कच्चे तेल का झटका और टेंशन का असर
30 अप्रैल को घरेलू शेयर बाजार में बिकवाली (sell-off) हावी रही। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क Sensex 582.86 अंक यानी 0.75% की गिरावट के साथ 76,913.50 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का Nifty 50 भी 180.1 अंक यानी 0.74% की कमजोरी के साथ 23,997.55 के स्तर पर आ गया। इस गिरावट की मुख्य वजह मध्य-पूर्व (Middle East) में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंचना था। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए महंगाई (inflation) और आर्थिक स्थिरता (economic stability) को लेकर चिंताएं बढ़ाती हैं।
किन सेक्टर्स पर पड़ा असर?
बाजार में बिकवाली व्यापक थी। मेटल्स, रिएल्टी (realty) और एफएमसीजी (FMCG) जैसे सेक्टर्स में खास तौर पर गिरावट देखने को मिली। हालांकि, आईटी (IT) सेक्टर ने कुछ हद तक मजबूती बनाए रखी।
रुपये में कमजोरी और विदेशी निवेशकों का बिकवाली
बाजार पर दबाव बढ़ाने वाले अन्य कारकों में भारतीय रुपये (Indian Rupee) का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना भी शामिल रहा, जो एक समय रिकॉर्ड निचले स्तर पर चला गया था। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 30 अप्रैल को ₹8,048 करोड़ के शेयर बेच दिए, जिससे निवेशकों का भरोसा और डगमगा गया। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹3,487 करोड़ की खरीदारी करके कुछ सहारा जरूर दिया।
बाजार कब खुलेगा?
यह ध्यान देने वाली बात है कि 1 मई को महाराष्ट्र दिवस के उपलक्ष्य में भारतीय शेयर बाजार (BSE और NSE) बंद थे। बाजार 4 मई, 2024 को अपने सामान्य समय पर फिर से खुलेंगे।
एक्सपर्ट की राय
इस उठापटक के बीच, रेलिगेयर ब्रोकिंग (Religare Broking) के रिसर्च हेड अजीत मिश्रा (Ajit Mishra) ने कहा, 'बाजार में गुरुवार को उतार-चढ़ाव देखा गया और प्रतिकूल ग्लोबल संकेतों के चलते यह आधा फीसदी से ज्यादा गिर गया। फिलहाल बाजार को स्पष्ट दिशा नहीं मिल पा रही है, लेकिन यह चरण जल्द ही समाप्त होने की उम्मीद है।' उन्होंने सलाह दी कि ट्रेडर सतर्क रहें, रिस्क मैनेजमेंट पर ध्यान दें और सेक्टर-स्पेसिफिक मौकों की तलाश करें। उनके अनुसार, Nifty के 23,800 से नीचे जाने पर यह 23,500 तक गिर सकता है, जबकि 24,400 से 24,800 के बीच रेजिस्टेंस (resistance) का सामना करना पड़ सकता है।
