Indian Stock Market: युद्ध का गहराया साया, शेयर बाज़ार धड़ाम! रुपया रिकॉर्ड लो पर, RBI के माथे पर चिंता

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Stock Market: युद्ध का गहराया साया, शेयर बाज़ार धड़ाम! रुपया रिकॉर्ड लो पर, RBI के माथे पर चिंता
Overview

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के माहौल के बीच, भारतीय शेयर बाज़ारों में आज भारी गिरावट दर्ज की गई। **23 मार्च 2026** को BSE Sensex **2.5%** टूटकर **72,688.89** अंक पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 भी **2.6%** की गिरावट के साथ **22,516.85** अंक पर आ गया। इस बिकवाली ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है, क्योंकि फरवरी के अंत से बाज़ार में अब तक करीब **11%** की गिरावट आ चुकी है।

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युद्ध का सीधा असर: रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर

बाज़ार में आई इस घबराहट की मुख्य वजह युद्ध का बढ़ना और लगातार बढ़ती कमोडिटी की कीमतें हैं। इन वैश्विक झटकों का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता और निवेशकों के भरोसे पर पड़ रहा है। भारत की आयात पर निर्भरता, खासकर तेल के लिए, इसे ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतों और बढ़ती महंगाई के प्रति और भी संवेदनशील बनाती है।

डॉलर के मुकाबले रुपया पस्त, तेल $110 के पार

शेयर बाज़ारों में भारी बिकवाली के साथ ही भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले एक नए ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। आज यह 94 का स्तर पार कर गया, जो देश से पैसा बाहर जाने के डर को दर्शाता है। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें भी $110 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। यह लगातार बढ़ रही महंगाई को और बढ़ावा दे रहा है और RBI के लिए ब्याज दरों पर फैसले लेना मुश्किल बना रहा है। एशियाई बाज़ार भी इस मंदी के असर से अछूते नहीं रहे, जापान का Topix 3.5% और शंघाई कंपोजिट 2.5% तक गिर गए।

क्यों बढ़ीं मुश्किलें: महंगाई, पूंजी पलायन और दरें बढ़ने का डर

क्रूड ऑयल की कीमतों में यह उछाल, जो कि इस लंबे युद्ध का सीधा नतीजा है, भारत जैसी बड़ी एनर्जी इम्पोर्टर कंट्री के लिए महंगाई का एक बड़ा इनपुट है। इस बढ़ती महंगाई के कारण Reserve Bank of India (RBI) को उम्मीद के मुताबिक ब्याज दरों में कटौती को टालना पड़ सकता है। RBI अब करेंसी को बचाने और बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए सख़्त मौद्रिक नीति अपना सकता है।

रुपये में तेजी से आई गिरावट, जो पिछले महीने 3.33% और पिछले साल 9.86% गिरी है, इम्पोर्टेड महंगाई को बढ़ा रही है और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को भारत से पैसा निकालने के लिए मजबूर कर रही है। मार्च महीने में FIIs ने बाज़ार से करीब $9.57 बिलियन निकाले हैं, जो अक्टूबर 2024 के बाद सबसे बड़ा आउटफ्लो है। इस महीने इक्विटी से $8 बिलियन के करीब पैसा निकल चुका है। यह दिखाता है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता के साथ करेंसी का जोखिम भारतीय एसेट्स को कम आकर्षक बना रहा है।

सेक्टर पर असर: तेल को फायदा, IT पर दबाव?

ONGC जैसी सरकारी तेल उत्पादक कंपनियों को भले ही ऊंचे क्रूड प्राइस से फायदा हो, लेकिन उनके मूल्यांकन पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, IT सेक्टर की बात करें तो HCL Technologies का P/E रेशियो 21.98x और Tech Mahindra का 26.59x है, जो Infosys (17.6x) और TCS (18.7x) जैसे दिग्गजों के मुकाबले ज़्यादा है। IT सेक्टर, जिसमें फरवरी 2026 में 19.54% की बड़ी गिरावट आई थी, इन ऊंचे वैल्युएशन्स के कारण और ज़्यादा संवेदनशील लग रहा है।

अगले खतरे: इम्पोर्ट, मार्जिन और RBI का बैलेंस

इस लगातार भू-राजनीतिक संघर्ष और इसके आर्थिक असर से कई जोखिम पैदा हो रहे हैं। रुपये का तेज़ी से गिरना, जो अब 93.74 प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा है, तेल और कच्चे माल जैसे ज़रूरी इम्पोर्ट की लागत को काफी बढ़ा रहा है। इससे कंपनियों के मुनाफे (Profits) पर दबाव पड़ रहा है और यह सरकारी राहत उपायों को भी कमजोर कर सकता है। इतिहास गवाह है कि रुपये में बड़ी गिरावट (जैसे 2013 और 2018 में) के दौर में पूंजी का पलायन और आर्थिक तनाव देखा गया है। RBI ने करीब $100 बिलियन की फॉरवर्ड डॉलर सेल करके इस करेंसी दबाव की गंभीरता को दिखाया है। यदि तेल की कीमतों के झटके से महंगाई और बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में कटौती में देरी या उसे उलटना पड़ सकता है, जिससे निवेशक का भरोसा और कम हो सकता है।

आगे क्या? अस्थिरता जारी रहने की उम्मीद

मध्य पूर्व में स्थिति के सामान्य होने और तेल की कीमतों में स्थिरता आने तक भारतीय बाज़ारों के लिए नज़दीकी भविष्य चुनौतीपूर्ण रहने की उम्मीद है। किसी भी और तनाव से रुपये की गिरावट और महंगाई बढ़ सकती है, जिससे RBI को ग्रोथ को बढ़ावा देने के बजाय स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करना पड़ेगा। एनालिस्ट्स का मानना है कि निवेशक इन भू-राजनीतिक जोखिमों, संभावित ब्याज दर नीति बदलावों और विदेशी निवेशकों की पोजीशन एडजस्टमेंट को देखते हुए बाज़ारों में अस्थिरता जारी रहने की उम्मीद कर रहे हैं। Sensex अगले 12 महीनों में 68,659.77 के आसपास रह सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.