बाज़ार में क्यों आई इतनी तेज़ी?
बुधवार को भारतीय शेयर बाज़ार Sensex और Nifty 50 की शुरुआत धमाकेदार तेज़ी के साथ हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इस बयान के बाद बाज़ार में जोश दिखा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति हो रही है और तनाव कम हो सकता है। इससे ग्लोबल बाज़ारों में भी तेजी आई, जापान का Nikkei 225, दक्षिण कोरिया का Kospi और ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 जैसे प्रमुख इंडेक्स 2% से ज़्यादा चढ़े।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई। WTI क्रूड फ्यूचर $87-$88 प्रति बैरल के आसपास आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड $98-$99 प्रति बैरल के नीचे चला गया। तेल की कीमतों में इस नरमी से भारत के लिए इंपोर्ट बिल कम होने और कंपनियों की लागत में कमी आने की उम्मीद जगी, जो पहले बाज़ार पर भारी पड़ रही थी।
वोलैटिलिटी (Volatility) पर नज़र
शुरुआती तेज़ी के बावजूद, बाज़ार में वोलैटिलिटी (अस्थिरता) अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। इंडिया VIX (India VIX), जो बाज़ार की अनुमानित चाल का सूचक है, 25 के पार बना हुआ है। यह अनिश्चितता का संकेत देता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाज़ार में टिकाऊ मजबूती के लिए VIX का नीचे आना ज़रूरी है। जब तक ऐसा नहीं होता, ऑप्शन प्रीमियम ऊंचे बने रहेंगे, जो ऑप्शन बेचने वालों के लिए चुनौती होगी।
FIIs की लगातार बिकवाली चिंता का सबब
बाज़ार के लिए एक बड़ी चिंता का विषय विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली रही। मंगलवार को FIIs ने भारतीय इक्विटी बाज़ारों में करीब ₹8,009.56 करोड़ के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹5,867.15 करोड़ की खरीदारी करके बाज़ार को सहारा दिया। FIIs की यह बिकवाली ग्लोबल अनिश्चितता या करेंसी में उतार-चढ़ाव के कारण हो सकती है और यह बाज़ार पर दबाव बनाए हुए है।
ईरान का बयान और अनिश्चितता
ट्रम्प के दावों के बावजूद, ईरान के सरकारी सूत्रों ने सीधे अमेरिका के साथ बातचीत की खबरों का साफ तौर पर खंडन किया है। इस कूटनीतिक टकराव से बाज़ार में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या तनाव कम होने की बात केवल शुरुआती उम्मीदें थीं।
विश्लेषकों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव में नरमी के संकेत से सेंटीमेंट को बढ़ावा मिला है, लेकिन असली राहत आगे के घटनाक्रमों और आधिकारिक बयानों पर निर्भर करेगी। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका के अनुसार, बाज़ार में किसी भी टिकाऊ तेजी के लिए तनाव का वास्तविक रूप से कम होना और विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी आना ज़रूरी है।