Indian Markets: भू-राजनीतिक तनाव के बीच 'दम' की परीक्षा, क्या बाजार संभालेगा?

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Markets: भू-राजनीतिक तनाव के बीच 'दम' की परीक्षा, क्या बाजार संभालेगा?
Overview

Indian Markets के लिए नौ महीने का कंसॉलिडेशन (Consolidation) पीरियड शायद खत्म होने वाला है, क्योंकि बाजार में तेजी के संकेत दिख रहे हैं। मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों और इंडिया-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-EU Free Trade Agreement) ने इस उम्मीद को जगाया है। लेकिन, भू-राजनीतिक तनावों और ब्याज दरों की चिंताओं के चलते **19 फरवरी 2026** को बाजार में एक झटका लगा, जिसने खासतौर पर ऊंचे वैल्यूएशन (Valuation) वाले मिड और स्मॉल-कैप शेयरों के लिए जोखिम बढ़ा दिया है।

बाजार को क्या मिला बूस्ट?

PL Capital ने अगले 12 महीनों के लिए Nifty इंडेक्स का बेस केस टारगेट 27,958 अंक तय किया है। इस उम्मीद को बढ़ाने में अहम कारक हैं - मजबूत कॉर्पोरेट परफॉर्मेंस और तेजी से आगे बढ़ रही ट्रेड डिप्लोमेसी, खासकर इंडिया-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-EU Free Trade Agreement)। इससे टेक्सटाइल, मरीन प्रोडक्ट्स, लेदर, जेम्स, ज्वैलरी, केमिकल, मशीनरी और इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट जैसे सेक्टर्स को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। सर्विस सेक्टर जैसे IT, फाइनेंशियल सर्विसेज, टेलीकॉम, एजुकेशन और डिजिटल ट्रेड को भी लाभ मिलेगा।

PL Capital ने बैंक्स, डाइवर्सिफाइड फाइनेंशियल, हेल्थकेयर, कंज्यूमर, ऑटो और कैपिटल गुड्स/डिफेंस सेक्टर्स पर अपना 'ओवरवेट' (Overweight) का रुख बरकरार रखा है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार खर्च और एसेट क्रिएशन से यह चालें बुनी जा रही हैं। खास तौर पर बैंकिंग सेक्टर में FY27-28 तक 17% की अर्निंग ग्रोथ का अनुमान है, क्योंकि लोन ग्रोथ अच्छी है और एसेट क्वालिटी स्थिर बनी हुई है। हाल ही में Nifty PSU Bank इंडेक्स में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई है।

बाजार में आई क्यों हलचल?

हालांकि, इस उम्मीद भरी तस्वीर पर हालिया बाजार की हलचल ने चिंता के बादल ला दिए हैं। 19 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजारों में तेज गिरावट देखी गई, जिसमें Nifty 50 और BSE Sensex करीब 1.5% तक लुढ़क गए। इस बिकवाली का मुख्य कारण बढ़ रहे भू-राजनीतिक तनाव और ऊंची बनी रहने वाली अमेरिकी ब्याज दरों की चिंताएं थीं। इसका असर खासतौर पर मिड और स्मॉल-कैप शेयरों पर पड़ा, जो इस समय ऐतिहासिक रूप से ऊंचे P/E Ratio (Smallcap 100 पर 30.7x, Midcap 100 पर 33.45x) पर ट्रेड कर रहे हैं और बाहरी झटकों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) का उस दिन नेट सेलर बनना भी इस कमजोरी को बढ़ाने वाला एक फैक्टर रहा।

खास सेक्टर और वैल्यूएशन पर नजर

सेक्टर-विशिष्ट विश्लेषण की बात करें तो, कैपिटल गुड्स और डिफेंस में PL Capital का पसंदीदा शेयर Hindustan Aeronautics Ltd (HAL) का P/E Ratio 31.1x से 44.0x के बीच चल रहा है, जो इसके ऐतिहासिक औसत 16.78x से काफी ऊपर है। कई विश्लेषकों का मानना है कि HAL का P/E Ratio इसे महंगा साबित कर रहा है। इसी तरह, Adani Ports & Special Economic Zone Ltd, जो एक टॉप पिक रहा है, MarketsMojo द्वारा 'बहुत महंगा' (Very Expensive) वैल्यूएशन ग्रेड का सामना कर रहा है, भले ही कुछ एनालिस्ट्स की 'बाय' (Buy) रेटिंग अभी भी बनी हुई है।

ऑटो सेक्टर में FY27 में 3-6% की मॉडरेट वॉल्यूम ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन कमोडिटी की ऊंची कीमतों के कारण ऑटो एंसिलरीज (Ancillaries) के मार्जिन पर दबाव आ सकता है। सीमेंट सेक्टर में सरकारी खर्च से डिमांड बढ़ सकती है, लेकिन रियल एस्टेट की सुस्ती और इनपुट लागतों में वृद्धि एक चुनौती बनी हुई है।

बैंकिंग सेक्टर में, प्राइवेट बैंक अपने बेहतर ऑपरेशनल मेट्रिक्स के लिए पसंद किए जा रहे हैं, लेकिन क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो का 82% के करीब पहुंचना, जो रिकॉर्ड स्तर के नजदीक है, जमाओं (Deposits) के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा और मार्जिन पर संभावित दबाव का संकेत देता है। ICICI Bank को MarketsMojo ने 'होल्ड' (Hold) रेटिंग दी है, वहीं 40 एनालिस्ट्स की 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) रेटिंग और 1,708.88 का एवरेज टारगेट प्राइस इसके संभावित अपसाइड की ओर इशारा करता है।

आगे की राह

इन सब अल्पकालिक उतार-चढ़ावों के बावजूद, PL Capital का Nifty के लिए 27,958 का बेस केस टारगेट एक सकारात्मक मीडियम-टर्म आउटलुक का संकेत देता है। यह तभी संभव है जब इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बना रहे और ट्रेड एग्रीमेंट्स का सकारात्मक असर जारी रहे। एनालिस्ट्स का सेंटिमेंट सतर्क रूप से आशावादी है, जिनका ध्यान उन सेक्टर्स पर है जिन्हें डोमेस्टिक डिमांड और सरकारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) से सीधा फायदा होगा। हालांकि, निवेशकों को इस माहौल में समझदारी से शेयर चुनने होंगे। ऐसी कंपनियों को प्राथमिकता देनी चाहिए जिनके फंडामेंटल्स मजबूत हों, वैल्यूएशन मैनेजेबल हों और जो सेक्टर-विशिष्ट चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हों।

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