Sensex-Nifty धड़ाम! US-ईरान टेंशन और कच्चे तेल की आग ने डुबोया बाज़ार

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Sensex-Nifty धड़ाम! US-ईरान टेंशन और कच्चे तेल की आग ने डुबोया बाज़ार
Overview

भारतीय शेयर बाज़ार (Indian Equity Markets) ने आज, मंगलवार को गिरावट के साथ शुरुआत की। BSE Sensex 208.84 अंक गिरकर 77,094.79 पर और Nifty 42.8 अंक टूटकर 24,049.90 पर खुला। निवेशकों की चिंताएं अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल को लेकर बढ़ी हुई हैं।

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ग्लोबल मार्केट से मिले चिंताजनक संकेतों के कारण आज भारतीय शेयर बाज़ार में बिकवाली हावी रही।

खास तौर पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) और कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

इस दबाव को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने और बढ़ाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल महीने (2026) में ही FIIs ने करीब ₹43,967 करोड़ के भारतीय शेयर बेचे हैं। पिछले 18 महीनों में यह बिकवाली $45 बिलियन से अधिक हो चुकी है, जिसने MSCI इंडेक्स में भारत की हिस्सेदारी भी कम कर दी है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की तरफ से मजबूत खरीदारी ने बाज़ार को सहारा देने की कोशिश की है।

अलग-अलग सेक्टर्स में मिला-जुला प्रदर्शन देखने को मिला। IT, फार्मा, PSU बैंक्स और प्राइवेट बैंक्स जैसे सेक्टर्स में कमजोरी रही। वहीं, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रियल एस्टेट और चुनिंदा मिड/स्मॉलकैप IT व टेलीकॉम स्टॉक्स में कुछ मजबूती दिखी।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भी अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है और न्यूट्रल (Neutral) रुख बनाए रखा है। यह कदम बढ़ती महंगाई को देखते हुए ग्रोथ को बनाए रखने की कोशिश को दर्शाता है, खासकर तेल की कीमतों में उछाल के चलते।

बाज़ार के सामने फिलहाल कुछ बड़े जोखिम बने हुए हैं। पश्चिम एशिया में तनाव, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर, तेल सप्लाई में बाधा और कीमतों में और उछाल का खतरा पैदा कर सकता है। FIIs की लगातार बिकवाली संकेत देती है कि विदेशी निवेशक शायद लंबी अवधि के लिए भारत में निवेश को लेकर उतने उत्साहित नहीं हैं। RBI का न्यूट्रल स्टैंड ग्रोथ के लिए अच्छा है, लेकिन अगर सप्लाई-साइड महंगाई बढ़ी तो भविष्य में पॉलिसी में बदलाव करना पड़ सकता है। इसके अलावा, अमेरिका में महंगाई बढ़ने पर फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) भी ब्याज दरों में कटौती टाल सकता है, जिसका असर उभरते बाज़ारों और भारतीय रुपये पर भी पड़ेगा।

विश्लेषकों का मानना है कि नज़दीकी भविष्य में बाज़ार में उतार-चढ़ाव (volatility) और कंसोलिडेशन (consolidation) जारी रह सकता है। Nifty के 23,600 से 24,400 के दायरे में रहने की उम्मीद है। बाज़ार की दिशा US-ईरान संघर्ष के घटनाक्रम और FIIs के फ्लो पैटर्न पर निर्भर करेगी। निवेशकों को स्टॉक-स्पेसिफिक मौकों पर ध्यान देने और डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाए रखने की सलाह दी गई है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.