Union Budget 2026-27: बाज़ार में आज स्पेशल ट्रेडिंग! सोना-चांदी लुढ़के, FIIs ने खरीदा, DIIs ने बेचा

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AuthorAditya Rao|Published at:
Union Budget 2026-27: बाज़ार में आज स्पेशल ट्रेडिंग! सोना-चांदी लुढ़के, FIIs ने खरीदा, DIIs ने बेचा
Overview

आज भारतीय शेयर बाज़ारों में एक खास दिन है क्योंकि आज **यूनियन बजट 2026-27** पेश किया जा रहा है। इसी के मद्देनज़र बाज़ार आज रविवार को खुले हैं। शुक्रवार को बाज़ार थोड़ी नरमी के साथ बंद हुए थे, और अब आज के बजट सत्र के लिए गोल्ड (Gold) और सिल्वर (Silver) की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी गई है, जिसका मुख्य कारण डॉलर का मजबूत होना है। इसके अलावा, शुक्रवार के इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टमेंट (Institutional Investment) डेटा से संकेत मिला है कि फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) खरीदारी कर रहे हैं, जबकि डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) बिकवाली कर रहे थे।

बजट के दिन बाज़ार में हलचल

भारतीय शेयर बाज़ार आज, 1 फरवरी 2026, रविवार को एक विशेष ट्रेडिंग सत्र में हिस्सा ले रहे हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि केंद्रीय बजट 2026-27 की प्रस्तुति को सुचारू रूप से संपन्न कराया जा सके। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश का नौवां बजट पेश करेंगी, जिसमें आने वाले समय के लिए देश की वित्तीय दिशा का खाका खींचा जाएगा। यह सत्र शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 को बाज़ार में आई हल्की नरमी के बाद आयोजित हो रहा है, जब NSE Nifty 50 0.39% गिरकर 25,320.65 पर और BSE Sensex 0.36% घटकर 82,269.78 पर बंद हुआ था। बजट से पहले की उम्मीदों और मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के कारण बाज़ार में सतर्कता का माहौल था।

कमोडिटी में बड़ी गिरावट, डॉलर की मजबूती का असर

बजट सत्र से ठीक पहले कमोडिटी बाज़ारों में कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कीमती धातुओं में अचानक बड़ी गिरावट आई। 24-कैरेट सोने की कीमत अपने हालिया उच्चतम स्तर से करीब 12% गिरकर लगभग ₹1,49,590 प्रति 10 ग्राम पर आ गई। इसी तरह, चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट देखी गई, जो वैश्विक स्तर पर $100 प्रति औंस से नीचे चली गई और भारत में लगभग 30% की गिरावट के साथ ₹2,92,280 प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गई। कीमती धातुओं में इस गिरावट का एक मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर (US Dollar) का मजबूत होना बताया जा रहा है। US Dollar Index (DXY) 97.15 पर कारोबार कर रहा था, जिससे शुक्रवार को भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले थोड़ा कमजोर होकर 91.98 पर आ गया था। वहीं, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में मिले-जुले संकेत मिले। ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनावों के कारण पिछले सत्र में आई अस्थिरता के बाद, शुक्रवार सुबह WTI फ्यूचर्स (Futures) लगभग $65.74 और ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) $69.82 पर कारोबार कर रहे थे।

इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के फ्लो में बड़ा बदलाव

शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 के अस्थाई आंकड़ों के अनुसार, इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टमेंट पैटर्न में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) नेट खरीदार बनकर उभरे और उन्होंने ₹2,251.37 करोड़ का निवेश किया। वहीं, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने ₹601.03 करोड़ की बिकवाली की। यह जनवरी 2026 के सामान्य रुझानों के विपरीत है, जब फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) नेट विक्रेता थे और महीने के पहले पंद्रह दिनों में इक्विटी (Equity) से उनका आउटफ्लो लगभग $2.11 बिलियन तक पहुंच गया था। इससे पहले महीने में इक्विटी में लगातार विदेशी बिकवाली दबाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पूंजी प्रवाह में बदलाव के कारण विदेशी निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।

सेक्टर-वार परफॉरमेंस और ग्रुप की चाल

शुक्रवार के ट्रेडिंग सत्र में विभिन्न सेक्टरों के प्रदर्शन में मिला-जुला रुख रहा। एक्वाकल्चर (Aquaculture) सेक्टर में अच्छी बढ़त दर्ज की गई, जबकि नॉन-फेरस मेटल्स (Metals – Non-Ferrous) जैसे सेक्टरों को नुकसान हुआ। इससे पहले, 29 जनवरी को, Nifty Metal स्टॉक्स 5.21% और Nifty IT 1.03% गिर गए थे। बिजनेस ग्रुप्स की बात करें तो वेदांता ग्रुप (Vedanta Group) दबाव में रहा, और हिंदुस्तान जिंक के शेयर में बड़ी गिरावट आई। खास तौर पर, वेदांता ग्रुप की कंपनी टाटा स्टील (Tata Steel) शुक्रवार को 4.57% टूट गई। इसके विपरीत, जयपुरिया ग्रुप (Jaipuria Group) की मार्केट कैप में 4.13% की वृद्धि देखी गई।

मैक्रो इकोनॉमिक माहौल और बजट की उम्मीदें

आर्थिक विकास के अनुमानों के बीच यूनियन बजट पेश किया जा रहा है। इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में फाइनेंशियल ईयर 27 के लिए जीडीपी (GDP) ग्रोथ का अनुमान 6.8%–7.2% बताया गया था, जो वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत को एक महत्वपूर्ण वैश्विक ग्रोथ इंजन के रूप में स्थापित करता है। ऐतिहासिक रूप से, बजट वाले दिनों में बाज़ार की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रही हैं। ग्रोथ-उन्मुख नीतियों और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च के जवाब में तेजी देखी गई है, जैसा कि 2017 और 2021 में हुआ था। वहीं, वित्तीय चिंताओं या अप्रत्याशित टैक्स बदलावों के कारण गिरावट के उदाहरण भी रहे हैं। निवेशक राजकोषीय अनुशासन, पूंजीगत व्यय, टैक्स सुधारों और सेक्टर-विशिष्ट प्रोत्साहनों पर बजट की घोषणाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो आने वाले फाइनेंशियल ईयर के लिए देश की आर्थिक दिशा को आकार दे सकते हैं।

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