India Repo Rate: महंगाई और कमजोर रुपये का डबल अटैक! RBI बढ़ा सकता है ब्याज दरें?

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India Repo Rate: महंगाई और कमजोर रुपये का डबल अटैक! RBI बढ़ा सकता है ब्याज दरें?
Overview

Standard Chartered की नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में रेपो रेट (Repo Rate) जून से बढ़कर **5.75%** तक जा सकता है। यह **5.25%** के पिछले अनुमान से ज़्यादा है। बढ़ती महंगाई, कमजोर होता रुपया और ग्लोबल दबाव इसके मुख्य कारण हैं।

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महंगाई के बोझ तले भारतीय अर्थव्यवस्था

Standard Chartered ने भारत की मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) को लेकर अपना अनुमान बदल दिया है। बैंक अब वित्तीय वर्ष 2027 तक रेपो रेट (Repo Rate) में 50 बेसिस पॉइंट यानी 0.50% की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा है, जिससे यह 5.75% तक पहुँच सकता है। पहले यह अनुमान 5.25% था। इस बड़े बदलाव का मुख्य कारण बढ़ती महंगाई है। बैंक ने वित्तीय वर्ष 2027 के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) का अनुमान भी 4.7% से बढ़ाकर 4.9% कर दिया है। वहीं, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का अनुमान 4.7% से बढ़कर 8.1% हो गया है। ऐसे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के लिए महंगाई पर काबू पाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

रुपये की कमजोरी और ग्लोबल फैक्टर्स बढ़ा रहे रेपो रेट की उम्मीद

भारतीय रुपये का अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होना भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की ओर इशारा कर रहा है। रुपया 96.80 के स्तर पर आ गया है, जबकि पहले जून के अंत तक इसके 93 पर रहने का अनुमान था। हालांकि RBI मुख्य रूप से घरेलू महंगाई और ग्रोथ पर ध्यान देता है, लेकिन कमजोर रुपया अप्रत्यक्ष रूप से CPI को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट्स में बढ़ती ब्याज दरें और एशिया के दूसरे देशों के सेंट्रल बैंकों द्वारा रेट हाइक के फैसले को देखते हुए, MPC जून की मीटिंग से ही दरें बढ़ाना शुरू कर सकती है। Standard Chartered का अनुमान है कि अगले चार तिमाहियों में CPI 4.7% से बढ़कर 5.1% हो सकती है, जो पिछले साल के 2.1% से काफी ज़्यादा है। भले ही महंगाई RBI के 2-6% के टारगेट बैंड में रहे, फिर भी लगातार बढ़ते महंगाई के खतरे को देखते हुए नीतिगत फैसले लेने पड़ सकते हैं। उम्मीद है कि 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी जून और अगस्त में हो सकती है।

भू-राजनीतिक जोखिम और कमोडिटी की कीमतें भी चिंता का सबब

Standard Chartered का मानना ​​है कि अगर कमोडिटी की कीमतें (Commodity Prices) और भारतीय रुपया (Indian Rupee) कमजोर होते रहे, तो ब्याज दरों में 25 से 50 बेसिस पॉइंट तक की और बढ़ोतरी संभव है। जून में रेट हाइक को रोकने का फैसला, अगर बाहरी सेक्टर को सपोर्ट नहीं करता है, तो CPI पर नकारात्मक असर डाल सकता है। बैंक अब वित्तीय वर्ष 2027 के लिए कच्चे तेल (Crude Oil) की औसत कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाकर 95 डॉलर प्रति बैरल कर रहा है। वहीं, Crisil Intelligence ने भी Brent क्रूड ऑयल का अनुमान 82-87 डॉलर से बढ़ाकर 90-95 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष (West Asia conflict) ऊर्जा सेक्टर के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। इस भू-राजनीतिक स्थिति के कारण, वित्तीय वर्ष 2027 में भारत की GDP ग्रोथ घटकर 6.6% रह सकती है और कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन (CPI) बढ़कर औसतन 5.1% हो सकती है।

अलग-अलग राय और स्टैगफ्लेशन का डर

जहां Standard Chartered रेपो रेट में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा है, वहीं India Ratings and Research का अनुमान है कि RBI वित्तीय वर्ष 2027 तक रेपो रेट को 5.25% पर ही स्थिर रखेगा। उनका मानना ​​है कि महंगाई RBI के टारगेट रेंज में ही रहेगी। यह एजेंसी वित्तीय वर्ष 2027 के लिए GDP ग्रोथ 6.7% और रिटेल महंगाई 4.4% रहने का अनुमान लगा रही है। हालांकि, स्टैगफ्लेशन (Stagflation) यानी महंगाई के साथ आर्थिक सुस्ती की चिंताएं बढ़ रही हैं। अप्रैल 2026 में होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) आधारित महंगाई 8.3% पर पहुंच गई थी, जो पिछले 42 महीनों का सबसे उच्चतम स्तर है। Systematix Institutional Research का मानना ​​है कि वित्तीय वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में CPI महंगाई बढ़कर 6-7% हो सकती है, जिससे GDP ग्रोथ RBI के अनुमान 6.9% से भी नीचे जा सकती है। 10.4% GDP के अनुमानित ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) और कमजोर होते रुपये का बढ़ना RBI के लिए पॉलिसी निर्णय लेना और भी जटिल बना रहा है।

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