India Markets Fall: कच्चे तेल का 'बम' और भू-राजनीतिक तनाव ने मचाई खलबली, रुपया भी गिरा

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
India Markets Fall: कच्चे तेल का 'बम' और भू-राजनीतिक तनाव ने मचाई खलबली, रुपया भी गिरा
Overview

आज भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। ईरान और खाड़ी देशों के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें **$103** प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जिसने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया। इसके साथ ही रुपये में भी कमजोरी आई और यह **₹94.10** के स्तर पर पहुंच गया, जिससे विदेशी निवेशकों (FPIs) का पैसा बाजार से बाहर गया। ज्यादातर सेक्टरों में गिरावट रही, लेकिन फार्मा सेक्टर ने अच्छी बढ़त दिखाई।

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कच्चे तेल की आग और बाजार में गिरावट

शुक्रवार को ईरान द्वारा जहाजों को जब्त करने जैसी घटनाओं के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में भू-राजनीतिक तनाव काफी बढ़ गया। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा, Brent Crude $103 प्रति बैरल के ऊपर निकल गया और US Oil भी $95 के करीब पहुंच गया। इस अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान बातचीत में रुकावट के बीच भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए चिंता बढ़ गई।

रुपये का टूटना और विदेशी फंड्स का पलायन

कच्चे तेल के दाम बढ़ने के साथ-साथ भारतीय रुपये में भी गिरावट दर्ज की गई। डॉलर के मुकाबले रुपया ₹94.10 के स्तर पर आ गया, जो इसकी कमजोरी को दर्शाता है। रुपये में इस गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) का पैसा निकालना रहा। अप्रैल के पहले ग्यारह दिनों में ही FPIs ने ₹48,905 करोड़ की बिकवाली की है, वहीं पूरे साल का यह आंकड़ा ₹1.90 लाख करोड़ के पार जा चुका है। यह विदेशी निवेशकों के सतर्क रुख को दिखाता है, जो कहीं-कहीं दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों को अधिक आकर्षक मान रहे हैं। इतिहास गवाह है कि ऐसे भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में उछाल से भारतीय रुपये पर दबाव आता है और बाजार में करेक्शन देखने को मिलता है।

फार्मा सेक्टर में दिखी मजबूती

जहां एक ओर ज्यादातर सेक्टर बिकवाली के दबाव में थे, वहीं फार्मा यानी दवा कंपनियों के शेयरों ने निवेशकों को राहत दी। फार्मा सेक्टर इंडेक्स में 6.83% की शानदार तेजी दर्ज की गई। Cipla और Sun Pharmaceutical Industries जैसी कंपनियों के शेयरों में अच्छी बढ़त देखी गई। हालांकि, इन कंपनियों केvaluation अलग-अलग हैं: Sun Pharma करीब 36.7 गुना कमाई पर ट्रेड कर रहा है, Cipla 21.7 गुना पर, जबकि Dr. Reddy's 18.4 गुना पर, जो सेक्टर के औसत P/E 39.4 से कम है।

Infosys नतीजों से पहले IT सेक्टर पर दबाव

बैंकों और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसी कंपनियों के शेयरों में भी भारी बिकवाली हुई, जिसमें SBI Life Insurance और Bajaj Finance जैसे दिग्गज शेयर टॉप लूजर्स में रहे। वहीं, IT यानी सूचना प्रौद्योगिकी सेक्टर पर भी नजर रहेगी, खासकर Infosys के Q4 नतीजों से पहले। HCL Technologies के हालिया नतीजों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी थी। HCL Tech के शेयर में 9% की गिरावट आई थी, जब कंपनी ने ₹4,488 करोड़ का नेट प्रॉफिट और ₹33,981 करोड़ का रेवेन्यू (Revenue) घोषित किया था। साल-दर-साल ग्रोथ के बावजूद, कंपनी का मार्जिन (Margin) 17.7% पर आ गया था और FY27 के लिए 1.5–4.5% की स्थिर मुद्रा (constant currency) में ग्रोथ का अनुमान विश्लेषकों की उम्मीदों से काफी कम था। Nifty IT इंडेक्स फिलहाल 21.5 के P/E पर ट्रेड कर रहा है।

बाजार की चाल और विश्लेषकों की राय

BSE पर मार्केट ब्रैड्थ (Market Breadth) कमजोर रही, यानी गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से कहीं ज्यादा थी। Nifty 50 के लिए 24,400 का स्तर इमीडिएट रेजिस्टेंस (Immediate Resistance) का काम कर रहा है, जबकि 24,100 और 24,000 के बीच सपोर्ट (Support) देखा जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि भू-राजनीतिक अस्थिरता और कच्चे तेल के बढ़ते दाम भारत की आर्थिक स्थिरता और कंपनियों के मुनाफे के लिए बड़ा जोखिम पैदा करते हैं। HSBC ने हाल ही में भारत के इक्विटी को 'अंडरवेट' (Underweight) कर दिया है, जिसका मुख्य कारण बढ़ती ऊर्जा कीमतें बताई गई हैं। विदेशी निवेशकों का लगातार पैसा निकालना भी निकट भविष्य में बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। HCL Technologies के नतीजों ने IT सेक्टर के लिए एक चेतावनी का काम किया है, जो मार्जिन पर दबाव और धीमी ग्रोथ का संकेत देता है। हालांकि, रुपये में कमजोरी एक्सपोर्टर्स के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन यह इंपोर्ट कॉस्ट बढ़ने से संतुलित हो जाती है। अगर कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो यह भारत की आर्थिक ग्रोथ और कॉर्पोरेट प्रॉफिट पर भारी पड़ सकती है। विश्लेषक उम्मीद कर रहे हैं कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार एक दायरे में (range-bound) रह सकता है, जिसमें गिरावट का रुख हावी रहने की संभावना है। Investors Infosys के नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जिससे IT सेक्टर की दिशा का अंदाजा लगेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.