seth ने भारत से विदेशी निवेशकों (Foreign Investors) द्वारा इस साल अब तक $16-17 बिलियन की भारी निकासी (Outflow) पर भी बात की। उनका मानना है कि अगर ग्लोबल स्थिरता लौटती है और निवेशकों का सेंटिमेंट (Sentiment) सुधरता है, तो ये फ्लोज़ (Flows) वापस आ सकते हैं, क्योंकि इमर्जिंग मार्केट्स (Emerging Markets) में निवेश के लिए काफी पैसा तैयार बैठा है।
हालांकि, भारतीय रुपये (Indian Rupee) की स्थिरता भी अहम है, क्योंकि लगातार आउटफ्लो (Outflow) के दौरान इसे अक्सर दबाव का सामना करना पड़ता है।