वर्कप्लेस इंजरी क्लेम में 31% की उछाल
वर्कर सेफ्टी अब चर्चा का विषय बनती जा रही है, क्योंकि भारत में माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के बीच वर्कप्लेस इंजरी क्लेम फाइनेंशियल ईयर 2025 और 2026 के बीच 31% बढ़ गए हैं। BimaKavach Workplace Risk Report 2026, जिसने विभिन्न सेक्टर्स की 6,000 से ज़्यादा MSMEs का डेटा एनालाइज किया, इस तेज़ी से बढ़ते खतरे और क्लेम की बड़ी संख्या को उजागर करती है।
क्लेम बढ़ने के मुख्य कारण?
क्लेम की संख्या बढ़ने की वजहें कई हैं। एक तरफ, ज़्यादा बिज़नेस एक्टिविटी का मतलब है कि साइट पर ज़्यादा वर्कर्स मौजूद हैं, जिससे एक्सीडेंट्स की संभावना बढ़ जाती है। वहीं, दूसरी ओर, वर्कर्स में अवेयरनेस बढ़ने और डिजिटल टूल्स की मदद से अब ज़्यादातर इंसिडेंट्स की रिपोर्टिंग हो पाती है, यानी पहले के मुकाबले कम मामले अनरिपोर्टेड रह जाते हैं।
सबसे बड़े खतरे: सेक्टर्स और सीज़न
फैक्ट्रीज और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में सबसे ज़्यादा इंजरी क्लेम देखे गए हैं, जो अक्सर मशीनरी एक्सीडेंट, फिसलने, गिरने या कंस्ट्रक्शन से जुड़ी चोटों के कारण होते हैं। आईटी और टेक फर्म्स में, इंश्योरेंस होने के बावजूद, क्लेम के मामले काफी कम रिपोर्ट किए गए हैं। मौसमी कारकों का भी बड़ा असर है; मानसून सीजन (जून-सितंबर) के दौरान कुल क्लेम का 43% इसी अवधि में दर्ज होता है। जुलाई का महीना खासकर गीले हालातों और ट्रांसपोर्ट इश्यूज के कारण ज़्यादा खतरनाक साबित होता है।
इंश्योरेंस का बदलता नज़रिया: कंप्लायंस से सेफ्टी नेट तक
ज़्यादातर MSMEs (94.6%) अभी भी वर्कमेन कंपनसेशन इंश्योरेंस मुख्य रूप से कानूनी कंप्लायंस यानी नियमों को पूरा करने के लिए खरीदते हैं। हालांकि, अब धीरे-धीरे यह नज़रिया बदल रहा है और ज़्यादा फर्में इंश्योरेंस को महज़ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक ज़रूरी सेफ्टी नेट के तौर पर देखने लगी हैं। इसका एक बड़ा कारण इंश्योरेंस पॉलिसी का तेज़ी से इश्यू होना है; लगभग 69% पॉलिसीज़ उसी दिन जारी हो जाती हैं, और 82% से ज़्यादा तीन दिनों के भीतर एक्टिवेट हो जाती हैं, जिससे तुरंत सुरक्षा मिल पाती है।
प्रोएक्टिव सेफ्टी की ओर बढ़ता कदम
रिपोर्ट यह बताती है कि वर्कप्लेस के रिस्क डायनामिक हैं और ये सीज़न, सेक्टर और ऑपरेशन के हिसाब से लगातार बदलते रहते हैं। जैसे-जैसे बिज़नेस बढ़ रहे हैं, यह ट्रेंड एक्सीडेंट्स पर रिएक्शन देने से आगे बढ़कर रिस्क के लिए प्रोएक्टिवली तैयारी करने की ओर जा रहा है। यह दूरदर्शिता भारत में फ्यूचर वर्कप्लेस सेफ्टी को नया आकार देगी।
