इस साल 2026 बैच के लिए देश के प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों जैसे XLRI, SPJIMR, MDI Gurgaon, TISS, और IMT Ghaziabad में प्लेसमेंट सीजन में एक मापा हुआ सुधार दिखा है। एवरेज कंपंसेशन पैकेज (Average Compensation Package) पिछले साल की तुलना में बढ़े हैं। इसकी मुख्य वजह कंसल्टिंग और बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर में मजबूत हायरिंग रही है।
XLRI जमशेदपुर ने बताया कि उनका एवरेज कॉस्ट-टू-कंपनी (CTC) पैकेज लगभग ₹31-32 लाख सालाना रहा, जबकि टॉप ऑफर्स ₹75 लाख तक पहुंचे। SPJIMR मुंबई ने ₹33.75 लाख का एवरेज पैकेज और ₹32.85 लाख का मीडियन पैकेज दर्ज किया। MDI गुड़गांव के PGDM प्रोग्राम का एवरेज पैकेज ₹29.5 लाख रहा, जिसमें हाईएस्ट ऑफर ₹97.5 लाख का था। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) ने ₹28.69 लाख का मीन सैलरी और ₹66 लाख का हाईएस्ट ऑफर रिकॉर्ड किया। IMT गाजियाबाद के PGDM प्रोग्राम के लिए, एवरेज पैकेज ₹18.89 लाख था, और सबसे बड़ा ऑफर ₹35 लाख तक पहुंचा। ये आंकड़े पिछले साल की तुलना में काफी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दर्शाते हैं, जो हालिया आर्थिक मंदी के बाद एक सकारात्मक संकेत है।
हालांकि, इन नंबर्स के पीछे हायरिंग की स्ट्रैटेजी और एम्प्लॉयर्स (Employers) द्वारा मांगी जाने वाली स्किल्स में बड़े बदलाव आ रहे हैं। टेक्नोलॉजी (Technology) और स्टार्टअप्स (Startups) जैसे सेक्टर्स, जो पहले ग्रोथ के बड़े एरिया थे, अब धीमे पड़ गए हैं। ज्यादा कंपनियां प्लेसमेंट में हिस्सा ले रही हैं, लेकिन हर रिक्रूटर (Recruiter) के लिए वे कम ऑफर दे रही हैं। इसका मतलब है कि मार्केट बल्क हायरिंग (Bulk Hiring) से हटकर उन रोल्स (Roles) की ओर बढ़ रहा है जिनके लिए स्पेशलाइज्ड स्किल्स (Specialized Skills) की जरूरत है, न कि जनरल क्वालिफिकेशन्स (General Qualifications) की।
प्री-प्लेसमेंट ऑफर्स (PPOs) अब और भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। SPJIMR जैसी संस्थाओं ने बताया कि उनके 46% स्टूडेंट्स ने PPOs हासिल किए, जो इंटर्नशिप की सफलता को नौकरी पाने में अहमियत देता है। कंसल्टिंग फर्म्स, जो हमेशा से MBA हायरिंग में मजबूत रही हैं, अब स्ट्रैटेजी, ऑपरेशंस और ट्रांसफॉर्मेशन रोल्स के लिए मजबूत एनालिटिकल (Analytical) और स्ट्रैटेजिक स्किल्स (Strategic Skills) वाले कैंडिडेट्स को प्राथमिकता दे रही हैं। BFSI सेक्टर, जिसमें फिनटेक (Fintech) भी शामिल है, AI/ML, साइबर सिक्योरिटी (Cybersecurity), और रिस्क एनालिसिस (Risk Analysis) जैसे स्पेशलिस्ट्स की हायरिंग बढ़ा रहा है।
कुल मिलाकर सकारात्मक आंकड़ों के बावजूद, 2026 बैच के प्लेसमेंट सीजन में कुछ बारीकियाँ हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। बढ़ती प्रतियोगिता और स्पेशलाइज्ड रोल्स पर फोकस का मतलब है कि जिन ग्रेजुएट्स (Graduates) के पास खास डोमेन नॉलेज (Domain Knowledge) या मजबूत इंटर्नशिप एक्सपीरियंस (Internship Experience) नहीं है, उन्हें जॉब सर्च (Job Search) थोड़ी मुश्किल लग सकती है।
आर्थिक अनिश्चितता (Economic Uncertainty) भी हायरिंग के लिए एक जोखिम बनी हुई है। एम्प्लॉयर्स अब MBA डिग्री के साथ-साथ प्रैक्टिकल प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स (Problem-Solving Skills) और अडैप्टेबिलिटी (Adaptability) की मांग कर रहे हैं। हाइब्रिड स्किल्स (Hybrid Skills) का कॉम्बिनेशन, जिसमें बिजनेस नॉलेज के साथ एनालिटिकल और डिजिटल कैपेबिलिटीज (Digital Capabilities) शामिल हों, पारंपरिक स्किल्स वाले ग्रेजुएट्स को नुकसान पहुंचा सकता है। फ्यूचर में, AI और सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) से जुड़े रोल्स की मांग बढ़ने की उम्मीद है, जो नए स्पेशलाइज्ड रोल्स तैयार करेंगे। टॉप बिजनेस स्कूल हाई प्लेसमेंट रेट हासिल करते रहेंगे, लेकिन कंपनियां ग्रेजुएट्स की बदलती इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार खुद को ढालने और सीधे बिजनेस इंपैक्ट (Business Impact) डालने की क्षमता पर ज्यादा ध्यान देंगी।
