India MSMEs: डिजिटल हुए, पर विकास रुका क्यों? IMF की रिपोर्ट ने बताई असली वजह

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India MSMEs: डिजिटल हुए, पर विकास रुका क्यों? IMF की रिपोर्ट ने बताई असली वजह
Overview

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की एक नई रिसर्च बताती है कि इंडिया के माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) में डिजिटलीकरण (Digitalization) ने प्रोडक्टिविटी (Productivity) को काफी बढ़ाया है और आउटपुट (Output) में उतार-चढ़ाव को कम किया है। लेकिन, यह स्टडी यह भी बताती है कि छोटे बिज़नेस बेहतर डिजिटल सिस्टम वाले राज्यों में जाने से हिचकिचा रहे हैं, जिससे इसके फायदे सीमित हो रहे हैं। यह दिखाता है कि डिजिटल टूल्स ऑपरेशंस को बेहतर बनाते हैं, पर गहरी स्ट्रक्चरल समस्याएं अभी भी इस सेक्टर के विकास को रोके हुए हैं।

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IMF के वर्किंग पेपर के अनुसार, जिन राज्यों ने ज़्यादा डिजिटल पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन अपनाया, वहां फर्म्स की प्रोडक्टिविटी ग्रोथ ज़्यादा देखी गई और आउटपुट में भी कमी आई। यह इस बात का सबूत है कि ऑनलाइन टैक्स फाइलिंग और ऑटोमेटेड परमिट अप्रूवल जैसे डिजिटल टूल्स नौकरशाही की उन रुकावटों को प्रभावी ढंग से कम करते हैं जो अक्सर छोटे बिज़नेस को परेशान करती हैं।

MSMEs भारत की इकॉनमी का एक अहम हिस्सा हैं, जो GDP का लगभग 30-45% और एक्सपोर्ट्स का बड़ा हिस्सा संभालते हैं, और लाखों लोगों को रोज़गार देते हैं। इन रिफॉर्म्स का मकसद टैक्स, परमिट और लेबर कंप्लायंस जैसे ज़रूरी एरिया को सुधार कर बिज़नेस के लिए एक ज़्यादा एफिशिएंट ऑपरेटिंग एनवायरनमेंट बनाना था।

हालांकि, प्रोडक्टिविटी में इन सुधारों के बावजूद, स्टडी एक बड़ा विरोधाभास दिखाती है: माइक्रोएंटरप्राइजेज उन राज्यों में जाने में कोई खास इंटरेस्ट नहीं दिखा रहे हैं जहां ज़्यादा एडवांस्ड डिजिटल सिस्टम हैं। यह इस बात की ओर इशारा करता है कि जहां डिजिटल टूल्स इंटरनल ऑपरेशंस को बेहतर बनाते हैं, वहीं वे बिज़नेस के लोकेशन चुनाव को प्रभावित करने वाली मुख्य समस्याओं को हल नहीं करते।

इनमें सबसे बड़ी दिक्कतें हैं फॉर्मल क्रेडिट (Formal Credit) तक पहुंच का बड़ा गैप, जिसका अनुमान ₹30 लाख करोड़ है। यह खास तौर पर सर्विस-सेक्टर और महिलाओं के स्वामित्व वाले व्यवसायों को ज़्यादा प्रभावित करता है। इसके अलावा, कई MSMEs में डिजिटल लिटरेसी (Digital Literacy) और टेक्निकल स्किल्स (Technical Skills) की कमी है, जिससे वे टेक्नोलॉजी में निवेश करने से हिचकिचाते हैं या डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंतित रहते हैं। अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर, खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में, और जटिल रेगुलेशन्स (Regulations) भी एक्सपेंशन के मौकों को सीमित करते हैं।

ये मिले-जुले चैलेंज यह बताते हैं कि सिर्फ डिजिटलाइजेशन ही MSME सेक्टर को उसकी पूरी क्षमता तक पहुंचाने के लिए काफी नहीं है। व्यापक आर्थिक विकास और बेहतर कॉम्पिटिटिवनेस (Competitiveness) के लिए इन फंडामेंटल इश्यूज को डिजिटल एडवांसेज के साथ-साथ हल करना होगा। भविष्य की प्रगति में सस्ते क्रेडिट तक आसान पहुंच, बेहतर डिजिटल और टेक्निकल स्किल्स ट्रेनिंग, और सभी क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की एक व्यापक रणनीति शामिल होगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.