India Jobs Report: नौकरी का बाजार बदला! फॉर्मल जॉब्स बढ़ीं, बेरोजगारी घटी; पर युवा और महिलाओं की सैलरी में बड़ा गैप

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
India Jobs Report: नौकरी का बाजार बदला! फॉर्मल जॉब्स बढ़ीं, बेरोजगारी घटी; पर युवा और महिलाओं की सैलरी में बड़ा गैप
Overview

भारत के लेबर मार्केट (Labour Market) से 2025 के लिए मिली-जुली तस्वीर सामने आई है। जहां देश भर में बेरोजगारी (Unemployment) की दरें घटी हैं, वहीं रेगुलर सैलरी वाली नौकरियों में इजाफा हुआ है और सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट (Self-Employment) में कमी आई है। युवाओं में बेरोजगारी के आंकड़े सुधरे हैं, लेकिन 'NEET' (Not in Education, Employment, or Training) श्रेणी में आने वाले युवाओं की बड़ी आबादी अब भी चिंता का विषय है। महिलाओं की सैलरी में प्रतिशत के हिसाब से अच्छी ग्रोथ दिखी है, पर पुरुषों और महिलाओं के बीच सैलरी का अंतर (Pay Gap) अब भी काफी बड़ा है।

रोजगार की स्थिति: बड़ी तस्वीर और बारीकियाँ

भारत के जॉब मार्केट (Job Market) के 2025 के आंकड़े एक मिश्रित तस्वीर पेश कर रहे हैं। अच्छी बात यह है कि बेरोजगारी की दरें कुछ कम हुई हैं। ग्रामीण इलाकों में यह दर 2.4% पर आ गई है, जो पिछले साल 2.5% थी। वहीं, शहरी इलाकों में यह 4.8% रही, जो पहले 5% थी। यह सुधार भारत की मजबूत आर्थिक ग्रोथ (Economic Growth) की उम्मीदों के अनुरूप है, IMF का अनुमान है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में GDP ग्रोथ 7.3% रह सकती है। हालांकि, यह बढ़त असमान है और घटती बेरोजगारी दरों के बावजूद कुछ गहरी संरचनात्मक समस्याओं (Structural Issues) की ओर इशारा करती है।

नौकरियों का बदलता स्वरूप: फॉर्मल वर्क की बढ़त

भारत का जॉब मार्केट धीरे-धीरे अधिक फॉर्मल (Formal) हो रहा है। रेगुलर सैलरी और वेज वाली नौकरियों का हिस्सा बढ़कर 23.6% हो गया है, जो पिछले साल 22.4% था। यह अधिक सुरक्षित रोजगार की ओर एक कदम है, क्योंकि इन नौकरियों में सैलरी अक्सर इनफॉर्मल वर्क (Informal Work) की तुलना में 2.5 गुना ज्यादा होती है। सेल्फ-एम्प्लॉयड (Self-Employed) वर्कर्स का प्रतिशत भी घटकर 56.2% रह गया है। सरकारी योजनाओं जैसे एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) का कवरेज बढ़ने से भी इस बदलाव को बल मिल रहा है। रोजगार अब कृषि (Agriculture) से हटकर मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) और सर्विस सेक्टर (Services Sector) की ओर बढ़ रहा है, जो देश के ग्रोथ ड्राइवर्स के अनुरूप है।

युवाओं की चुनौतियां और वेतन का अंतर

लेकिन, खास तौर पर युवाओं के लिए अभी भी महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं। 15-29 वर्ष के युवाओं में बेरोजगारी की दर 9.9% तक गिर गई है, जो पहले 10.3% थी। इसके बावजूद, लगभग 25% युवा शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण (NEET) से बाहर हैं। यह दर 2023 में वैश्विक औसत 20.4% से अधिक है। प्रशिक्षण की गुणवत्ता को लेकर भी चिंताएं हैं, क्योंकि 5% से भी कम युवा औपचारिक वोकेशनल (Vocational) या टेक्निकल (Technical) ट्रेनिंग ले रहे हैं, जो उनकी जॉब रेडीनेस (Job Readiness) को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, भले ही महिलाओं की सैलरी में प्रतिशत के हिसाब से ज्यादा वृद्धि हुई है, लेकिन पुरुषों और महिलाओं के बीच सैलरी का पूर्ण अंतर (Absolute Pay Gap) अभी भी काफी बड़ा है। महिलाएं पुरुषों की कमाई के मुकाबले लगभग 70 पैसे ही कमा पाती हैं। यह अंतर अक्सर कुछ खास इंडस्ट्रीज में जॉब सेग्रीगेशन (Job Segregation) के कारण देखा जाता है।

नौकरी की गुणवत्ता और ट्रेनिंग पर सवाल

कुछ एक्सपर्ट्स हालिया रोजगार वृद्धि की गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्थिरता पर सवाल उठा रहे हैं। सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट की ऊंची दर और लगातार बना हुआ जेंडर वेज गैप (Gender Wage Gap) व्यापक आर्थिक अवसरों के बजाय गहरी संरचनात्मक असमानताओं का संकेत देते हैं। बड़ी NEET आबादी एक जोखिम पैदा करती है, क्योंकि कई युवा रोजगार के स्पष्ट रास्ते नहीं देख पाते। ट्रेनिंग प्रोग्राम्स की प्रासंगिकता पर भी चिंताएं बनी हुई हैं। 5% से कम युवाओं को औपचारिक वोकेशनल ट्रेनिंग मिलने से, पढ़ाए जा रहे स्किल्स और जॉब मार्केट की जरूरतों के बीच एक अंतर हो सकता है। वर्ल्ड बैंक ने भी भारत के इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स (ITIs) के संदर्भ में इस पर गौर किया है। आधिकारिक रिपोर्टें बताती हैं कि महिलाओं की वर्कफोर्स पार्टिसिपेशन (Workforce Participation) दर अभी भी कम है, और 2050 तक इसे बढ़ाने के लिए पेड और अनपेड दोनों तरह के काम के बोझ को कम करना होगा।

ग्रोथ का रास्ता: समावेशी नीतियों की जरूरत

भारत से मजबूत आर्थिक ग्रोथ बनाए रखने की उम्मीद है, IMF ने FY25-26 के लिए 7.3% का अनुमान लगाया है, और वर्ल्ड बैंक का मानना है कि यह सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था होगी। यह ग्रोथ मुख्य रूप से डोमेस्टिक डिमांड (Domestic Demand), सर्विसेज (Services) और मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) से प्रेरित होगी, जिसे प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेटिव (PLI) जैसी योजनाओं से और बल मिलेगा। हालांकि, यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह ग्रोथ समावेशी और गुणवत्तापूर्ण नौकरियां पैदा करे, संरचनात्मक मुद्दों को हल करना होगा। वोकेशनल ट्रेनिंग में सुधार, जेंडर वेज गैप को कम करना, और शिक्षा या रोजगार में न लगे युवाओं के लिए बेहतर अवसर प्रदान करना मुख्य नीतिगत क्षेत्र हैं। वोकेशनल ट्रेनिंग को लेबर मार्केट की जरूरतों से जोड़ने के लिए वर्ल्ड बैंक द्वारा हाल ही में दिए गए $830 मिलियन के लोन से इस फोकस को बल मिलता है।

Disclaimer:This content is for informational purposes only and does not constitute financial or investment advice. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making decisions. Investments are subject to market risks, and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors are not liable for any losses. Accuracy and completeness are not guaranteed, and views expressed may not reflect the publication’s editorial stance.