वैश्विक चिंताएं बनीं बिकवाली की वजह
मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाज़ार की शुरुआत काफी भारी रही। BSE Sensex 525.29 अंक गिरकर 82,769.37 के स्तर पर आ गया, वहीं Nifty 50 इंडेक्स भी 145.85 अंक की गिरावट के साथ 25,567.15 पर पहुँच गया। यह गिरावट एशियाई बाज़ारों की कमजोरी को भी दर्शा रही थी, जहाँ MSCI Asia Pacific Index 0.2% नीचे था। इस बड़ी बिकवाली की मुख्य वजह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए जाने वाले संभावित नए टैरिफ (Tariff) की धमकियां हैं, जिनसे वैश्विक व्यापार को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने भी बाज़ार के सेंटीमेंट को और ख़राब किया।
AI का डर और IT स्टॉक्स पर मार
बाज़ार में आज इंट्रा-डे (Intraday) गिरावट की एक और बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता प्रभाव रही। ऐसी खबरें सामने आईं कि AI टूल्स पुराने सिस्टम, जैसे COBOL, को आधुनिक बना सकते हैं, जिससे ट्रेडिशनल IT सर्विसेज फर्म्स के लिए बड़े खतरे की आशंका बढ़ गई। इस चिंता के चलते भारतीय IT स्टॉक्स में भारी बिकवाली देखी गई। Infosys, TCS, HCL Technologies और Tech Mahindra जैसे दिग्गज शेयर लगभग 3% तक गिर गए, जिससे Sensex पर दबाव और बढ़ा। पिछली रात वॉल स्ट्रीट (Wall Street) पर भी टेक सेक्टर में गिरावट का असर भारतीय बाज़ारों पर साफ दिखा।
घरेलू अर्थव्यवस्था vs. वैश्विक झटके
हालांकि, भारत का घरेलू आर्थिक परिदृश्य काफी मजबूत दिख रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में भारत की GDP ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान है और इसी फाइनेंशियल ईयर में महंगाई दर भी 2.1% पर स्थिर रहने की उम्मीद है। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी भी न्यूट्रल बनी हुई है, जहाँ रेपो रेट 5.25% पर स्थिर है। लेकिन, बाज़ार की यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि यह ग्लोबल झटकों के प्रति कितना संवेदनशील है। 23 फरवरी 2026 तक Sensex का P/E रेश्यो लगभग 22.740 था, जबकि जनवरी 2026 में MSCI India Index का PE रेश्यो करीब 25.24 था। ये वैल्यूएशन (Valuation) इतने ज़्यादा नहीं हैं कि ग्लोबल निगेटिव फैक्टर्स के सामने बचाव दे सकें, जिससे बाज़ार में अचानक गिरावट की आशंका बनी रहती है।
बाज़ार की गिरावटों का ऐतिहासिक नज़रिया
ऐतिहासिक रूप से देखें तो शेयर बाज़ारों में इस तरह की बड़ी गिरावटें नई नहीं हैं। पिछले डेटा बताते हैं कि 30-60% तक की मार्केट क्रैश (Crash) हर 7-10 साल में लगभग एक बार होती है, जिसके बाद बाज़ार में रिकवरी भी आती है, भले ही इसमें अलग-अलग समय लग सकता है। उदाहरण के लिए, 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के दौरान Sensex में 61% की गिरावट आई थी, जिसे ठीक होने में दो साल लगे। वहीं, 2020 के COVID क्रैश में 38% की गिरावट के बाद आठ महीनों में रिकवरी आ गई थी। आज की गिरावट भी इसी पैटर्न का हिस्सा हो सकती है, लेकिन इसके पीछे के कारण जटिल और वैश्विक रूप से जुड़े हुए हैं।
मौजूदा जोखिम और आगे की राह
फिलहाल की गिरावट कुछ गहरी चिंताओं को उजागर करती है। वैश्विक टैरिफ (Tariff) को लेकर बनी अनिश्चितता भारत के एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स और कंपनियों की कमाई पर असर डाल सकती है। AI टेक्नोलॉजी का तेज़ी से विकास ट्रेडिशनल IT सर्विस प्रोवाइडर्स के रेवेन्यू मॉडल के लिए एक बड़ा खतरा है, जिन्हें तेज़ी से बदलते माहौल के साथ तालमेल बिठाने में मुश्किल आ सकती है। इससे कंपनियों के मार्जिन (Margin) पर दबाव आ सकता है और ग्रोथ धीमी पड़ सकती है। इसके अलावा, हालिया रेगुलेटरी (Regulatory) बदलाव, जैसे कि बैंकों द्वारा गलत तरीके से बेचे जाने वाले उत्पादों पर फाइनेंस मिनिस्टर की टिप्पणी या SEBI द्वारा पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के नियमों में बदलाव, यह संकेत देते हैं कि भविष्य में जांच और कंप्लायंस (Compliance) का बोझ बढ़ सकता है। हालाँकि बैंकिंग सेक्टर की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में सुधार हुआ है, पर डिपॉज़िट (Deposit) के लिए प्रतिस्पर्धा अभी भी बनी हुई है, जो लाभप्रदता पर असर डाल सकती है। ऐतिहासिक डेटा यह भी बताता है कि बेयर मार्केट्स (Bear Markets) लंबी चल सकती हैं, और वर्तमान माहौल, जो टेक्नोलॉजिकल डिसरप्शन (Disruption) और भू-राजनीतिक अस्थिरता से भरा है, एक अनोखी चुनौती पेश करता है।
भविष्य का अनुमान
बाज़ार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाज़ार में उथल-पुथल बनी रह सकती है। कुछ एनालिस्ट्स (Analysts) का कहना है कि बाज़ार एक रेंज में कारोबार कर सकता है, जिसमें घरेलू सेक्टर-स्पेसिफिक (Sector-specific) मोमेंटम सपोर्ट देगा, लेकिन यह मुख्य रूप से ग्लोबल संकेतों से प्रभावित रहेगा। टैरिफ (Tariff) को लेकर चल रहा ड्रामा और AI को अपनाने की रफ़्तार जैसे कारक महत्वपूर्ण रहेंगे। निवेशक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की रणनीतियों पर भी बारीकी से नज़र रखेंगे, क्योंकि हाल ही में कॉर्पोरेट नतीजों के चलते उन्होंने कुछ रुचि दिखाई है। अगर ये बाहरी दबाव और बढ़ता है, तो बाज़ार में और गिरावट की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। Sensex के लिए 82,700-82,500 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल (Support Level) माना जा रहा है।