वैश्विक तनाव का बाज़ारों पर असर
वैश्विक बाज़ारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। मध्य पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ईरान से जुड़े अमेरिका-इज़राइल संघर्ष, ने वैश्विक वित्तीय बाज़ारों में बड़ी अनिश्चितता पैदा कर दी है।
घरेलू खरीदार हुए सक्रिय
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) की ओर से लगातार बिकवाली जारी है। 4 मार्च 2026 को FIIs ने लगभग ₹8,700 करोड़ के शेयर बेचे। लेकिन, डोमेस्टिक इंस्टीटूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने ₹12,000 करोड़ से ज़्यादा की नेट खरीदारी करके बड़ा सहारा दिया। फरवरी 2026 से ही DIIs विदेशी बिकवाली को सोख रहे हैं, जिससे बाज़ार को गिरने से बचाने में मदद मिली है।
कमोडिटी की चाल और बाज़ार पर असर
ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent crude oil) की कीमतें 11 मार्च 2026 को लगभग $83.90-$87.32 प्रति बैरल के आसपास रहीं। पहले की तेज़ उछाल से कीमतें थोड़ी घटीं, जिससे महंगाई की चिंता कम हुई। सोना (Gold) की कीमतें $5,204.13 प्रति औंस के आसपास बनी रहीं, जो सेफ-हेवन डिमांड को दिखा रहा है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) द्वारा रिकॉर्ड तेल भंडार जारी करने के प्रस्ताव से क्रूड की कीमतों में गिरावट आई।
बाज़ार का मूल्यांकन और लचीलापन
दुनिया भर की चिंताओं के बावजूद, भारतीय शेयर बाज़ार अन्य उभरते बाज़ारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। भारत की इकोनॉमी के FY26 में 7.6% की दर से बढ़ने का अनुमान है। मार्च 2026 की शुरुआत तक, Nifty 50 का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो 21.02 से 21.60 के बीच है। यह बताता है कि बाज़ार उचित मूल्य पर या थोड़ा महंगा है, जो MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स की तुलना में 10 साल के औसत के करीब है।
प्रमुख सेक्टर्स में दिखी मज़बूती
कुछ खास सेक्टर्स में मज़बूती देखी गई है। फार्मा, डिफेंस, पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (PSUs), और ऑटोमोबाइल व टेलीकॉम जैसे डोमेस्टिक कंजम्पशन वाले स्टॉक्स में लचीलापन देखा गया है। IT और फार्मा सेक्टर, जिन्हें डिफेन्सिव माना जाता है, 9 मार्च को मामूली गिरे लेकिन फिर भी स्थिर रहे।
आगे के संभावित जोखिम
FIIs की लगातार बिकवाली एक बड़ा जोखिम बनी हुई है, जो वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से और बढ़ सकती है। भू-राजनीतिक कारणों से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेज़ी भारत की इंपोर्ट-डिपेंडेंट इकोनॉमी के लिए खतरा है। इससे करेंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) और रुपये में गिरावट का जोखिम बढ़ सकता है। ग्लोबल स्टैगफ्लेशन (Global stagflation) भी एक चिंता है, जो भारतीय एक्सपोर्ट्स की मांग को कम कर सकती है।
आगे का नज़रिया और विश्लेषकों की राय
बाज़ार की रिकवरी इस बात पर निर्भर करेगी कि मध्य पूर्व के तनाव में कमी आए और वैश्विक इकोनॉमी महंगाई और ब्याज दर के दबाव से कैसे निपटती है। SEBI चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने निवेशकों को शांत रहने की सलाह दी है, और भारत के डोमेस्टिक इकोनॉमिक फंडामेंटल्स की मज़बूती पर ज़ोर दिया है। एनालिस्ट्स घरेलू खपत, कॉर्पोरेट अर्निंग्स में रिकवरी और सरकारी नीतियों को बाज़ार के लिए मुख्य सहारा मान रहे हैं।