Indian Market Tumble: ईरान-इजराइल तनाव बढ़ा, कच्चा तेल ₹82 के पार, शेयर बाजार में भारी गिरावट!

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Market Tumble: ईरान-इजराइल तनाव बढ़ा, कच्चा तेल ₹82 के पार, शेयर बाजार में भारी गिरावट!
Overview

West Asia में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। भू-राजनीतिक जोखिमों के चलते शुक्रवार, 28 फरवरी 2026 को Sensex और Nifty **1%** से अधिक गिरकर धड़ाम हो गए। कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया और भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

The Core Catalyst: भू-राजनीतिक झटकों से हिला बाजार

शुक्रवार, 28 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। West Asia में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव को इस गिरावट का मुख्य कारण माना जा रहा है। भू-राजनीतिक जोखिमों के बढ़ने से निवेशकों में घबराहट फैल गई। BSE Sensex 961.42 अंक की भारी गिरावट के साथ 81,287.19 पर बंद हुआ, जबकि NSE Nifty 317.90 अंक लुढ़ककर 25,178.65 पर आ गया। यह बिकवाली सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, मिड और स्मॉल-कैप सेगमेंट भी प्रभावित हुए। इसी बीच, बाजार की घबराहट मापने वाला India VIX करीब 4.92% उछलकर 13.70 पर पहुंच गया, और भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.75 के स्तर के करीब कमजोर हो गया।

The Analytical Deep Dive: तेल पर निर्भरता और इसका असर

भारत अपनी 85-90% कच्चे तेल की जरूरत को आयात के जरिए पूरा करता है, ऐसे में West Asia में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। तनाव बढ़ने के कारण Brent क्रूड ऑयल के दाम $82.37 प्रति बैरल के पार निकल गए, जो कि जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। यह स्थिति भारत के आयात बिल को काफी बढ़ाएगी, देश के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को चौड़ा करेगी और महंगाई को और भड़काएगी। खासकर, तेल और LNG के लिए महत्वपूर्ण ट्रांजिट रूट माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हमलों की आशंकाओं ने चिंता और बढ़ा दी है।

सेक्टर्स पर असर और विश्लेषकों की राय

इस भू-राजनीतिक उठापटक का असर विभिन्न सेक्टर्स पर अलग-अलग देखने को मिला। ONGC जैसी अपस्ट्रीम ऑयल प्रोड्यूसर कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई, क्योंकि उन्हें कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से बेहतर कमाई की उम्मीद है। दूसरी ओर, पेंट उद्योग की कंपनियों जैसे Asian Paints और Berger Paints पर दबाव बढ़ा, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से उनके कच्चे माल की लागत (input costs) बढ़ जाती है। Berger Paints का PE रेश्यो 53.23 था, जो इंडस्ट्री एवरेज 50.9 से थोड़ा ऊपर है। IT सेक्टर, जो पहले से ही AI और ग्लोबल डिमांड में सुस्ती जैसी चिंताओं से जूझ रहा था, पर भी इस अनिश्चितता का असर पड़ा और शेयरों में गिरावट जारी रही। Jefferies जैसे ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि 'Hormuz stress' का असर 7 सेक्टरों पर पड़ सकता है, जिनमें से HAL और BEL ही इसके संभावित लाभार्थी हो सकते हैं, जो बाजार के व्यापक नकारात्मक रुझान को दर्शाता है।

संरचनात्मक कमजोरियां और भविष्य का अनुमान

यह बाजार की गिरावट भारत की कुछ अंदरूनी संरचनात्मक कमजोरियों को भी उजागर करती है। कच्चे तेल के आयात पर भारी निर्भरता और साथ ही रुपये का कमजोर होना, महंगाई को बढ़ावा देने और विदेशी कर्ज के बोझ को बढ़ाने वाला एक खतरनाक कॉम्बिनेशन है। विश्लेषकों का मानना है कि Nifty के लिए 24,600 का स्तर एक अहम सपोर्ट माना जा रहा है। आगे चलकर, शेयर बाजार West Asia से आने वाली खबरों पर बहुत ज्यादा प्रतिक्रिया दिखाएगा। निवेशक कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और ग्लोबल मार्केट के ट्रेंड्स पर बारीकी से नजर रखेंगे। जब तक कोई बड़ी सकारात्मक खबर नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेशकों का सतर्क रुख जारी रहने की उम्मीद है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.