जून 2026 में भारत के व्हाइट-कॉलर जॉब मार्केट में सालाना आधार पर 6% की बढ़ोतरी हुई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बीमा और एंट्री-लेवल नौकरियों में ज़बरदस्त मांग देखी गई। हालांकि, शिपिंग और इंपोर्ट जैसे ग्लोबल ट्रेड पर निर्भर सेक्टरों में बड़ी छंटनी हुई है।
नौकरियों के बाज़ार में दिखी दोहरी चाल
जून 2026 में भारत का व्हाइट-कॉलर जॉब मार्केट एक मिली-जुली तस्वीर पेश कर रहा है। Naukri JobSpeak इंडेक्स के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, जून 2025 की तुलना में कुल हायरिंग में 6% का इजाफ़ा हुआ है, और यह इंडेक्स 3,027 के स्तर पर पहुंच गया है। जहां एक तरफ घरेलू सेवाओं से जुड़े सेक्टर नई नियुक्तियों में आगे हैं, वहीं इंटरनेशनल ट्रेड से जुड़े उद्योग अभी भी संघर्ष कर रहे हैं।
एक्सपोर्ट-इंटेंसिव सेक्टरों में कमजोरी
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने के बावजूद, एक्सपोर्ट और इंपोर्ट से जुड़े सेक्टरों में नौकरी सृजन उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ा है। एक्सपोर्ट और इंपोर्ट की भूमिकाओं में सालाना आधार पर 16% की गिरावट आई है, इंडेक्स 1,137 पर आ गया है। इसी तरह, शिपिंग और मरीन सेक्टर में हायरिंग 14% गिरी है, जबकि फर्टिलाइज़र और पेस्टिसाइड इंडस्ट्री में पिछले साल की तुलना में नई जॉब्स 20% कम हुईं हैं।
यह आंकड़े बताते हैं कि इन सेगमेंट्स की कंपनियां अभी भी अपनी वर्कफोर्स बढ़ाने को लेकर सतर्क हैं। हालांकि शिपिंग और फर्टिलाइज़र कंपनियों के लिए हायरिंग में महीने-दर-महीने थोड़ी सुधार हुआ है, लेकिन कुल मिलाकर कंपनियाँ ग्लोबल ट्रेड में स्थिरता आने तक कॉस्ट कटिंग को प्राथमिकता दे रही हैं।
टेक और डोमेस्टिक सर्विसेज में बड़ा अंतर
वर्तमान में लेबर मार्केट हाई-ग्रोथ वाली डोमेस्टिक सर्विसेज और धीमी गति वाले एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड व्यवसायों के बीच बंटा हुआ है। इंश्योरेंस सेक्टर हायरिंग में 16% की बढ़ोतरी के साथ सबसे आगे रहा, इसके बाद FMCG में 7%, टेलीकॉम में 6%, और BPO/ITES सर्विसेज में 4% की वृद्धि देखी गई। टेक्नोलॉजी स्पेस के भीतर, हायरिंग की मांग बहुत विशिष्ट है; जहां सामान्य IT और सॉफ्टवेयर सर्विसेज हायरिंग में 3% की गिरावट आई, वहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग से संबंधित भूमिकाओं में 25% का उछाल आया।
यह ट्रेंड बताता है कि कंपनियाँ बड़े पैमाने पर IT टीमों के विस्तार के बजाय विशेष एफिशिएंसी-ड्रिवन टेक्नोलॉजीज पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। इस बीच, केमिकल, पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक जैसे उद्योगों में हायरिंग 6% गिरी है, और एनर्जी व इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर लगभग स्थिर रहा, जिसमें 0.5% की मामूली गिरावट दर्ज की गई।
अनुभव के स्तर पर रुझान
हायरिंग एक्टिविटी अलग-अलग अनुभव ब्रैकेट्स की ओर भी बढ़ रही है। कंपनियाँ फ्रेश टैलेंट की तलाश में हैं, जिसमें एंट्री-लेवल हायरिंग 8% बढ़ी है। वहीं, सीनियर मैनेजमेंट की मांग ऊंची बनी हुई है, 16 साल से अधिक के अनुभव वाले प्रोफेशनल्स के लिए नौकरी के अवसर 9% बढ़े हैं। हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण वृद्धि 13 से 15 साल के अनुभव वाले कैटेगरी में देखी गई, जहाँ मांग में 12% का इजाफ़ा हुआ।
