भारतीय शेयर बाज़ार आज, 26 मार्च 2026 को राम नवमी के अवकाश के चलते बंद हैं। बाज़ार कल, 27 मार्च को फिर से खुलेंगे।
बुधवार को बाज़ार में एक अच्छी तेज़ी देखी गई थी। Nifty 50 1.72% चढ़कर 23,306.45 पर बंद हुआ, वहीं BSE Sensex 1.63% की बढ़त के साथ 75,273.45 पर पहुंचा। यह तेज़ी पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदों और तेल की कीमतों में आई गिरावट के कारण आई थी। Brent Crude $99.47 के आस-पास आ गया था।
हालांकि, इस तेज़ी की चमक भू-राजनीतिक तनाव को लेकर विश्लेषकों की चेतावनियों के कारण फीकी पड़ गई है।
कई ग्लोबल फर्मों ने भारत के इक्विटी (equity) टारगेट्स को कम कर दिया है। Bernstein ने Nifty के साल के अंत के टारगेट को 28,100 से घटाकर 26,000 कर दिया है। उनका मानना है कि पश्चिम एशिया में लंबा संघर्ष भारत के लिए गंभीर आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे Nifty 20,000 के नीचे जा सकता है और रुपया 110 प्रति डॉलर तक गिर सकता है। UBS ने भी भारत की इक्विटी को 'Attractive' से घटाकर 'Neutral' कर दिया है, जिसका मुख्य कारण ऊर्जा आयात पर भू-राजनीतिक जोखिम हैं।
दरअसल, भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर बहुत ज़्यादा निर्भर है। ऐसे में, हॉरमज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में किसी भी तरह का व्यवधान एक बड़ा जोखिम है।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर 2026 तक संघर्ष जारी रहा, तो भारत में दो अंकों की महंगाई (double-digit inflation), ग्रोथ का 2-3% तक धीमा होना और रुपये में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है।
बुधवार को 93.97 पर बंद हुआ भारतीय रुपया पहले से ही दबाव में है, क्योंकि विदेशी निवेशकों ने मार्च में $11 बिलियन से ज़्यादा की बिकवाली की है। SBI Research का अनुमान है कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष से भारतीय कंपनियों के ₹13.75 लाख करोड़ के रेवेन्यू (revenue) को खतरा हो सकता है।
बाज़ार के वैल्यूएशंस (valuations) को देखें तो BSE Sensex का P/E रेश्यो लगभग 20.7 और Nifty 50 का P/E रेश्यो लगभग 20.4 है। ये स्तर ऐतिहासिक रेंज में हैं, लेकिन बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए ज़्यादा राहत नहीं देते।
जब बाज़ार दोबारा खुलेंगे, तो निवेशक पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों और तेल की कीमतों, महंगाई और रुपये पर इसके असर पर बारीकी से नज़र रखेंगे। बुधवार की अल्पकालिक तेज़ी शायद कुछ समय के लिए ही थी, क्योंकि फंडामेंटल जोखिम बाज़ार की दिशा तय करते रहेंगे।