Indian Markets: DIIs ने संभाला बाजार! FPIs के पैसे निकालने के बावजूद IPO की बहार, पर अब बढ़ी रेगुलेटरी पैनी नज़र

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Markets: DIIs ने संभाला बाजार! FPIs के पैसे निकालने के बावजूद IPO की बहार, पर अब बढ़ी रेगुलेटरी पैनी नज़र
Overview

भारतीय शेयर बाजारों में डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) का दबदबा बना हुआ है। फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) द्वारा पैसा निकालने के बावजूद, DIIs ने बड़ी मात्रा में निवेश कर बाजार को सहारा दिया है। वहीं, इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) मार्केट में भी तेजी जारी है, लेकिन इस पर अब रेगुलेटरी (नियामकों) की पैनी नज़र है।

DIIs ने बाजार को गिरने से बचाया, FPIs की बिकवाली हुई बेअसर

भारतीय शेयर बाजार में डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे बाजार की मजबूती बनी हुई है। फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) अभी भी एक बड़ा निवेश वर्ग हैं, लेकिन उनके निवेश का तरीका अब ग्लोबल लिक्विडिटी (वैश्विक नकदी) की स्थिति और सेंट्रल बैंकों की नीतियों पर ज्यादा निर्भर करता है। SEBI के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने बताया कि जनवरी तक FPIs की इक्विटी होल्डिंग्स (शेयरों में निवेश) बढ़कर ₹71 लाख करोड़ हो गई थी। हालांकि, 2025 में FPIs ने ₹1.65 लाख करोड़ के शेयर बेचे। यह आउटफ्लो (पैसे निकालना) खासकर तब देखा गया जब ग्लोबल लेवल पर मॉनेटरी टाइटनिंग (मुद्रास्फीति रोकने के लिए ब्याज दरें बढ़ाना) हुई।

इस भारी बिकवाली को डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स (DIIs) ने संभाला, जिन्होंने बाजार में ₹7.88 लाख करोड़ का निवेश किया। इस घरेलू खरीददारी ने बाजार में बड़ी गिरावट को रोका। निफ्टी 50 इंडेक्स, जो बाजार की चाल बताता है, 22,500 के स्तर के आसपास स्थिर बना हुआ है, जो घरेलू निवेश की मजबूती को दर्शाता है।

IPO मार्केट की रफ्तार और रेगुलेटरी बदलाव

भारत का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) मार्केट भी जबरदस्त तेजी दिखा रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में जनवरी तक, कंपनियों ने 329 IPOs के जरिए करीब ₹1.8 लाख करोड़ जुटाए हैं। यह ग्लोबल ट्रेंड से काफी अलग है, क्योंकि 2025 में आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते दुनिया भर में IPO वॉल्यूम में 15% की गिरावट आई थी।

यह तेजी कंपनियों के आत्मविश्वास और बाजार की मांग को दिखाती है, लेकिन यह वैल्यूएशन (मूल्यांकन) के जोखिम को भी बढ़ा सकती है। भारत का बाजार फिलहाल 22x के P/E (प्राइस-टू-अर्निंग्स) पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके ऐतिहासिक औसत से ज्यादा है और यह साउथ कोरिया जैसे विकसित एशियाई बाजारों के बराबर है। ऐसे में वैल्यूएशन थोड़ा महंगा लग सकता है।

SEBI (सेबी) रेगुलेशन के मामले में सावधानी बरत रहा है, ताकि वह एक तरफ कंपनियों को परेशान न करे और दूसरी तरफ बाजार के जोखिमों को पकड़ सके। बाजार की निगरानी और जोखिम प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह कदम इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बड़ी सेंट्रल बैंकों द्वारा ऊंची ब्याज दरें बनाए रखने से ग्लोबल लिक्विडिटी टाइट है, और ऐसे में इमर्जिंग मार्केट्स से FPIs का पैसा निकालना आम बात रही है।

चिंताएं: वैल्यूएशन, वोलेटिलिटी और रेगुलेटरी संतुलन

DIIs का मजबूत सपोर्ट होने के बावजूद, बाजार में कुछ बड़े जोखिम बने हुए हैं। भारतीय शेयर बाजार का 22x P/E पर ट्रेड करना चिंता का विषय है। अगर ग्लोबल सेंटीमेंट बदलता है या बड़ी सेंट्रल बैंक और सख्त मॉनेटरी पॉलिसी अपनाते हैं, तो DIIs का निवेश भी अचानक कम हो सकता है, जैसा कि पहले भी देखा गया है।

IPO मार्केट की लगातार सफलता की गारंटी नहीं है। अगर लिस्टिंग के बाद शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहता है, तो भविष्य में कंपनियां IPO लाने से हिचकिचा सकती हैं, जिससे कैपिटल फॉर्मेशन (पूंजी निर्माण) प्रभावित होगा। SEBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाजार की ग्रोथ को बढ़ावा देने और निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बीच संतुलन बनाए रखना है। बहुत सख्त नियम इनोवेशन (नवाचार) को रोक सकते हैं, वहीं ढीले नियम बाजार को सिस्टमैटिक जोखिमों में डाल सकते हैं। टेक्नोलॉजी पर निर्भरता के साथ डेटा सुरक्षा और नए तरह के मार्केट मैनिपुलेशन (हेरफेर) का जोखिम भी जुड़ा है।

आगे क्या?

आगे चलकर, बाजार के जानकारों को उम्मीद है कि DIIs का मजबूत निवेश FPIs की अस्थिरता को मैनेज करने में मदद करेगा। ब्रोकरेज फर्म्स का कहना है कि भले ही ओवरऑल ग्रोथ अच्छी दिख रही हो, लेकिन सही शेयरों का चुनाव करना बहुत महत्वपूर्ण होगा। ऐसे स्टॉक्स पर फोकस करना चाहिए जिनके फंडामेंटल्स (बुनियादी तत्व) मजबूत हों और बिजनेस मॉडल टिकाऊ हो।

2026 में FPIs के फ्लो को तय करने में ग्लोबल ब्याज दरें और भू-राजनीतिक स्थिरता (geopolitical stability) प्रमुख भूमिका निभाएंगी। SEBI द्वारा एडवांस्ड रेगुलेटरी टेक्नोलॉजीज को अपनाना बाजार की अखंडता (integrity) को बढ़ाएगा, लेकिन इस प्रक्रिया की रफ्तार पर बारीकी से नजर रखी जाएगी।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.