बजट के बाद बाज़ार में दिखी रिकवरी, पर FIIs की बिकवाली जारी
1 फरवरी को बजट के बाद गिरावट का सामना करने वाले भारतीय शेयर बाज़ारों, यानी सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) ने 2 फरवरी को अच्छी रिकवरी दिखाई और 1% से ज़्यादा की बढ़त के साथ बंद हुए। यह रिकवरी ऐसे समय में आई जब विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली लगातार जारी रही। 2 फरवरी को FIIs ने बाज़ार से लगभग ₹1,832.46 करोड़ की बिकवाली की। बाज़ार की यह प्रतिक्रिया घरेलू नीतियों और बाहरी चुनौतियों के बीच चल रही खींचतान को दर्शाती है, जिस पर मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) V. Anantha Nageswaran ने अपनी बात रखी है।
क्यों है निवेशकों में चिंता?
विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और बाज़ार की ऊंची वैल्यूएशन्स (valuations) फिलहाल भारतीय शेयरों पर दबाव बना रही हैं। CEA V. Anantha Nageswaran के अनुसार, निवेशकों की चिंता की कई वजहें हैं, जिनमें अमेरिका की तरफ से मिली-जुली पॉलिसी सिग्नल (policy signals) और टैरिफ (tariffs) से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय बाज़ारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े निवेश की मौजूदगी अभी सीमित है। इसके अलावा, एक नई ग्लोबल व्यवस्था (new world order) की ओर दुनिया का झुकाव, जिसमें भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता बनी रहेगी, 2026 के बाद भी जारी रहने की उम्मीद है। ये सभी फैक्टर मिलकर बाज़ार में सावधानी का माहौल बना रहे हैं। अमेरिका का सेवा क्षेत्र (US services sector) भी मिले-जुले संकेत दे रहा है।
ग्लोबल झटके और घरेलू फंडामेंटल्स
Nageswaran का कहना है कि कभी-कभी बाज़ार और असली अर्थव्यवस्था (real economy) में कुछ खास वजहों से थोड़ी दूरी आ जाती है, लेकिन आखिरकार वे फिर से एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठा लेते हैं। फिलहाल, बाज़ार की यह घबराहट काफी हद तक वैल्यूएशन की चिंताओं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ी है। अमेरिका के सेवा क्षेत्र से मिल रहे संकेत और H-1B वीज़ा से जुड़े मुद्दे, जिनका भारतीय IT कंपनियों पर असर पड़ सकता है, इस अनिश्चितता को और बढ़ाते हैं। वहीं, भारतीय AI सेक्टर में तेज़ी देखी जा रही है और इसके 2027 तक $17 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन CEA के मुताबिक, बाज़ार में इसकी मौजूदा उपस्थिति अभी कम है। इन बाहरी चुनौतियों और कुछ घरेलू सेक्टर की दिक्कतों के बावजूद, Nageswaran को भारत के मजबूत ग्रोथ फंडामेंटल्स (growth fundamentals) पर पूरा भरोसा है। उनका मानना है कि बाज़ार का प्रदर्शन और आर्थिक हकीकत के बीच का यह अंतर समय के साथ कम होगा। भारत का बाहरी क्षेत्र (external sector) भी स्थिर दिख रहा है।
वैल्यूएशन की चिंता और आगे का रास्ता
CEA ने इस दौर को 'दो ग्लोबल ऑर्डर्स के बीच का एक ठहराव' बताया है, जो एक लंबी एडजस्टमेंट फेज (adjustment phase) का संकेत देता है। उन्होंने पहले भी आगाह किया था कि 2008 के बाद के 'इज़ी मनी' (easy money) के दौर ने दुनिया भर में स्टॉक मार्केट वैल्यूएशन्स को बहुत ज़्यादा बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा वक्त है जब बाज़ार और अर्थव्यवस्था में अस्थायी तौर पर अंतर आ सकता है, लेकिन लंबी अवधि में बाज़ार हमेशा आर्थिक हकीकत के साथ ही चलता है। यूनियन बजट 2026 के बाद डेरिवेटिव्स (derivatives) पर सिक्योरिटी ट्रांज़ैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी से ट्रेडिंग कॉस्ट (trading costs) बढ़ी है, जो शॉर्ट-टर्म विदेशी निवेश को हतोत्साहित कर सकती है। फिर भी, CEA का मुख्य संदेश यही है कि भारत की आर्थिक रफ़्तार मज़बूत है और उम्मीद है कि बाज़ार जल्द ही इस Underlying Strength को पहचान लेगा।