मैन्युफैक्चरिंग में बड़ी गिरावट, सर्विसेज में आई नरमी
भारत का सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) मार्च में घटकर 57.5 रहा, जो फरवरी के 58.1 से कम है। यह पिछले 14 महीनों का सबसे निचला स्तर है। हालांकि, सर्विसेज सेक्टर अभी भी ग्रोथ दिखा रहा है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गिरावट ज्यादा तेज रही। मैन्युफैक्चरिंग PMI मार्च में 53.9 पर आ गया, जो फरवरी के 56.9 से काफी कम है। यह लगभग 4 साल (सितंबर 2023 के बाद) का सबसे निचला स्तर है।
मध्य पूर्व टेंशन और बढ़ी लागत बनी वजह
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इस सुस्ती की मुख्य वजह मध्य पूर्व में बढ़ती भू-राजनीतिक टेंशन (geopolitical tensions) है। कंपनियों का कहना है कि इससे एनर्जी शॉक (energy shocks) और इनपुट कॉस्ट (input costs) में भारी बढ़ोतरी हुई है। पिछले करीब 4 साल में ऐसा पहली बार हुआ है जब ऑपरेटिंग खर्च (operating expenses) इतनी तेजी से बढ़े हों। केमिकल्स, स्टील, ऑयल और एनर्जी जैसी चीजों के दाम बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ गई है। बढ़ी हुई अनिश्चितता और लागत के कारण डिमांड कम हुई और नए ऑर्डर की ग्रोथ धीमी पड़ गई।
सर्विसेज सेक्टर में भी धीमी पड़ी रफ्तार
सर्विसेज सेक्टर में भी रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है। HSBC इंडिया सर्विसेज PMI बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स मार्च में घटकर 57.2 रहा, जो फरवरी में 58.1 था। नई बिजनेस ग्रोथ भी पिछले 3 साल के निचले स्तर पर आ गई, जो डोमेस्टिक डिमांड (domestic demand) में नरमी और कॉम्पिटिशन को दर्शाता है। हालांकि, एक्सपोर्ट ऑर्डर (export orders) अभी भी मजबूत बने हुए हैं।
संयुक्त PMI में भी आई गिरावट
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों सेक्टरों के मिले-जुले असर से कंबाइंड PMI (Composite PMI) मार्च में गिरकर 56.5 पर आ गया, जो फरवरी में 58.9 था। यह पिछले साढ़े तीन साल (अक्टूबर 2022 के बाद) में सबसे कमजोर ग्रोथ है।
ग्लोबल मार्केट में भी मंदी
दुनियाभर में मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी मार्च में थोड़ी धीमी हुई। J.P. Morgan ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग PMI® 51.3 रहा, जो फरवरी के 51.9 से कम है। अमेरिका और यूरो जोन में ग्रोथ थोड़ी बढ़ी, लेकिन चीन और जापान में उत्पादन कम हुआ। फरवरी में भारत का मैन्युफैक्चरिंग PMI 56.9 और सर्विसेज PMI 58.1 था, जो अमेरिका, चीन और जर्मनी जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर था।
भारत की आर्थिक ग्रोथ का अनुमान मजबूत
इन चुनौतियों के बावजूद, भारत की कुल आर्थिक ग्रोथ का अनुमान (FY26 के लिए) मजबूत बना हुआ है। IMF और Assocham जैसी संस्थाएं भारत की GDP ग्रोथ 7.3% से 7.6% के बीच रहने का अनुमान लगा रही हैं। ऐसा मजबूत डोमेस्टिक कंजम्पशन (domestic consumption) और सरकारी खर्च के कारण है।
अन्य अहम पहलू
- भारतीय रुपया (Indian Rupee): फाइनेंशियल ईयर 2026 में रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 9.9% कमजोर हुआ, जो 2012 के बाद सबसे बड़ी सालाना गिरावट है। यह पहली बार 95 के पार गया।
- महंगाई (Inflation): दिसंबर 2023 में महंगाई बढ़कर 1.33% रही, लेकिन RBI की लिमिट से नीचे है।
- RBI रेट: फरवरी 2024 में RBI ने रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखा।
- कच्चे तेल का असर: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई के लिए बड़ा खतरा हैं।
- रोजगार: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में पिछले 7 महीनों में सबसे तेजी से रोजगार बढ़ा है।
- निर्यात (Exports): मार्च में मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट में सितंबर 2023 के बाद सबसे तेज ग्रोथ देखी गई।
आगे क्या जोखिम?
मध्य पूर्व के संघर्ष से एनर्जी शॉक और इनपुट कॉस्ट और बढ़ सकती है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से ट्रेड डेफिसिट (trade deficit) बढ़ सकता है और महंगाई बढ़ सकती है। रुपये के कमजोर होने से इंपोर्ट महंगा होगा। इन सब का असर कॉर्पोरेट प्रॉफिट (corporate profit) पर भी पड़ सकता है।